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Lucknow News: सुशांत गोल्फ सिटी को अपने कब्जे में लेकर विकसित करेगा एलडीए
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लखनऊ। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में मंगलवार को हुई कैबिनेट बैठक में प्रस्ताव मंजूर किया गया कि एलडीए शहीद पथ स्थित अंसल एपीआई की हाईटेक टाउनशिप सुशांत गोल्फ सिटी को अपने कब्जे में लेकर विकसित करेगा। इसके लिए राष्ट्रीय कंपनी विधि अधिकरण (एनसीएलटी) में दावा पेश किया जाएगा। इस फैसले से करीब पांच हजार आवंटियों को राहत मिलेगी। इन्हें पैसा जमा कराने के दो साल बाद भी न तो जमीन और न ही फ्लैट मिले हैं।
बीते साल फरवरी में एनसीएलटी ने अंसल कंपनी को दिवालिया घोषित किया था। ऐसा करने से पहले न तो आवंटियों और निवेशकों और न अंसल को कॉलोनी विकसित करने का लाइसेंस देने वाली संस्था एलडीए का पक्ष जाना गया। अंसल को दिवालिया घोषित किए जाने पर आवंटी अपीलीय कोर्ट में गए थे। करीब 10 महीने तक चली सुनवाई के बाद जुलाई में आदेश हुआ कि इनका पक्ष सुना जाए। इसके बाद आवंटियों ने एनसीएलटी में अपील की। हालांकि, एलडीए की ओर से टाउनशिप को टेकओवर करने के संबंध में पहले कोई अपील नहीं की गई थी। हाईटेक टाउनशिप का लाइसेंस शासन की कमेटी मंजूरी करती है। इस कारण उसकी अनुमति का इंतजार था। अब शासन से प्रस्ताव पास होने के बाद एलडीए टाउनशिप टेकओवर करने के लिए एनसीएलटी में दावा पेश करेगा। आवंटी व निवेशक गगन टंडन ने बताया कि एनसीएलटी की कोर्ट में 23 सितंबर को सुनवाई होगी।
शासन करेगा एलडीए को वित्तीय मदद
टाउनशिप पर संभावित देनदारी करीब 2,912 करोड़ रुपये है। वास्तविक देनदारी इंसॉल्वेंसी रिजॉल्यूशन प्रोफेशनल (आईआरपी) की प्रक्रिया से तय होगी। इसके भुगतान के लिए शासन एलडीए को सीड कैपिटल के रूप में आवश्यक रकम उपलब्ध कराएगा। विशेष सचिव आवास राजेश कुमार राय ने बताया कि परियोजना सरकारी अभिकरण से पूरा कराने से आवंटियों की समस्या का समाधान हो सकेगा।
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2216 करोड़ रुपये खर्च होंगे कार्यों पर
मेसर्स अंसल को सुशांत गोल्फ सिटी में 440 केवीए और 220 केवीए समेत अन्य सब स्टेशन बनवाने थे। हालांकि, एक भी सब स्टेशन नहीं बनाया गया। 50 किलोमीटर लंबे रोड नेटवर्क का काम भी अधूरा है। नलकूप, पानी की लाइन, सीवर लाइन, पार्क, ड्रेनेज सिस्टम के काम अधूरे हैं। टेकओवर करने के बाद एलडीए ये सभी काम पूरे कराएगा। अधूरी सुविधाओं पर 2216 करोड़ रुपये खर्च होंगे। पॉकेट-1 से चार तक सुविधाओं के विकास पर 453.10 करोड़ रुपये खर्च होंगे। पॉकेट-5 में विकास कार्यों पर 1,126.52 करोड़ रुपये खर्च होंगे। रेलवे ओवरब्रिज के बचे कामों पर 114.28 करोड़ रुपये खर्च होंगे। सब-स्टेशन के निर्माण पर 523 करोड़ का खर्च अनुमानित है।
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योजना एक नजर में
0 अंसल एपीआई को वर्ष 2005 में हाईटेक टाउनशिप विकसित करने का लाइसेंस मिला। उस समय 6465 एकड़ में योजना विकसित करने का डीपीआर पास हुआ। तीन फेज की योजना को वर्ष 2017 तक पूरा करना था।
0 योजना पूरी नहीं हुई। अंसल की ओर से समय बढ़ाने के लिए आवेदन किया गया जो चार साल तक शासन से पास नहीं हो पाया। इसके बाद समय बढ़ाने की अनुमति दी गई तो नवंबर 2021 में अंसल ने संशोधित डीपीआर पास करने के लिए जमा की। इसमें जमीन को कम किया गया।
0 एलडीए ने संशोधित डीपीआर छह अप्रैल 2023 को पास की और पांच साल का समय योजना विकसित करने के लिए दिया गया। यह अवधि पांच अप्रैल 2028 तक है। संशोधित लेआउट में टाउनशिप का क्षेत्रफल घटाकर 4690 किया गया और तीन के बजाय पांच फेज में योजना विकसित करने का खाका मंजूर हुआ।
0 आावंटियों को समय से मकान, प्लॉट न देने और रजिस्ट्री न करने पर रेरा में अंसल के खिलाफ 2268 शिकायतें दर्ज हुईं। टाउनशिप में 18,858 मकान, प्लॉट बनाए जाने हैं।
आवंटियों के हितों की होगी रक्षा : वीसी
