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यूपी: गांवों में छह घंटे की कटौती पर हाहाकार, दस पॉवर हाउस हुए बंद, एक जुलाई से लागू हुई रोस्टर की व्यवस्था
Fri, 05 Jul 2024 01:05 AM IST
रोहित मिश्र
अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ
अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ
Published by: रोहित मिश्र
Updated Fri, 05 Jul 2024 01:05 AM IST
सार
Power cut in UP: यूपी में गांवों में छह घंटे की कटौती के आदेश के बाद हाहाकार मचा हुआ है। पावर कॉरपोरेशन की रणनीति पर उपभोक्ता परिषद ने सवाल उठाया है।
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बिजली
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
प्रदेश में भरपूर बिजली उपलब्ध होने के बावजूद गांवों में छह घंटे कटौती का मामला तूल पकड़ रहा है। स्थिति यह है कि प्रदेश में छह पावर हाउस बिजली की अधिकता यानी रिजर्व शट डाउन (आरएसडी) की वजह से बंद किए गए हैं। वहीं, चार बिजलीघर तकनीकी वजहों और मरम्मत कार्य के चलते बंद किए गए हैं। पावर कॉरपोरेशन की इस रणनीति पर उपभोक्ता परिषद ने सवाल उठाया है और इसे उपभोक्ताओं के साथ नाइंसाफी बताया है।
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प्रदेश में एक जुलाई से रोस्टर प्रणाली लागू की गई है। इसके तहत ग्रामीण इलाके में छह घंटे, बुंदेलखंड में चार घंटे, नगर पंचायत एवं तहसील मुख्यालय में ढाई घंटे की कटौती की जा रही है। वहीं, 10 पावर हाउस बंद कर दिए गए। इसमें छह उत्पादन इकाइयों के बंद होने की वजह रिजर्व शटडाउन (आरएसडी) बताया गया है। आरएसडी के तहत बंद होने का सीधा मतलब है कि अधिक उत्पादन होने पर बिजली का उपयोग कहां करें? आरएसडी के तहत टांडा की एक, दो, तीन व चार इकाई, हरदुआगंज की यूनिट सात, आठ एवं नौ शामिल हैं। इन सभी को मिलाकर 795 मेगावाट बिजली उत्पादन कम हुआ है। जबकि 10 यूनिटों को मिलाकर 1522 मेगावाट विद्युत उत्पादन कम हुआ है।
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बंद होने की वजह
सूत्रों की मानें तो प्रदेश में लगी उत्पादन इकाइयों से पावर कॉरपोरेशन बिजली खरीदता है। इसकी दरें अलग-अलग हैं, जो औसतन तीन रुपये प्रति यूनिट से ज्यादा पड़ती है। छह घंटे की कटौती के बाद एक तरह प्रदेश में मांग घटकर 25 से 27 हजार मेगावाट के बीच पहुंच गई है तो दूसरी तरफ एक्सचेंज पर खरीद 70 पैसे से लेकर चार रुपये प्रति यूनिट तक है। ऐसे में इन यूनिटों से उत्पादन करने में मुनाफा कम खर्च ज्यादा हो रहा है। यही वजह है कि छह यूनिटों को आरएसडी के तहत बंद कर दिया गया है।
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पहली बार रोस्टर के बीच आरडीएस में बंद हुई छह इकाइयां
राज्य उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा ने कहा कि तकनीकी खराबी और मरम्मत के नाम पर बिजली इकाइयां बंद होना सामान्य बात है, लेकिन छह घंटे की कटौती के बीच छह इकाइयों को आरएसडी में बंद करना नाइंसाफी है। इससे स्पष्ट है कि राज्य के पास पर्याप्त बिजली है। इसके बाद भी जानबूझ कर कटौती की जा रही है। कहा, उपभोक्ता परिषद इसके खिलाफ न्यायिक लड़ाई लड़ेगा। कहा, राज्यों में बिजली उत्पादन इकाइयां इसलिए लगती है क्योंकि उसे जनता को बिजली देना होता है, लेकिन प्रदेश में बिजली उत्पादन इकाइयों को इसलिए बंद कर दिया गया है क्योंकि ग्रामीणों को 24 घंटे बिजली नहीं देना है। उन्होंने सीएम से मामले में हस्तक्षेप की मांग की है।