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UP: यहां सियासी नैया को विकास के लिए नए मांझी की तलाश... सपा-भाजपा के मुकाबले को इस दल ने बनाया त्रिकोणीय

Sun, 10 Nov 2024 01:13 PM IST
शाहरुख खान चंद्रभान यादव, अमर उजाला, लखनऊ
चंद्रभान यादव, अमर उजाला, लखनऊ Published by: शाहरुख खान Updated Sun, 10 Nov 2024 01:13 PM IST
सार

यूपी की इस सीट पर विकास के लिए नए मांझी की तलाश है। सपा-भाजपा के मुकाबले को इस दल ने त्रिकोणीय बना दिया है। सबके अपने-अपने दावे हैं, पर जातीय गोलबंदी और दलीय गुटबाजी हावी रहेगी।

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UP Mirzapur Majhawan assembly seat by-election Interesting BSP made contest between SP and BJP triangular
by election 2024 - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

मिर्जापुर के मझवां विधानसभा क्षेत्र में हो रहा उपचुनाव रोचक होता जा रहा है। यहां भाजपा उम्मीदवार एमबीए डिग्रीधारी पूर्व विधायक सुचिष्मिता मौर्य का प्रबंधन कारगर होगा या सपा प्रत्याशी डॉ. ज्योति बिंद की सियासी डॉक्टरी चलेगी, यह काफी हद तक बसपा के दीपक तिवारी की गति पर निर्भर करेगा। तीनों के अपने-अपने दावे हैं... पर, यहां जातीय गोलबंदी और दलीय गुटबाजी हावी है।
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इस सीट से अब तक सपा नहीं जीती है। वह उपचुनाव में खाता खोलने को बेताब है। वहीं, भाजपा के सामने अपना दबदबा बनाए रखने की चुनौती है। ऐसे में बसपा को परंपरागत वोटबैंक के साथ ब्राह्मणों पर भरोसा है। यह भरोसा सपा, भाजपा और बसपा के बीच मुकाबले को त्रिकोणीय बना रहा है। 
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यहां का सियासी समीकरण इस बार बदला है। वर्ष 2022 के आम चुनाव में भाजपा-निषाद पार्टी के गठबंधन उम्मीदवार के रूप में विजयी रहे डॉ. विनोद बिंद अब सांसद बन चुके हैं। उनके इस्तीफे से खाली हुई इस सीट पर निषाद पार्टी दावा करती रही, लेकिन भाजपा ने पूर्व विधायक सुचिष्मिता मौर्य को मौका दिया है।
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ऐसे में निषाद पार्टी के झंडाबरदार मैदान में नहीं दिख रहे हैं। बसपा से वाया भाजपा सपा में आए डॉ. रमेश बिंद की बेटी डॉ. ज्योति बिंद सपा से मैदान में हैं। वोटबैंक को देखते हुए बसपा ने यहां से दीपक तिवारी को टिकट देकर मुकाबले को रोचक बना दिया है। पर, मतदाता शांत हैं, लेकिन बातचीत करते ही दिल में मची सियासी उथल-पुथल बाहर निकल आती है।

बिंद व ब्राह्मण समाज पर टिकी निगाह
कछवां रोड स्टेशन क्रॉसिंग पर चाय की दुकान लगाने वाले अजय बिंद कहते हैं कि इस बार बिंद बिरादरी धोखा नहीं खाएगा। एकजुट रहेगा। डॉ. ज्योति को विधानसभा भेजेगा। यादव-मुसलमान भी कहीं नहीं जाएगा। अजय की बात को देवाशीष शुक्ल काटते हैं। 

कहते हैं कि विधायक रहते हुए डॉ. रमेश बिंद ने ब्राह्मणों को नजरअंदाज किया है। इसका बदला लेना है। बसपा का दलित वोट और ब्राह्मणों की एकजुटता हाथी को मजबूत करेगी। तभी भाजपा की पैरोकारी करते हुए विवेक गुप्ता कहते हैं कि मौर्य, वैश्य, ठाकुर, पाल, पटेल सभी एकजुट हैं। 

देर सबेर ब्राह्मण भी भाजपा का साथ देगा। इस पर देवाशीष कहते हैं कि जो सपा को रोकेगा, ब्राह्मण उसके साथ रहेंगे। ऐसी ही चर्चा कछवां नगर पंचायत में प्रवीण यादव की डेयरी पर भी चल रही थी। यहां जुटे लोगों में ज्यादातर सपा के साथ दिखे, पर वे आशंकित थे कि कहीं-कहीं बिंद बिरादरी बंट रही है। 

यहां सांसद विनोद बिंद का प्रभाव है। कछवां कस्बे में लोगों की चर्चा से त्रिकोणीय मुकाबले के संकेत मिले। कछवां डीह में भी अखिलेश मिश्रा के घर के बाहर लोग वोटों का गुणा-गणित लगा रहे थे। वे पीएम मोदी और सीएम योगी के चेहरे को भाजपा के लिए मजबूत पक्ष बता रहे थे।