एलडीए उपाध्यक्ष प्रथमेश कुमार ने बताया कि जिन खरीदारों के पक्ष में रजिस्ट्री की जा चुकी है या जो आवंटी वैध हैं उन्हें नियमानुसार भूखंड या भवन दिलाया जाएगा। मेसर्स अंसल ने एलडीए में गारंटी के तौर पर 3489 भूखंड बंधक रखे थे। इसका उद्देश्य था कि अगर अंसल विकास नहीं कराएगा तो प्राधिकरण इन जमीनों को बेचकर टाउनशिप विकसित करेगा। हालांकि, अंसल ने इनमें से 2747 भूखंड बेच दिए। जांच में अनियमितता सामने आने पर एलडीए के जरिये मेसर्स अंसल के खिलाफ एफआईआर भी दर्ज कराई गई।
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बीते साल फरवरी में एनसीएलटी ने अंसल कंपनी को दिवालिया घोषित किया था। ऐसा करने से पहले न तो आवंटियों और निवेशकों और न अंसल को कॉलोनी विकसित करने का लाइसेंस देने वाली संस्था एलडीए का पक्ष जाना गया। अंसल को दिवालिया घोषित किए जाने पर आवंटी अपीलीय कोर्ट में गए थे। करीब 10 महीने तक चली सुनवाई के बाद जुलाई में आदेश हुआ कि इनका पक्ष सुना जाए। इसके बाद आवंटियों ने एनसीएलटी में अपील की। हालांकि, एलडीए की ओर से टाउनशिप को टेकओवर करने के संबंध में पहले कोई अपील नहीं की गई थी। हाईटेक टाउनशिप का लाइसेंस शासन की कमेटी मंजूरी करती है। इस कारण उसकी अनुमति का इंतजार था। अब शासन से प्रस्ताव पास होने के बाद एलडीए टाउनशिप टेकओवर करने के लिए एनसीएलटी में दावा पेश करेगा। आवंटी व निवेशक गगन टंडन ने बताया कि एनसीएलटी की कोर्ट में 23 सितंबर को सुनवाई होगी।
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शासन करेगा एलडीए को वित्तीय मदद
टाउनशिप पर संभावित देनदारी करीब 2,912 करोड़ रुपये है। वास्तविक देनदारी इंसॉल्वेंसी रिजॉल्यूशन प्रोफेशनल (आईआरपी) की प्रक्रिया से तय होगी। इसके भुगतान के लिए शासन एलडीए को सीड कैपिटल के रूप में आवश्यक रकम उपलब्ध कराएगा। विशेष सचिव आवास राजेश कुमार राय ने बताया कि परियोजना सरकारी अभिकरण से पूरा कराने से आवंटियों की समस्या का समाधान हो सकेगा।
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2216 करोड़ रुपये खर्च होंगे कार्यों पर
मेसर्स अंसल को सुशांत गोल्फ सिटी में 440 केवीए और 220 केवीए समेत अन्य सब स्टेशन बनवाने थे। हालांकि, एक भी सब स्टेशन नहीं बनाया गया। 50 किलोमीटर लंबे रोड नेटवर्क का काम भी अधूरा है। नलकूप, पानी की लाइन, सीवर लाइन, पार्क, ड्रेनेज सिस्टम के काम अधूरे हैं। टेकओवर करने के बाद एलडीए ये सभी काम पूरे कराएगा। अधूरी सुविधाओं पर 2216 करोड़ रुपये खर्च होंगे। पॉकेट-1 से चार तक सुविधाओं के विकास पर 453.10 करोड़ रुपये खर्च होंगे। पॉकेट-5 में विकास कार्यों पर 1,126.52 करोड़ रुपये खर्च होंगे। रेलवे ओवरब्रिज के बचे कामों पर 114.28 करोड़ रुपये खर्च होंगे। सब-स्टेशन के निर्माण पर 523 करोड़ का खर्च अनुमानित है।
योजना एक नजर में
0 अंसल एपीआई को वर्ष 2005 में हाईटेक टाउनशिप विकसित करने का लाइसेंस मिला। उस समय 6465 एकड़ में योजना विकसित करने का डीपीआर पास हुआ। तीन फेज की योजना को वर्ष 2017 तक पूरा करना था।
0 योजना पूरी नहीं हुई। अंसल की ओर से समय बढ़ाने के लिए आवेदन किया गया जो चार साल तक शासन से पास नहीं हो पाया। इसके बाद समय बढ़ाने की अनुमति दी गई तो नवंबर 2021 में अंसल ने संशोधित डीपीआर पास करने के लिए जमा की। इसमें जमीन को कम किया गया।
0 एलडीए ने संशोधित डीपीआर छह अप्रैल 2023 को पास की और पांच साल का समय योजना विकसित करने के लिए दिया गया। यह अवधि पांच अप्रैल 2028 तक है। संशोधित लेआउट में टाउनशिप का क्षेत्रफल घटाकर 4690 किया गया और तीन के बजाय पांच फेज में योजना विकसित करने का खाका मंजूर हुआ।
0 आावंटियों को समय से मकान, प्लॉट न देने और रजिस्ट्री न करने पर रेरा में अंसल के खिलाफ 2268 शिकायतें दर्ज हुईं। टाउनशिप में 18,858 मकान, प्लॉट बनाए जाने हैं।
आवंटियों के हितों की होगी रक्षा : वीसी
एलडीए उपाध्यक्ष प्रथमेश कुमार ने बताया कि जिन खरीदारों के पक्ष में रजिस्ट्री की जा चुकी है या जो आवंटी वैध हैं उन्हें नियमानुसार भूखंड या भवन दिलाया जाएगा। मेसर्स अंसल ने एलडीए में गारंटी के तौर पर 3489 भूखंड बंधक रखे थे। इसका उद्देश्य था कि अगर अंसल विकास नहीं कराएगा तो प्राधिकरण इन जमीनों को बेचकर टाउनशिप विकसित करेगा। हालांकि, अंसल ने इनमें से 2747 भूखंड बेच दिए। जांच में अनियमितता सामने आने पर एलडीए के जरिये मेसर्स अंसल के खिलाफ एफआईआर भी दर्ज कराई गई।