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UP Nikay Chunav 2023 : चुनावी चर्चा में सबसे आगे रहीं महिलाएं, नतीजों में दिखा नफा-नुकसान
Mon, 15 May 2023 06:34 AM IST
दुष्यंत शर्मा
अशोक मिश्रा, लखनऊ
अशोक मिश्रा, लखनऊ
Published by: दुष्यंत शर्मा
Updated Mon, 15 May 2023 06:34 AM IST
सार
कानपुर में रिवाल्वर वाली मेयर के नाम से चर्चित प्रमिला पांडेय को जनता ने दोबारा चुना। पार्टी में भितरघात की आहट भी उनके आत्मविश्वास को डिगा नहीं सकी, उन्होंने जीत हासिल की।
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कानपुर महापौर प्रमिला पांडेय
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
निकाय चुनाव के नतीजे सामने आने के बाद सबकी नजरें उन महिला प्रत्याशियों पर भी रहीं, जिनका नाम नफे-नुकसान को लेकर चुनाव के दौरान खासी चर्चा में था। कानपुर में रिवाल्वर वाली मेयर के नाम से चर्चित प्रमिला पांडेय को जनता ने दोबारा चुना। पार्टी में भितरघात की आहट भी उनके आत्मविश्वास को डिगा नहीं सकी, उन्होंने जीत हासिल की।
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सबसे ज्यादा चर्चा में प्रतापगढ़ का चुनाव भी रहा। जहां पूर्व मंत्री रघुराज प्रताप सिंह उर्फ राजा भैया के विरोधी गुलशन यादव की पत्नी सीमा ने कुंडा नगर पंचायत के चेयरमैन के चुनाव में जीत का परचम लहराया। सीमा की जीत से अब स्थानीय लोग प्रतापगढ़ की भावी सियासत के समीकरण बदलने की संभावना भी जता रहे हैं।
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निकाय चुनाव के दौरान सपा विधायक राकेश प्रताप सिंह और भाजपा नेता दीपक सिंह के बीच थाने में हुई मारपीट ने खासी सुर्खियां बटोरी। अमेठी पुलिस के हिस्ट्रीशीटर दीपक सिंह की पत्नी रश्मि सिंह ने सपा प्रत्याशी तारा को नगर पालिका परिषद के चुनाव में मात देकर अपना वर्चस्व कायम किया।
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चुनाव से पहले ट्विटर पर सपा नेताओं के निशाने पर आईं भाजपा युवा मोर्चा की सोशल मीडिया हेड रिचा राजपूत को चुनाव में शिकस्त का सामना करना पड़ा। वे औरैया की नगर पंचायत अटसू से भाजपा प्रत्याशी थीं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के पूर्व ओएसडी अभिषेक कौशिक की पत्नी डॉ. अनुकृति चौधरी ने भी सहारनपुर की सैदनगली नगर पंचायत के अध्यक्ष पद का चुनाव जीतकर अपनी सियासी पारी की शुरुआत की।
लखनऊ में बाहुबली सपा नेता अरुण शंकर शुक्ला उर्फ अन्ना के परिवार का लगातार 25 साल तक पार्षद की सीट पर कब्जा रहा। इस बार ओबीसी सीट होने पर उन्होंने अपने करीबी को चुनाव मैदान में उतारा, लेकिन सफलता हाथ नहीं लगी।
चुनाव के दौरान प्रयागराज में भी लगातार चुनावी समीकरण बदलते रहे। माफिया अतीक की पत्नी शाइस्ता को बसपा ने पहले तो मेयर का प्रत्याशी बनाया था। लेकिन उमेश पाल हत्याकांड में शाइस्ता के नामजद होने के बाद उनका टिकट कट गया। मंत्री नंद गोपाल गुप्ता की पत्नी अभिलाषा गुप्ता को पार्टी ने दोबारा मेयर का टिकट नहीं दिया।