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'अब कोई नहीं कह पाएगा कि यादव होने के कारण हुई नियुक्ति'

Thu, 17 Dec 2015 01:50 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ Updated Thu, 17 Dec 2015 01:50 PM IST
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UP Lokayukta speaks about his priorities.

न्यायिक सेवाओं में 39 साल का लंबा अनुभव रखने वाले 67 वर्षीय जस्टिस वीरेंद्र सिंह लोकायुक्त के पद को कोई चुनौती नहीं मानते। वे कहते हैं-यह पद कोई कांटों का ताज नहीं। साथ ही वह जोड़ते हैं- न तो किसी के दबाव में, न ही किसी के प्रभाव में काम करूंगा। खुश हूं कि सुप्रीम कोर्ट ने मुझे इस पद के काबिल समझा। अब तो कोई नहीं कह पाएगा कि मेरी नियुक्ति राजनीतिक है, या यादव होने की वजह से है।

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सुप्रीम कोर्ट ने उदाहरण भी पेश कर दिया है कि यदि किसी राज्य में लोकायुक्त के चयन को लेकर विवाद है तो शीर्ष अदालत दखल दे सकती है। राज्य उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग में बधाई देने आए वरिष्ठ अधिवक्ताओं से घिरे जस्टिस वीरेंद्र सिंह यादव ने बुधवार को ‘अमर उजाला’ से बातचीत की। पेश हैं प्रमुख अंश:
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- काफी दिनों से चल रही उठापटक के बाद सुप्रीम कोर्ट के हस्तक्षेप से आप लोकायुक्त बन गए?

सहारनपुर जिले के तिवाया गांव के स्वतंत्रता सेनानी परिवार से हूं। जमीनी स्तर से काम शुरू करके मैं इस मुकाम तक पहुंचा। 1977 में मुंसिफ मजिस्ट्रेट के रूप में न्यायिक सेवा जॉइन की थी। हमेशा समय से प्रमोशन मिलते रहे। खुशी है कि लोकायुक्त के पद तक पहुंचा हूं। इसलिए भी सुखद अनुभूति है कि सुप्रीम कोर्ट ने प्रोफाइल देखकर मेरे नाम का अनुमोदन किया।
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यह पहला मामला, जब कोर्ट ने लोकायुक्त को चुना

UP Lokayukta speaks about his priorities.

- सुप्रीम कोर्ट से चयन पर मुहर लगने का शायद यह पहला मामला है?

हां, यह पहला मामला है, जब सुप्रीम कोर्ट ने लोकायुक्त के चयन में दखल दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने उदाहरण पेश किया है कि यदि किसी राज्य में लोकायुक्त चयन को लेकर विवाद की स्थिति है तो वह उसमें हस्तेक्षप कर सकती है। शीर्ष अदालत के फैसले के बाद यह भी नहीं कहा जाएगा कि मेरा चयन राजनीतिक कारणों से हुआ है?

- जस्टिस रवींद्र सिंह की नियुक्ति को लेकर विवाद के बाद आपका नाम सामने आया?


- सुप्रीम कोर्ट ने लोकायुक्त के लिए पांच नामों पर विचार किया था। इसलिए यह नहीं कहा जा सकता है कि यादव होने के नाते हमें लोकायुक्त बनाया गया है। यह भी आरोप नहीं लगेगा कि जस्टिस रवींद्र सिंह लोकायुक्त नहीं बन पाए तो मेरी नियुक्ति कर दी गई।

- लोकायुक्त पद काफी चुनौतीपूर्ण है, आप क्या मानते हैं?

मैं ऐसा नहीं मानता। हमें इतना अनुभव हो गया है कि किसी स्टेज पर कोई समस्या नहीं आएगी। तजुर्बे से हर समस्या का समाधान हो जाता है। फिर हम तो शुरू से हर चुनौती का सामना करते हुए आए हैं। हम बिना दबाव, बिना प्रभाव और बिना सुझाव के हर समस्या का हल निकालेंगे।

ये होंगी लोकायुक्त की प्राथमिकताएं

UP Lokayukta speaks about his priorities.

- लोकायुक्त के रूप में आपकी प्राथमिकताएं क्या होंगी ?

कार्यभार ग्रहण करने के बाद देखेंगे कि किस तरह के मामलों की कितनी पेंडेंसी है। मैं जहां भी रहता हूं, कार्य संस्कृति विकसित करता हूं। राज्य उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग में इसे देखा जा सकता है। मैं खुद काम करता हूं तो दूसरों को भी करना पड़ेगा। मैं लोकायुक्त अधिनियम के उद्देश्यों को पूरा करने की कोशिश करूंगा।

- लोकायुक्त की कई जांच सरकार के स्तर पर कार्रवाई के लिए लंबित हैं?


इसे भी देखेंगे। हर तरह के लंबित मामलों की समीक्षा करेंगे।

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