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राम रहीम के डेरे से जुड़े लखनऊ के तार, मेडिकल कॉलेजों में हो रही शवों की सप्लाई

Sat, 09 Sep 2017 11:28 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ Updated Sat, 09 Sep 2017 11:28 AM IST
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up police to probe donation of cadavers by dera sacha sauda to uttar pradesh medical college
गुरमीत राम रहीम

राजधानी स्थित जीसीआरजी इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज में पढ़ाई के लिए इस वर्ष जनवरी से अगस्त तक डेरा सच्चा सौदा के 14 अनुयायियों के शव आए। इसकी खबर मिलते ही पुलिस ने कॉलेज प्रबंधक से शवों से जुड़े कागजात कब्जे में ले लिए हैं।

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दरअसल, डेरा सच्चा सौदा के प्रमुख राम रहीम साध्वियों से दुष्कर्म मामले में जेल में बंद हैं। राम रहीम के जेल जाने के बाद से लगातार डेरा सच्चा सौदा से जुड़ी खबरें आ रही हैं।
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इसी के तहत अब लखनऊ के निजी मेडिकल कॉलेज जीसीआरजी इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज में डेरा सच्चा सौदा से शवों को भेजे जाने का मामला प्रकाश में आया है।

इस कॉलेज में जब मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया की टीम ने निरीक्षण किया तो उसे यहां बच्चों की पढ़ाई के लिए शव नहीं मिले। इस पर एमसीआई ने आपत्ति जताई थी।

इसके बाद इस कॉलेज ने जनवरी से अगस्त 2017 के बीच डेरा सच्चा सौदा से 14 शव मंगाए। आरोप यह है कि इनके साथ न तो डेथ सर्टिफिकेट था और न ही सरकार से इसके लिए कोई अनुमति ली गई थी।
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मामले की जानकारी मिलने पर पुलिस ने भी इस कॉलेज के प्रबंधकों से संपर्क किया। पुलिस ने यहां से जरूरी कागजात अपने कब्जे में लेकर छानबीन शुरू कर दी है।

डेरा सच्चा सौदा से मंगाते हैं शव

जीसीआरजी मेडिकल कॉलेज के चेयरमैन अभिषेक यादव के पिता व कॉलेज के ट्रस्टी ओमकार यादव कहते हैं कि हम ही नहीं लखनऊ के ज्यादातर मेडिकल कॉलेज डेरा सच्चा सौदा से ही डेड बॉडी मंगाते हैं। उन्होंने बताया कि डेरा सच्चा सौदा अपने अनुयायियों को निधन होने के बाद अपनी बॉडी मेडिकल कॉलेजों को पढ़ाई के लिए दान देने के लिए तैयार करते थे।

उन्होंने बताया कि उनका कॉलेज अभी नया है इसलिए उन्होंने यहां पहले से स्थापित कॉलेजों से संपर्क किया तो उन्होंने डेरा सच्चा सौदा के बारे में बताया। हमने भी वहां से संपर्क किया। जब भी उनके किसी अनुयायी की मृत्यु होती है तो वहां से मेडिकल कॉलेजों को बॉडी दान में लेने के लिए फोन आता था। उन्होंने बताया कि प्राइवेट मेडिकल कॉलेजों को जरूरत की 90 प्रतिशत डेड बॉडी डेरा सच्चा सौदा के सहयोग से ही मिलती है।

सभी शवों के साथ आते हैं पूरे कागज

कॉलेज के ट्रस्टी ओमकार यादव ने बताया कि सभी शवों के साथ उसके पहचान पत्र की छायाप्रति व नोटरी से दान देने के लिए एक शपथ पत्र उसके खास सगे संबंधी द्वारा कॉलेज के नाम दिया जाता है। शव आने के बाद कॉलेज से धन्यवाद का एक पत्र भी रिलेटिव को भेजा जाता है।

डोनेशन की बॉडी में एसएसपी की इजाजत की नहीं होती जरूरत

ओमकार यादव ने बताया कि मेडिकल कॉलेज में आईं सभी 14 डेड बॉडी डोनेशन में दी गई हैं। यह नेचुरल डेथ वाली बॉडी हैं। इनके लिए एसएसपी या फिर किसी भी सरकारी अनुमति की जरूरत नहीं होती है। हमारे पास सभी शवों के डोनेशन के पेपर हैं। सभी का पता भी है। इसके साथ ही उस एंबुलेंस का भी नंबर है जिससे इन्हें मंगाया गया है। यदि किसी को कोई शक है तो वह इन पेपर की जांच करवा सकता है।

डेड बॉडी के बगैर कैसे होगी पढ़ाई

कॉलेज के ट्रस्टी कहते हैं कि मेडिकल की पढ़ाई के लिए डेड बॉडी की जरूरत होती है। यह बॉडी दान में ही लोग देते हैं। इसके बगैर पढ़ाई कैसे होगी। इसमें किसी भी प्रकार की कोई गड़बड़ी नहीं की गई है।

क्या कहते हैं महानिदेशक चिकित्सा शिक्षा
महानिदेशक चिकित्सा शिक्षा डॉ. केके गुप्ता कहते हैं कि जीसीआरजी कॉलेज में डेड बॉडी डेरा सच्चा सौदा आश्रम से मंगाए जाने का मामला संज्ञान में आया है। इस मामले की जांच करवा रहे हैं। अभी तक एमसीआई द्वारा भेजा गया पत्र डीजीएमई कार्यालय में नहीं मिला है। इसकी भी खोज करवा रहे हैं। इस मामले में यदि कोई घपला या गड़बड़ी है तो संबंधित कॉलेज के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
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