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UP: केजीएमयू में अब एप से होगा दवा का वितरण, मरीज के पंजीकृत मोबाइल नंबर पर ओटीपी सत्यापन के बाद ही मिलेगी दवा

Sat, 06 Jun 2026 08:22 AM IST
Akash Dwivedi अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ
अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ Published by: Akash Dwivedi Updated Sat, 06 Jun 2026 08:22 AM IST
सार

केजीएमयू ने दवाओं, इंप्लांट और सर्जिकल उपकरणों के वितरण में पारदर्शिता बढ़ाने के लिए ओटीपी आधारित डिजिटल व्यवस्था लागू करने का निर्णय लिया है। नई प्रणाली में पंजीकृत मोबाइल नंबर पर सत्यापन के बाद ही सामग्री जारी होगी। इससे अनियमितताओं पर रोक और जवाबदेही सुनिश्चित करने का प्रयास किया जाएगा।

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UP: Medicine distribution at KGMU will now be done via an app; medicines will be provided only after OTP verif
केजीएमयू। - फोटो : संवाद

विस्तार

किंग जॉर्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय (केजीएमयू) में दवाओं, इंप्लांट, स्टेंट और सर्जिकल उपकरणों की खरीद में करोड़ों रुपये के घोटालों के वाद प्रशासन सतर्क हो गया है। संस्थान ने अब इलाज प्रक्रिया में पारदर्शिता लाने के लिए एक अत्याधुनिक डिजिटल व्यवस्था लागू करने का निर्णय लिया है। इसके तहत मरीज के पंजीकृत मोवाइल नंबर पर ओटीपी सत्यापन के बाद ही चिकित्सा सामग्री जारी की जाएगी।

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यह कदम यूरोलॉजी विभाग में सामने आए करीव ढाई करोड़ रुपये के घपले के बाद उठाया गया है। यहां कैंसर की महंगी दवाएं पेशाब और गुर्दे के मरीजों के नाम पर जारी की गई थीं। जांच समिति ने अनियमितताओं की पुष्टि की जिसके बाद आरोपी चिकित्सक और कर्मचारियों पर कार्रवाई हुई। इस प्रकरण के वाद केजीएमयू प्रशासन ने सात अन्य विभागों की जांच भी शुरू कर दी है। 
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केजीएमयू के प्रवक्ता डॉ. केके सिंह ने बताया कि आईटी विभाग के सहयोग से एक विशेष मोवाइल एप विकसित किया जा रहा है। यह एप मरीज की भर्ती से लेकर उपचार तक की संपूर्ण जानकारी रियल टाइम में दर्ज करेगा। एप के जरिये मरीज को दवा और इंप्लांट का वितरण होगा। यह व्यवस्था जल्द लागू होगी।

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एप व्यवस्था में इस तरह लग सकती है सेंध

सूत्रों का कहना है एप के जरिये दवा एवं इंप्लांट वितरण की व्यवस्था मोबाइल नंबर पर आधारित होगी। इसमें खतरा ये है कि दवा, इंप्लांट, सर्जिकल उपकरणों के नाम पर गोलमाल करने वाले फर्जी मरीज तैयार कर सकते हैं। परिवार, परिचितों के मोबाइल नंबर मरीज के तौर पर पंजीकृत कराकर व्यवस्था में सेंध लगा सकते हैं। ऐसे मामलों को कैसे रोका जाएगा, यह एप लॉन्च होने के बाद ही पता चल सकेगा।

 

नई व्यवस्था से बढ़ेगी पारदर्शिता और जवाबदेही

में ओटीपी सत्यापन के बाद ही सामग्री निर्गत की जा सकेगी। मरीज या परिजन एप पर यूएचआईडी नंबर दर्ज कर इलाज से संबंधित पूरी जानकारी भी प्राप्त कर सकेंगे। यह डिजिटल निगरानी प्रणाली फर्जी तरीके से दवाएं जारी करने जैसी अनियमितताओं पर प्रभावी रोक लगाएगी।

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