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यूपी राजनीति: मायावती को अशोक सिद्धार्थ की पाती, 'संन्यास लेने से आकाश आनंद के करियर तक' खुलकर लिखी मन की बात

Thu, 10 Sep 2026 08:12 AM IST
Bhupendra Singh अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ
अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ Published by: Bhupendra Singh Updated Thu, 10 Sep 2026 08:12 AM IST
सार

मायावती के 'राजनीति से संन्यास' लेने के सुझाव पर आकाश आनंद के ससुर अशोक सिद्धार्थ ने बसपा सुप्रीमो को संदेश लिखा है। इसमें उन्होंने कहा कि आपका आदेश मेरे लिए अंतिम शब्द है। आकाश आनंद को गुमराह करने का आरोप निराधार है। मैं संन्यास लेने के लिए तैयार हूं। मेरे संन्यास को आकाश की वापसी से न जोड़ा जाए। आगे पढ़ें पूरी खबर...

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Ashok Siddharth wrote message to Mayawati stating that he was ready to take sanyas for politics
अशोक सिद्धार्थ ने मायावती को लिखी पाती - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

बसपा सुप्रीमो मायावती की ओर से राजनीति से संन्यास लेने की बात कहे जाने के बाद पूर्व राज्यसभा सदस्य अशोक सिद्धार्थ ने उन्हें पत्र लिखकर अपना जवाब दिया है। पत्र में सिद्धार्थ ने मायावती के प्रति अपनी निष्ठा जताते हुए कहा कि उनके लिए बहनजी का आदेश दुनिया की किसी भी चीज से बढ़कर है। हमने पिछले 35 वर्षों से बसपा, कांशीराम और डॉ. भीमराव आंबेडकर के मिशन के लिए समर्पित होकर काम किया है।

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अशोक सिद्धार्थ ने पत्र में मायावती को अपनी राजनीतिक गुरु और बड़ी बहन बताते हुए कहा कि उन्होंने उन्हें विधान परिषद और राज्यसभा तक पहुंचाया। परिवार के सदस्य के रूप में सम्मान दिया। यह उनका ऐसा ऋण है, जिसे वह इस जीवन में चुका नहीं सकते।

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पार्टी हित के खिलाफ कभी काम नहीं किया

सिद्धार्थ ने कहा कि उन्होंने कभी पार्टी के हित के खिलाफ कोई काम नहीं किया। मायावती के खिलाफ कुछ करने के बारे में सपने में भी नहीं सोच सकते। उन्होंने तथागत गौतम बुद्ध और कांशीराम को साक्षी मानते हुए अपनी निष्ठा का उल्लेख किया। कहा कि मायावती की एक-एक नसीहत और आदेश उनके लिए अंतिम शब्द हैं।

आकाश आनंद को सलाह देने के आरोप को बताया गलत

अशोक सिद्धार्थ ने पत्र में आकाश आनंद को सलाह देने या उन्हें गुमराह करने के आरोपों को भी खारिज किया। उन्होंने कहा कि बीते कई महीनों से आकाश आनंद से उनकी मुलाकात भी केवल कुछ अवसरों पर हुई, जब उनके कार्यक्रम उन राज्यों में थे, जिनकी जिम्मेदारी मायावती ने उन्हें दी थी।

उन्होंने कहा कि पार्टी के कुछ साथी उन्हें मायावती से मिले सम्मान के कारण यह आरोप लगाते हैं कि वह पार्टी पर कब्जा करना चाहते हैं या आकाश आनंद को गुमराह करने की कोशिश कर रहे हैं। ये सब आरोप पूरी तरह निराधार हैं। यह राजनीतिक विरोधियों की साजिश है।
 

आकाश आनंद को वापस जिम्मेदारी देना आपका फैसला

सिद्धार्थ ने मायावती से अनुरोध किया कि उनके संन्यास लेने के फैसले को आकाश आनंद की वापसी से जोड़कर न देखा जाए। आकाश आनंद उनके दामाद से पहले मायावती के भतीजे और आनंद कुमार के बेटे हैं। आकाश ने जीवन के दो दशक मायावती की छत्रछाया और देखरेख में बिताए हैं। उनके जैसे मामूली कार्यकर्ता के लिए आकाश आनंद को गुमराह करना संभव नहीं है। उनको वापस जिम्मेदारी देना या न देना मायावती का फैसला है।

'मिशन को नुकसान हो रहा है तो अभी संन्यास ले रहा हूं'

पत्र में अशोक सिद्धार्थ ने मायावती की त्याग और समर्पण की प्रशंसा करते हुए कहा कि यदि उन्हें लगता है कि उनके राजनीतिक और सामाजिक जीवन में बने रहने से बहुजन मिशन को नुकसान पहुंच रहा है तो वह तत्काल राजनीति और सामाजिक जीवन से संन्यास लेने के लिए तैयार हैं।

उन्होंने कहा कि उनका पूरा जीवन मायावती का ऋणी है और उनके लिए संन्यास लेना बहुत छोटी बात है। पत्र के अंत में उन्होंने 'जय भीम, जय भारत और जय बहुजन समाज' लिखते हुए खुद को मायावती का कार्यकर्ता बताया और पत्र में हुई देरी के लिए क्षमा मांगी।
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