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UP: अवध, पूर्वांचल और बुंदेलखंड में गठबंधन का नया प्रयोग, अपनाया है ये फार्मूला; जातिगत समीकरण भी साधा

Sun, 19 May 2024 09:15 AM IST
शाहरुख खान चंद्रभान यादव, अमर उजाला, लखनऊ
चंद्रभान यादव, अमर उजाला, लखनऊ Published by: शाहरुख खान Updated Sun, 19 May 2024 09:15 AM IST
सार

Uttar Pradesh Lok Sabha Election 2024: अवध, पूर्वांचल और बुंदेलखंड में गठबंधन के नए प्रयोग की परीक्षा होगी। गठबंधन सोशल इंजीनियरिंग के सहारे है। जातिगत समीकरण साधने पर भी जोर दिया गया है।

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UP Lok Sabha Election 2024 INDIA Alliance Political Equation in Awadh, Purvanchal And Bundelkhand
UP lok Sabha Election 2024 - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

अवध, पूर्वांचल एवं बुंदेलखंड में इंडिया गठबंधन के नए प्रयोग की परीक्षा है। पार्टी ने इस इलाके में न सिर्फ प्रत्याशी उतारने में सोशल इंजीनियरिंग का फार्मूला अपनाया है बल्कि जातिगत समीकरण को धार देने के लिए संबंधित बिरादरी के नेताओं को भी मैदान में उतार दिया है। 
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सियासी जानकारों का कहना है कि इस प्रयोग के सकारात्मक नतीजे आए तो प्रदेश की राजनीति की दिशा बदल सकती है। पांचवें, छठवें और सातवें चरण में 41 सीट पर चुनाव हो रहे हैं। पांच सीटें बुंदेलखंड की हैं, जबकि 36 अवध और पूर्वांचल की हैं। 
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इन सीटों पर गठबंधन के उम्मीदवारों की संख्या देखें तो दो क्षत्रिय व पांच ब्राह्मण सहित सामान्य वर्ग के 11 उम्मीदवार हैं। आठ कुर्मी, पांच निषाद, एक यादव, एक पाल सहित 19 पिछड़ी जाति के हैं। 11 दलितों में चार पासी समाज के हैं। मुस्लिम सिर्फ एक है। 
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अब इंडिया गठबंधन की ओर से चुनाव प्रचार की कमान सौंपते वक्त भी सोशल इंजीनियरिंग का ध्यान रखा जा रहा है। विधानसभा क्षेत्रवार जिस इलाके में जिस जाति का वर्चस्व है, उसमें उसी जाति के नेता को उतारा गया है। ताकि पार्टी की बात को आसानी से समझा सकें।

उदाहरण के तौर पर देखें तो सीतापुर में कांग्रेस उम्मीदवार राकेश राठौर हैं। यहां की बिसवां विधानसभा क्षेत्र में यादव नेताओं को तो लहरपुर में कुर्मी नेताओं को उतारा गया है। इसी तरह जौनपुर लोकसभा क्षेत्र में सपा उम्मीदवार बाबूसिंह कुशवाहा हैं। यहां यादव बहुल मल्हनी में स्थानीय विधायक के साथ ही अन्य कई यादव विधायक एवं पूर्व विधायक को भेजा गया है। जबकि मड़ियाहूं में कुर्मी नेताओं की तैनाती की गई है।
 

पीडीए से बढ़ा दलितों का रुझान
सपा छात्रसभा के राष्ट्रीय महासचिव मनोज पासवान कहते हैं कि पार्टी का पीएडी फार्मूला कारगर दिख रहा है। संविधान और आरक्षण बचाने की बात सिर्फ सपा- कांग्रेस कर रही है। फैजाबाद सीट सामान्य है, लेकिन यहां पार्टी ने दलित उम्मीदवार उतारा है। पार्टी के बैनर में डा. अंबेडकर के साथ ही ऊदादेवी पासी, संत गाडगे की तस्वीर लगाई जा रही है। दलितों को भरोसा है कि उनके हक की बात सपा और इंडिया गठबंधन की कर रहा है। इसका असर लोकसभा चुनाव में दिखना तय है।

प्रदेश की सियासत में होगा बदलाव
सामाजिक चेतना फाउंडेशन के सचिव एवं हाईकोर्ट के अधिवक्ता महेंद्र मंडल कहते हैं कि इंडिया गठबंधन ने जिस तरह से टिकट बंटवारे में सोशल इंजीनियरिंग की है, वह कारगर रहा तो भविष्य की सियासत में बदलाव होगा। सभी प्रमुख दल पिछड़ों एवं दलितों पर जोर देंगे। सपा पहले यादव- मुसलमान पर जोर देती रही है, लेकिन इस बार ऐसा नहीं है। यह उसकी सोची समझी सियासी रणनीति है।

विकास के आगे नहीं चलेगी जाति
भाजपा पिछड़ा मोर्चा काशी क्षेत्र के महामंत्री सुभाष कुशवाहा कहते हैं कि भाजपा की केंद्र एवं प्रदेश सरकार के विकास कार्य के आगे विपक्ष की हर रणनीति फेल है।

अवध और पूर्वांचल में जनता प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पर भरोसा करती है। इसका असर चुनाव में साफ दिख रहा है। जहां तक टिकट की बात है कि इस क्षेत्र में भाजपा ने भी पिछड़ों और दलितों की आबादी के हिसाब से टिकट दिया है। पीडीए का फार्मूला हवा हवाई है।
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