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यूपी : लखनऊ में पेंशन के लिए भतीजे व पोते ने दृष्टिहीन चाचा को गोली मारी, सीने के आर-पार निकली गोली

Fri, 05 Dec 2025 09:37 PM IST
आकाश द्विवेदी अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ
अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ Published by: आकाश द्विवेदी Updated Fri, 05 Dec 2025 09:37 PM IST
सार

खनऊ के दुबग्गा में पेंशन और संपत्ति के विवाद में भतीजे जितेंद्र और उसके बेटे चिराग ने दृष्टिहीन दिव्यांग वीरेंद्र यादव को गोली मारकर हत्या कर दी। पुलिस ने चिराग को गिरफ्तार कर लिया है, जबकि जितेंद्र की तलाश जारी है।

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UP: Nephew and grandson shot blind uncle in Lucknow for pension, bullet passed through chest
पुलिस मामले की जांच करती हुई - फोटो : अमर उजाला नेटवर्क

विस्तार

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लखनऊ के दुबग्गा के टांडखेड़ा गांव में शुक्रवार शाम ननिहाल में रह रहे दिव्यांग वीरेंद्र यादव उर्फ डोंगा (50) की उनके भतीजे जितेंद्र यादव व उसके बेटे चिराग ने गोली मारकर हत्या कर दी। पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ हत्या का केस दर्ज कर एक को हिरासत में लिया है। घरवालों का आरोप है कि संपत्ति और पेंशन के रुपये के विवाद में हत्या का अंजाम दिया गया है।

तालकटोरा के मेहंदीखेड़ा निवासी वीरेंद्र जन्म से दृष्टिबाधित और बाएं हाथ से दिव्यांग थे। पिछले छह माह से वह बुजुर्ग मां अशोका देवी के साथ दुबग्गा के टांडखेड़ा स्थित ननिहाल में रह रहे थे। परिजनों के अनुसार शुक्रवार शाम चार बजे वह गांव में मामा के घर से कुछ दूरी पर बनी भैस की हौदियां के बाहर बैठे थे। इसी दौरान उनका भतीजा जितेंद्र व चिराग बाइक से पहुंचे। दोनों ने वीरेंद्र को साथ घर चलने की बात कही तो उन्होंने मना कर दिया।

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विरोध किया तो आरोपियों ने असलहा निकाला

जितेंद्र व चिराग इस बात पर भड़क उठे और उनसे गाली-गलौज करना शुरू कर दी। उन्होंने विरोध किया तो आरोपियों ने असलहा निकाल कर उनके सीने पर गोली मार दी। गोली उनके सीने पर लगी और वह खून से लथपथ होकर गिर पड़े। वारदात को अंजाम देकर आरोपी वहां से भाग निकले।

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गोली चलने की आवाज सुन परिजन और ग्रामीण भागकर मौके पर पहुंचे। दुबग्गा पुलिस वीरेंद्र को ट्रामा सेंटर लेकर पहुंची, जहां डॉक्टरों ने उनको मृत घोषित कर दिया। हत्या की सूचना पर डीसीपी पश्चिम विश्वजीत श्रीवास्तव, एसीपी काकोरी शकील अहमद और फॉरेंसिक टीम भी पहुंच गई। डीसीपी ने बताया कि वीरेंद्र के रिश्ते के भतीजे कपिल यादव की तहरीर पर जितेंद्र व चिराग के खिलाफ हत्या का केस दर्ज कर चिराग को पुलिस हिरासत में ले लिया है। आरोपी जितेंद्र की तलाश की जा रही है।

संपत्ति व पेंशन के रुपये की लालच में की गई हत्या

वीरेंद्र के रिश्तेदार रमन ने बताया कि वीरेंद्र के पिता बेचालाल रेलवे में चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी थे। 25 साल पहले उनकी मौत हो गई थी। बेचालाल के बेटे नरेंद्र को उनकी जगह पर नौकरी भी मिली थी। मां अशोका देवी को पेंशन मिल रही थी। घरवालों का कहना है कि अशोक देवी ने पेंशन के रुपये खाते से कभी निकाले ही नहीं।



वहीं दिव्यांग वीरेंद्र सिंह के नाम मेहंदीखेड़ा इलाके में एक हजार स्क्वायर फुट का मकान है। आरोपी जितेंद्र व उसका बेटा चिराग अक्सर वीरेंद्र और अशोक से संपत्ति व पेंशन के रुपये को लेकर झगड़ा करते थे। इसी से परेशान होकर वीरेंद्र मां के साथ ननिहाल में आकर रहने लगे थे। तीन माह पहले भी आरोपियों ने टांडखेड़ा गांव आकर वीरेंद्र के साथ मारपीट भी की थी। रमन का कहना है कि इसी विवाद के चलते आरोपियों ने वीरेंद्र की हत्या कर दी।

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