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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Lucknow News ›   UP News: ED will also confiscate the property of four close relatives of Mukhtar, names of four surfaced in mo

UP News : मुख्तार के चार करीबियों की संपत्ति भी जब्त करेगा ईडी, मनी लांड्रिंग केस में सामने आए चार के नाम

Sun, 14 May 2023 07:53 PM IST
पंकज श्रीवास्‍तव अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ
अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ Published by: पंकज श्रीवास्‍तव Updated Sun, 14 May 2023 07:53 PM IST
सार

मुख्तार की पत्नी अफशा अंसारी के स्वामित्व वाली कंपनी विकास कंस्ट्रक्शन से जुड़े रविंद्र नरायन सिंह, जाकिर हुसैन, विक्रम अग्रहरि और शादाब अहमद की चल-अचल संपत्तियों को ईडी मनी लांड्रिंग एक्ट के तहत चिन्हित कर जब्त करने की कवायद में जुटी है।

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UP News: ED will also confiscate the property of four close relatives of Mukhtar, names of four surfaced in mo
mukhtar ansari - फोटो : फाइल फोटो

विस्तार

माफिया मुख्तार अंसारी के करीबी जितेंद्र सापरा और गणेश दत्त मिश्रा की तरह चार अन्य लोग भी प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के रडार पर आ चुके हैं। मुख्तार की पत्नी अफशा अंसारी के स्वामित्व वाली कंपनी विकास कंस्ट्रक्शन से जुड़े रविंद्र नरायन सिंह, जाकिर हुसैन, विक्रम अग्रहरि और शादाब अहमद की चल-अचल संपत्तियों को ईडी मनी लांड्रिंग एक्ट के तहत चिन्हित कर जब्त करने की कवायद में जुटी है।

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दरअसल, ईडी की जांच में सामने आया है कि मुख्तार की काली कमाई को विकास कंस्ट्रक्शन के बैंक खाते में जमा किया जा रहा था। बैंक में नगदी जमा करने के बाद उसे तुरंत निकाल कर संपत्तियों को खरीदा जाता था। इतना ही नहीं, जांच एजेंसियों को चकमा देने के लिए विकास कंस्ट्रक्शन में जमा रकम को मुख्तार के ससुर जमशेद राना के स्वामित्व वाली कंपनी आगाज प्रोजेक्ट एंड इंजीनियरिंग के खाते में ट्रांसफर किया जाता था।
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बाद में ये रकम दोबारा विकास कंस्ट्रक्शन के खाते में भेज दी जाती थी। इस रकम से मऊ, गाजीपुर, जालौन, दिल्ली, लखनऊ में 23 संपत्तियां खरीदी गई। जांच में ये भी पता चला है कि इनमें से अधिकतर संपत्तियों को मुख्तार ने अपना खौफ दिखाकर बाजार भाव से आधी से कम कीमत में खरीदा था।
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पैसा नहीं होने पर भी खरीदी संपत्तियां
ईडी की जांच में सामने आया है कि गणेश दत्त मिश्रा ने गाजीपुर में जिन दो संपत्तियों को खरीदा था, उसके पास इसके लिए पर्याप्त रकम नहीं थी। इन संपत्तियों को 1.29 करोड़ में खरीदा गया, हालांकि इसके भुगतान के प्रमाण जांच एजेंसी को नहीं मिले।


दरअसल, ये संपत्तियां मुख्तार की बेनामी संपत्तियां थी, जिसे गणेश दत्त मिश्रा के नाम से खरीदा गया था। बाद में गणेश दत्त मिश्रा ने इन संपत्तियों को आगाज प्रोजेक्ट एंड इंजीनियरिंग को यूनियन बैंक ऑफ इंडिया से 1.60 करोड़ रुपये का लोन लेने के लिए बंधक रखा था। मुख्तार के ससुर की इस कंपनी में गणेश दत्त मिश्रा का कोई संबंध नहीं पाया गया।

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