नौकरी न मिलने की तड़प
औराई के माधोपुर स्टेशन के बगल से होते हुए जब हम कटका गांव पहुंचे तो यहां रामकिशुन पटेल की दुकान पर बैठे लोग पूरी तरह से भाजपा के साथ होने की दुहाई देते हैं। पहाड़ी ब्लॉक के अकसौली गांव निवासी पिंटू दूबे कहते हैं कि जनता ने सभी दलों को मौका दिया, पर किसी ने विकास नहीं किया। वह सामने की सड़क दिखाते हैं। यहां बैठे हरिशंकर पटेल कहते हैं कि युवाओं को नौकरी की जरूरत है, लेकिन नहीं मिल रही है। 

कछवां कस्बा चौराहे पर राम मिलन की दुकान पर जुटे धीरज गुप्ता, राजेश सिंह भाजपा के साथ हैं। शमसुद्दीन और इकबाल चुनाव पर चुप्पी साध जाते हैं, लेकिन रोजगार के मुद्दे पर सभी एक राय हैं। अधिवक्ता सुनील यादव बताते हैं कि पहले कस्बे में चार फैक्टरी थी। यहां कोल्हू, चारा काटने की मशीन सहित खेती से संबंधित अन्य उपकरण बनते थे। पूरे इलाके को रोजगार मिलता था। इनके बंद होने से कोई कारखाना नहीं लगा।
 

ये है मझवां सीट का इतिहास
यहां से अब तक कांग्रेस, जनसंघ, जनता दल, बसपा और भाजपा जीती है। यह 1952 से 1969 तक सुरक्षित रही। फिर 1974 में सामान्य हुई तो कांग्रेस के दिग्गज नेता रुद्र प्रसाद और फिर लोकपति त्रिपाठी विधायक बने। यहां आठ बार कांग्रेस, पांच बार बसपा जीती है। वर्ष 2017 में भाजपा से सुचिष्मिता मौर्य और 2022 में भाजपा-निषाद पार्टी के डॉ. विनोद बिंद विधायक बने। सपा का यहां से अब तक खाता नहीं खुला है।

जानिए प्रत्याशियों को
डॉ. ज्योति बिंद : सपा उम्मीदवार चिकित्सक हैं। उनके पिता डॉ. रमेश बिंद मझवां से बसपा के तीन बार विधायक और भाजपा से भदोही से सांसद रह चुके हैं। अब पिता की विरासत संभालने के लिए वे मैदान में हैं।
ताकत : सपा का परंपरागत वोट और पिता की सियासी विरासत।
चुनौती : अपनी बिरादरी को जोड़े रखना। भितरघात रोकना।
 

सुचिष्मिता मौर्य : भाजपा की पूर्व विधायक एमबीए डिग्रीधारी हैं। इनके ससुर भी विधायक रहे हैं। वर्ष 2022 के चुनाव में भाजपा ने टिकट नहीं दिया था। अब इन्हें उपचुनाव में मौका मिला है।
ताकत : विधायक रहते कराए गए विकास कार्य और भाजपा का परंपरागत वोटबैंक।
चुनौती : वोटबैंक में सेंधमारी रोकना क्योंकि यहां से निषाद पार्टी दावेदार थी।

दीपक तिवारी : बसपा उम्मीदवार जीडी बिनानी डिग्री कॉलेज के अध्यक्ष रह चुके हैं। सपा से सियासी सफर शुरू करने वाले दीपक अब हाथी पर सवार हैं। वे पत्थर व्यवसायी हैं।
ताकत : दलितों-ब्राह्मणों का वोटबैंक। युवाओं का साथ।
चुनौती : वोटबैंक में सेंधमारी रोकना।

जातीय समीकरण
यहां दलित, ब्राह्मण, बिंद वोटरों की संख्या करीब 60-70 हजार है। यादव 40 हजार, कुशवाहा, मौर्य 35 हजार, पाल 20 हजार, राजपूत 20 हजार, मुस्लिम 25 हजार और पटेल 22 हजार हैं।

सीएम ही नहीं, केंद्रीय मंत्री तक डटे
यहां से किसी न किसी रूप में केंद्रीय मंत्री अनुप्रिया पटेल की प्रतिष्ठा भी दांव पर है। यही वजह है कि अनुप्रिया पटेल, सीएम योगी आदित्यनाथ, उप मुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक व केशव प्रसाद मौर्य व कई अन्य मंत्री निरंतर मैदान में सक्रिय हैं।

शिवशंकर के बाहर भेजने पर सवाल
सपा के पूर्व जिलाध्यक्ष शिवशंकर सिंह यादव मझवां से तीन बार चुनाव लड़ चुके हैं। उनकी पत्नी प्रभावती यादव मिर्जापुर जिला पंचायत अध्यक्ष रही हैं। पर, चुनाव से ठीक पहले उन्हें करहल में सह प्रभारी बनाकर भेज दिया गया। इसे लेकर भी क्षेत्र में चर्चा है।
 

कुल मतदाता 3,99,259
1,88,136 महिलाएं
2,11,105 पुरुष
18 थर्ड जेंडर

विधानसभा और लोकसभा में पार्टियों को मिले मत
चुनाव वर्ष भाजपा सपा बसपा कांग्रेस
2017 107839 44212 66680 -
2022 103235 69648 22990 3399
2024 94061 92299 39603  -




 
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