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सुना है क्या: 'साहब का सपना न हुआ अपना', साथ ही 'गल्ले पर कौन बैठेगा और लक्ष्मी के अनन्य उपासक' के किस्से

Thu, 10 Sep 2026 11:50 AM IST
Bhupendra Singh अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ
अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ Published by: Bhupendra Singh Updated Thu, 10 Sep 2026 11:50 AM IST
सार

यूपी के राजनीतिक गलियारे और प्रशासन में तमाम ऐसे किस्से हैं, जो हैं तो उनके अंदरखाने के... लेकिन, चाहे-अनचाहे बाहर आ ही जाते हैं। ऐसे किस्सों को आप अमर उजाला के "सुना है क्या" सीरीज में पढ़ सकते हैं। तो आइए पढ़ते हैं इस बार क्या है खास...

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Sahab dream remained unfulfilled along with who will man cash counter and ardent devotees of Goddess Lakshmi
सुना है क्या/suna hai kya - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

यूपी के राजनीतिक गलियारे और प्रशासनिक गलियों में आज तीन किस्से काफी चर्चा में रहे। चाहे-अनचाहे आखिर ये बाहर आ ही जाते हैं। इन्हें रोकने की हर कोशिश नाकाम होती है। आज की कड़ी में 'साहब का सपना न हुआ अपना' की कहानी। इसके अलावा 'गल्ले पर कौन बैठेगा' और 'लक्ष्मी के अनन्य उपासक' के किस्से भी चर्चा में रहे। आगे पढ़ें, नई कानाफूसी...

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साहब का सपना न हुआ अपना

सेवा से फ़ारिक होने के बाद से साहब सियासतदां होने के सपना देख रहे थे। इसके लिए उन्होंने भगवा दल से सियासत में इंट्री मारने के लिए लगातार जमीन पर बैठकर बड़ी मेहनत भी की। सूबे के एक बड़े शहर की एक सीट पर साहब ने निगाह गड़ा रखी थी, लेकिन उसी सीट पर दिल्ली से एक नेताजी को लैंड करा दिया गया और ऊपर से कोई गुंजाइश न होने का इशारा भी कर दिया गया। साहब भी ठहरे पुराने खिलाड़ी, हार मानने को तैयार नहीं। सपना पूरा होता न देख साहब ने अब सहयोगी दलों से रफ-जफ बढ़ाने के साथ ही हाथी की सवारी करने भी संभावना तलाशने में जुट गए हैं।

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गल्ले पर कौन बैठेगा?

एक सियासी दल में मचा घमासान देख बाकी पार्टी वाले प्रसन्नचित हैं। उन्हें आपदा में अवसर दिखने लगा है। इस दल की खूबी कुछ ऐसी है कि कोर वोट बैंक कहीं खिसकता नहीं है लिहाजा इसी पर सबकी नजर है। इस बार तो खुद कुछ किए बिना ही मौका मिल रहा है तो जमकर दुष्प्रचार में जुटे हैं। दूसरे के घर की लड़ाई की वजह गल्ले पर काबिज होने से जोड़ रहे हैं। यह बात दीगर है कि वे भी इस मायाजाल में शामिल हैं। कहीं दूसरे के गल्ले पर नजर रखने के फेर में उनकी दुकान न लुट जाए। राजनीति में कुछ भी संभव है।

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लक्ष्मी के अनन्य उपासक

एक नौकरशाह जॉइनिंग के दिन से ही मां लक्ष्मी के अनन्य उपासक हैं। दिन हो या रात, वह मां लक्ष्मी के बारे में ही सोचते रहते हैं। पश्चिम में जहां अभी हैं, लक्ष्मीजी का आशीर्वाद उन्हें ठीक से नहीं मिल पा रहा है। दरअसल उन्हें और ज्यादा मात्रा में आशीर्वाद चाहिए और उन्हें लगता वह तभी संभव है, जब राजधानी में कदम पड़ें। इसलिए उन्होंने निदेशक के पद के लिए सेटिंग लगाई है। इस सेटिंग के लिए उन्होंने 25-25 लाख के गिफ्ट भी दिए हैं। अब देखते हैं मां लक्ष्मी की कितनी कृपा उन पर बरसती है।

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