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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Lucknow News ›   UP: Mayawati said that the proceedings of Parliament and state legislatures should run for at least 100 days;

यूपी: मायावती बोलीं- कम से कम 100 दिन चले संसद व विधानमंडलों की कार्यवाही; मदरसे पर कही ये बात

Tue, 20 Jan 2026 05:23 PM IST
आकाश द्विवेदी अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ
अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ Published by: आकाश द्विवेदी Updated Tue, 20 Jan 2026 05:23 PM IST
सार

बसपा प्रमुख मायावती ने संसद और राज्यों के विधानमंडलों की कार्यवाही कम से कम 100 दिन चलाने की मांग की है। उन्होंने घटते सत्रों पर चिंता जताई। साथ ही श्रावस्ती में मदरसा सील करने के मामले में हाईकोर्ट के आदेश को महत्वपूर्ण बताते हुए स्वागत किया।

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UP: Mayawati said that the proceedings of Parliament and state legislatures should run for at least 100 days;
बसपा सुप्रीमो मायावती। - फोटो : amar ujala

विस्तार

बहुजन समाज पार्टी की राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं पूर्व मुख्यमंत्री मायावती ने कहा कि संसद व राज्यों के विधानमंडल के सत्र कम से कम 100 दिन चलने चाहिए। सत्र के घटते समय के साथ हर बार हंगामेदार होने तथा स्थगन आदि से इनकी जन उपयोगिता घटती जा रही है, जो चिंता का विषय है।

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बसपा सुप्रीमो ने मंगलवार को जारी अपने बयान में कहा कि लखनऊ में आयोजित 86वें अखिल भारतीय पीठासीन अधिकारियों के तीन-दिवसीय सम्मेलन के दौरान विधानमंडलों की कार्यवाही के लगातार घटते समय पर चिंता व्यक्त करना उचित, सामयिक व सराहनीय है। सरकार और विपक्ष को गंभीर होकर इस पर अमल करना चाहिए। 
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संसद व राज्यों के विधानमंडल संवैधानिक व लोकतांत्रिक व्यवस्था के अहम स्तंभ हैं। सरकार एवं कार्यपालिका को देश व जनहित के प्रति उत्तरदायित्व बनाए रखने का एक सशक्त माध्यम हैं। इनकी कार्यवाही वर्ष में कम-से-कम 100 दिन के कैलेंडर तथा सही नियमों के हिसाब से शांति-व्यवस्था के साथ चले, यह जरूरी है।

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मदरसे के बारे में हाईकोर्ट का आदेश महत्वपूर्ण

वहीं दूसरी ओर बसपा सुप्रीमो ने श्रावस्ती में मदरसे को बंद करने के बाबत हाईकोर्ट द्वारा दिए गए आदेश का स्वागत किया है। उन्होंने कहा कि सरकारी मान्यता नहीं होना मदरसा को बंद करने का आधार नहीं संबंधी हाईकोर्ट का फैसला महत्वपूर्ण व सामयिक है। 



इस आधार पर श्रावस्ती में मदरसे पर लगी सील 24 घंटे में हटाने के निर्देश का भी स्वागत है। कोई भी सरकार नीतिगत तौर पर प्राइवेट मदरसों के विरुद्ध नहीं होती है। यह शायद जिला स्तर पर अधिकारियों की मनमानी का परिणाम है कि इस प्रकार की अप्रिय घटनाओं की खबरें आती रहती हैं। सरकार को इसका संज्ञान लेकर ऐसी प्रवृति को सख्ती से रोकना चाहिए।

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