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UP News : बिजलीघरों के लिए आयातित कोयला खरीदने को मंजूरी, पावर कॉर्पोरेशन को सरकार देगी 1098 करोड़ की अतिरिक्त सब्सिडी

Wed, 13 Jul 2022 05:18 PM IST
पंकज श्रीवास्‍तव न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ Published by: पंकज श्रीवास्‍तव Updated Wed, 13 Jul 2022 05:18 PM IST
सार

साथ ही प्रदेश के ताप बिजलीघरों में घरेलू कोयले के साथ-साथ आयातित कोयले के इस्तेमाल का रास्ता साफ हो गया है। तत्काल भले ही न, लेकिन भविष्य में आयातित कोयले के अतिरिक्त व्ययभार का बोझ उपभोक्ताओं पर पड़ना तय है।

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UP News: Approval to buy imported coal for power plants, government will give additional subsidy of 1098 crores to Power Corporation

विस्तार

बीते कई महीने से आयातित कोयला खरीदने का विरोध कर रही प्रदेश सरकार ने आखिरकार इसके लिए हरीझंडी दे ही दी। प्रदेश के ताप बिजलीघरों के लिए अगस्त और सितंबर में 5.5 लाख मीट्रिक टन आयातित कोयले की खरीद के प्रस्ताव को मंगलवार को कैबिनेट बाई सर्कुलेशन मंजूरी दे दी गई। इसी के साथ ही प्रदेश के ताप बिजलीघरों में घरेलू कोयले के साथ-साथ आयातित कोयले के इस्तेमाल का रास्ता साफ हो गया है। तत्काल भले ही न, लेकिन भविष्य में आयातित कोयले के अतिरिक्त व्ययभार का बोझ उपभोक्ताओं पर पड़ना तय है।

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आयातित कोयले से बिजली की उत्पादन लागत में होने वाली वृद्धि की भरपाई के लिए राज्य सरकार पावर कॉर्पोरेशन को 1098 करोड़ रुपये सब्सिडी के रूप में उपलब्ध कराएगी ताकि उपभोक्ताओं पर दरों का बोझ न बढ़े। सूत्रों के अनुसार कैबिनेट  से मंजूर प्रस्ताव में इस बात का जिक्र किया गया है कि आयातित कोयले से पड़ने वाले अतिरिक्त व्ययभार को भविष्य में नियामक आयोग के समक्ष दाखिल किए जाने वाले टैरिफ प्रस्ताव में शामिल किया जा सकता है।
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अपर मुख्य सचिव ऊर्जा अवनीश कुमार अवस्थी ने बताया कि कोल इंडिया ने प्रदेश के बिजलीघरों के कोल आवंटन में कमी कर दी है, जिससे आने वाले दिनों में बिजली संकट पैदा होने की आशंका थी। इसके चलते आयातित कोयला खरीदने का फैसला किया गया है। गौरतलब है कि प्रदेश के बिजलीघरों के लिए रोजाना 15-17 रैक कोयले का आवंटन है, लेकिन कोल इंडिया क ी ओर से 11-12 रैक कोयले की ही आपूर्ति की जा रही है। 
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डेढ़ महीने में ही पीछे खींचे कदम
केंद्रीय ऊर्जा मंत्रालय मई से ही यूपी पर आयातित कोयले की खरीद का दबाव बना रहा है। आयातित कोयला न खरीदने पर घरेलू कोयले में कटौती की चेतावनी भी दी थी। बिजली दरों में इजाफा होने की संभावना होने के मद्देनजर राज्य सरकार ने मई में ही साफ कर दिया था कि वह आयातित कोयला नहीं खरीदेगी। 20 मई को विशेष सचिव ऊर्जा अनिल कुमार ने आदेश जारी किया था कि प्रदेश के सार्वजनिक व निजी क्षेत्र के बिजलीघर कोयला आयात नहीं करेंगे। उधर, केंद्र की ओर से लगातार पड़ रहे दबाव के कारण राज्य सरकार को झुकना पड़ गया। अंतत: मई के आदेश को पलटते हुए सरकार ने आयातित कोयले की खरीद पर मुहर लगा दी।


उपभोक्ता परिषद ने जताया एतराज
आयातित कोयले की खरीद के फैसले पर राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद ने एतराज जताया है। परिषद के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा का कहना है कि भले ही इसका भार उपभोक्ताओं पर न डाला जाए, लेकिन भविष्य में जनता और प्रदेश को इसका खामियाजा भुगतना पड़ेगा। 3000 रुपये मीट्रिक टन लागत के घरेलू कोयले की जगह 20 हजार रुपये मीट्रिक टन कीमत वाले विदेशी कोयले की खरीद से जहां राज्यों को भारी चपत लगेगी वहीं एक निजी घराने को फायदा होगा। वर्मा ने कहा कि यह बेहद गंभीर मामला है। उपभोक्ता परिषद प्रदेश और उपभोक्ताओं के हित में इसके खिलाफ अपना संघर्ष जारी रखेगा।

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