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UP News : यूपी में परचून की दुकान पर नहीं बिकेंगी आयुर्वेदिक दवाएं, जल्द बनेगी नई नियमावली
Mon, 17 Oct 2022 06:23 AM IST
दुष्यंत शर्मा
चंद्रभान यादव, लखनऊ
चंद्रभान यादव, लखनऊ
Published by: दुष्यंत शर्मा
Updated Mon, 17 Oct 2022 06:23 AM IST
सार
UP News : प्रदेश में परचून की दुकानों या जनरल स्टोर से आयुर्वेदिक दवाओं की बिक्री नहीं हो पाएगी। इस पर रोक के लिए जल्द ही नई नियमावली तैयार की जाएगी। इसके तहत ब्रांडेड आयुर्वेदिक दवाओं की बिक्री के लिए फार्मासिस्ट व लाइसेंस प्रणाली के अलावा दवा निर्माण में आयुर्वेदिक फार्मेसिस्ट की अनिवार्यता लागू की जाएगी।
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विस्तार
प्रदेश में परचून की दुकानों या जनरल स्टोर से आयुर्वेदिक दवाओं की बिक्री नहीं हो पाएगी। इस पर रोक के लिए जल्द ही नई नियमावली तैयार की जाएगी। इसके तहत ब्रांडेड आयुर्वेदिक दवाओं की बिक्री के लिए फार्मासिस्ट व लाइसेंस प्रणाली के अलावा दवा निर्माण में आयुर्वेदिक फार्मेसिस्ट की अनिवार्यता लागू की जाएगी।
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दरअसल कोराना काल के बाद आयुर्वेद के प्रति लोगों का रुझान बढ़ा है। इसका बाजार निरंतर बढ़ रहा है। ऐसे में सरकार आयुर्वेदिक दवाओं की गुणवत्ता को लेकर गंभीर है। इसी के तहत सभी क्षेत्रीय आयुर्वेदिक एवं यूनानी अधिकारियों को हर माह कम से कम दो दवाओं के सैंपल लेकर जांच के निर्देश दिए गए हैं। घटिया दवा तैयार करने वाली कंपनियों पर शिकंजा कसा जा रहा है।
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आयुर्वेद विभाग का मानना है कि लाइसेंस प्रणाली लागू होने से आयुर्वेदिक दवा दुकानों पर लोगों को सही जानकारी मिलेगी। गुणवत्ता विहीन दवा बेचने वालों पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी। विभाग विभिन्न राज्यों में तैयार की गई नियमावली का अध्ययन भी करा रहा है। आयुष मंत्रालय से भी सलाह ली गई है। सभी रिपोर्ट का मूल्यांकन करने के बाद प्रदेश में नई नियमावली तैयार कर लागू की जाएगी।
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रोजगार व अच्छी दवाओं का लाभ
निदेशक आयुर्वेद प्रो. एसएन सिंह ने कहा कि नई व्यवस्था से इस विधा के फार्मेसिस्टों को रोजगार मिलेगा। दवा निर्माण से लेकर बिक्री तक की गुणवत्ता बढ़ेगी। विभाग के पास अधिकृत दुकानों की संख्या पता रहेगी। लाइसेंस खोने के डर से दुकानदार घटिया दवा बेचने से बचेंगे। नीम-हकीम जैसे झोलाछाप से लोग बचेंगे। आयुर्वेद के क्षेत्र में व्यवसायिक गतिविधियां बढ़ेंगी।
अन्य विधा में यह व्यवस्था
एलोपैथ दवा बिक्री का लाइसेंस बिना फार्मेसिस्ट के नहीं मिलता है। 2015 से होम्योपैथ में भी लाइसेंस प्रणाली लागू है, जिसमें फार्मेसिस्ट की अनिवार्यता है।
प्रशिक्षित से ही दवा निर्माण
लखनऊ। आयुर्वेद विभाग आयुर्वेदिक दवाओं की बिक्री और निर्माण अभी तक की नियमावली में आयुर्वेदिक दवा निर्माण करने वाली फर्म में एक बीएएमएस डॉक्टर और तीन टेक्निकल स्टॉफ का होना अनिवार्य है। टेक्निकल स्टॉफ की डिग्री अनिवार्यता बीएससी रखी गई है। नई नियमावली में इनमें से एक आयुर्वेदिक फार्मासिस्ट अनिवार्य होगा, क्योंकि वह दवा तैयार करने के लिए प्रशिक्षित माना जाता है।
आयुष विभाग की ओर से प्रस्ताव तैयार किया गया है। जल्द इसे अमल में लाया जाएगा। लाइसेंस होने से दवा दुकान को चिह्नित कर जांच करने में आसानी होगी।
- डॉ. दयाशंकर मिश्र, दयालू, आयुष एवं एफएसडीए मंत्री (स्वतंत्र प्रभार)