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UP News : डीजीपी ने दिए निर्देश, कब्जा दिलाने या हटाने की कार्रवाई नहीं करेंगे पुलिस

Tue, 14 Mar 2023 09:43 PM IST
पंकज श्रीवास्‍तव न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ Published by: पंकज श्रीवास्‍तव Updated Tue, 14 Mar 2023 09:43 PM IST
सार

हाईकोर्ट के निर्देश के अनुपालन में डीजीपी ने इस बाबत निर्देश दिए कि किसी भी दशा में थाना प्रभारी, उप निरीक्षक अथवा कोई भी पुलिसकर्मी अपने स्तर पर कब्जेदारी के विवाद का निस्तारण करते हुए कब्जा दिलाने अथवा कब्जा हटवाने की कार्रवाई  नहीं करेगा।

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UP News: DGP gave instructions, police will not take action to get possession or removal
डीजीपी देवेंद्र सिंह चौहान। - फोटो : amar ujala

विस्तार

डीजीपी डीएस चौहान ने मातहतों को भूमि विवाद के मामलों में कब्जा दिलाने या हटवाने की कार्यवाही नहीं करने का निर्देश दिया है। दरअसल, हाईकोर्ट ने एक याचिका की सुनवाई के दौरान गत एक मार्च को डीजीपी को इस संबंध में दिशा-निर्देश जारी करने को कहा था। हाईकोर्ट के निर्देश के अनुपालन में डीजीपी ने इस बाबत निर्देश दिए कि किसी भी दशा में थाना प्रभारी, उप निरीक्षक अथवा कोई भी पुलिसकर्मी अपने स्तर पर कब्जेदारी के विवाद का निस्तारण करते हुए कब्जा दिलाने अथवा कब्जा हटवाने की कार्रवाई नहीं करेगा।

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निर्देशों में कहा गया कि किसी भी पक्ष को कब्जा दिलाने अथवा हटवाने का कार्य राजस्व टीम एवं स्थानीय मजिस्ट्रेट की उपस्थिति एवं सक्षम आदेश के बाद ही किया जाए। किसी भी भूमि के विधिक स्वामी के अधिकारों में बिना न्यायालय या मजिस्ट्रेट के आदेश के अनावश्यक हस्तक्षेप न किया जाए। राजस्व विभाग, नगर निगम एवं स्थानीय विकास प्राधिकरण इत्यादि के माध्यम से भी ऐसे समस्त भूमि प्रकरणों जिनमें हिंसा या विवाद की स्थिति हो, को भी चिन्हित कराकर भूमि विवाद रजिस्टर में दर्ज किया जाए। गंभीर मामलों में संयुक्त टीम बनाकर वरिष्ठ अधिकारियों की मौजूदगी में विवादों का निस्तारण कराया जाए।
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डीजीपी ने जारी किए गवाहों की सुरक्षा के लिए अहम दिशा-निर्देश
प्रयागराज में राजूपाल हत्याकांड के गवाह उमेश पाल की हत्या के बाद पुलिस विभाग को गवाह सुरक्षा योजना की फिर याद आई है। डीजीपी डीएस चौहान ने इस संबंध में मातहतों को अहम दिशा-निर्देश जारी किए है। निर्देशों के मुताबिक साक्षी सुरक्षा योजना को लेकर इलाहाबाद हाईकोर्ट के आदेश आैर शासन की ओर से जारी दिशा-निर्देशों का अनुपालन करने, इसके प्रति जागरुकता बढ़ाने, योजना की जानकारी प्रत्येक थाने तक पहुंचाने तथा पुलिसकर्मियों को साक्षी सुरक्षा के प्रति संवेदनशील बनाने का उल्लेख किया गया है।
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डीजीपी की ओर से जारी निर्देशों में कहा गया है कि गवाह सुरक्षा योजना के लिए समस्त जनपदों में जिला एवं सत्र न्यायाधीश की अध्यक्षता में स्टैंडिंग कमेटी का गठन किया गया है। कमेटी योजना के अंतर्गत आवेदन प्राप्त होने पर गवाहों की सुरक्षा के लिए आदेश पारित करेगी। कमेटी समयबद्ध रूप से गवाहों को सुरक्षा मुहैया कराना सुनिश्चित करेगी। वहीं जनपदों एवं कमिश्नरेट स्तर पर गठित गवाह सुरक्षा सेल के कर्मियों तथा कार्यों की समीक्षा जनपद पुलिस प्रभारी नियमित रूप से करेंगे। सेल का प्रभारी वरिष्ठ अधिकारी को बनाया जाएगा जो गवाह की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए पूरी तरह उत्तरदायी होगा। 

खासतौर पर एमपी-एमएलए न्यायालयों में विचाराधीन गंभीर अपराधों के मामलों में गवाहों की सुरक्षा का मूल्यांकन और विश्लेषण करते हुए सुरक्षा उपलब्ध करायी जाएगी। यदि किसी गवाह ने खतरे की आशंका जताई है तो तत्काल वरिष्ठ अधिकारियों को बताकर सुरक्षा मुहैया करायी जाएगी। गवाहों की सुरक्षा में किसी प्रकार की शिथिलता और लापरवाही सामने आने पर संबंधित पुलिस अधिकारियों का उत्तरदायित्व निर्धारित किया जाएगा। समस्त एडीजी जोन और पुलिस कमिश्नर हर महीने इसकी गहन समीक्षा करके मुख्यालय को रिपोर्ट भेजेंगे।


जिरह पूरी होने के बाद भी सुरक्षा
किसी भी गवाह का न्यायालय में जिरह की कार्यवाही पूरी होने के बाद भी उसके सुरक्षा के संबंध में योजना के अंतर्गत गठित कमेटी आसन्न संकट आंकलन के अनुसार सुरक्षा उपलब्ध कराने के लिए विचार किया जाएगा और उसे सुरक्षा उपलब्ध कराई जाएगी। योजना के प्रति संवेदनशीलता और जागरूकता बढ़ाने के लिए समस्त एडीजी जोन को नोडल अधिकारी बनाया जाएगा। गवाहों के अधिकार के संबंध में प्रदेश के प्रत्येक थाने में एक नोटिस बोर्ड लगाया जाएगा। डीजीपी ने इस योजना को उच्च प्राथमिकता पर लागू करने को कहा है ताकि किसी भी गवाह के साथ कोई अप्रिय घटना न होने पाए।
 

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