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29 से शुरू होगा यूपी विधानमंडल सत्र: शीतकालीन सत्र इस बार होगा छोटा, तीन दिन में होंगे सभी विधायी कार्य
Tue, 21 Nov 2023 07:17 PM IST
रोहित मिश्र
अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ
अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ
Published by: रोहित मिश्र
Updated Tue, 21 Nov 2023 07:17 PM IST
सार
विधानमंडल के दोनों सदनों की कार्यवाही अवधि को बढ़ाने को लेकर लखनऊ से मुंबई तक विचारों का दौर चला है। गत दिनों मुंबई में देश भर के विधायकों के सम्मेलन में भी देश के विभिन्न राज्यों के विधानसभा अध्यक्षों ने सदन की कार्यवाही बढ़ाने का समर्थन किया था।
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यूपी विधानसभा
- फोटो : amar ujala
विस्तार
विधानसभा की कार्यवाही का समय बढ़ाने को लेकर तमाम विचार-विमश बातों के बाद भी विधानमंडल का आगामी शीतकालीन सत्र महज चार दिन ही संचालित करने की तैयारी है। इसमें भी सदन में विधायी कार्य तीन दिन ही होंगे। विधानमंडल का शीतकालीन सत्र 28 नवंबर से शुरू होगा। पहले दिन भाजपा विधायक स्वर्गीय आशुतोष टंडन गोपाल के निधन के चलते सदन की कार्यवाही शोक प्रस्ताव के बाद स्थगित हो जाएगी। कार्यमंत्रणा समिति के एक सदस्य ने बताया कि 29-30 नवंबर और 1 दिसंबर तक सदन संचालित करने की योजना है। इसमें एक दिन अनुपूरक बजट पेश किया जाएगा। एक दिन नेता प्रतिपक्ष अनुपूरक बजट के खिलाफ अपनी बात रखेंगे। उसके बाद नेता सदन एवं मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ सदन को संबोधित करेंगे। इस प्रकार सदन की कार्यवाही महज तीन दिन ही चलेगी।
सदन की कार्यवाही बढ़ाना केवल बातों तक सीमित
विधानमंडल के दोनों सदनों की कार्यवाही अवधि को बढ़ाने को लेकर लखनऊ से मुंबई तक विचारों का दौर चला है। गत दिनों मुंबई में देश भर के विधायकों के सम्मेलन में भी देश के विभिन्न राज्यों के विधानसभा अध्यक्षों ने सदन की कार्यवाही बढ़ाने का समर्थन किया था। विधानसभा में भी सदन के अंदर और बाहर इसको लेकर चर्चा होती है। लेकिन सदन संचालन का समय आने पर चर्चा केवल बातों तक सीमित साबित होती है। इस वर्ष विधानसभा का पहला सत्र 22 फरवरी से एक मार्च तक 8 दिन संचालित हुआ। दूसरा सत्र 7 से 11 अगस्त तक पांच दिन संचालित हुआ था। तीसरा सत्र 28 नवंबर से एक दिसंबर तक संचालित होगा। यदि विधानसभा के आगामी सत्र के बाद और कोई विशेष सत्र आहूत नहीं हुआ तो इस वर्ष सदन की कार्यवाही महज 17 दिन चलेगी। जबकि निमयावली में यथासंभव 90 दिन तक सदन की कार्यवाही संचालित करने का प्रावधान है।
सदन में सार्थक बहस नहीं करना चाहती सरकार
सपा विधायक दल के मुख्य सचेतक मनोज पांडेय का कहना है कि शीतकालीन सत्र में सरकार अनुपूरक बजट के साथ कुछ विधेयक भी पेश करेगी। उनका कहना है कि जब अनुपूरक बजट पर विभागवार चर्चा नहीं होगी तो सदन की कार्यवाही का औचित्य नहीं है। सरकार सदन में सार्थक चर्चा नहीं करना चाहती है। उन्होंने कहा कि सदन की कार्यवाही को कम से कम दस दिन चलनी चाहिए।
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जितना काम होगा उतना सदन चलेगा
भाजपा विधायक दल के मुख्य सचेतक राम नरेश अग्निहोत्री ने कहा कि जितना काम होता है उतने दिन सदन संचालित किया जाता है। शीतकालीन सत्र को लेकर ज्यादा काम नहीं है इसलिए सदन कम दिन संचालित होगा।
पहली बार नई नियमावली से संचालित होगी विधानसभा
विधानसभा की नई संचालन नियमावली मानसून सत्र में मंजूर की गई थी। शीतकालीन सत्र नई नियमावली के अनुसार संचालित होगा। इसमें विधायक घर बैठकर भी ऑनलाइन सदन की कार्यवाही में शामिल हो सकेंगे। वहीं विपक्षी दलों के विधायक सदन में झंडे, बैनर लेकर नहीं आ सकेंगे। सदन के अंदर मोबाइल के साथ प्रवेश भी वर्जित होगा। अध्यक्ष के आसन के पास भी नहीं आ सकेंगे। सदन में किसी मामले में अधिकारी का नाम लेकर भी आरोप प्रत्यारोप नहीं कर सकेंगे।
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सदन की कार्यवाही बढ़ाना केवल बातों तक सीमित
विधानमंडल के दोनों सदनों की कार्यवाही अवधि को बढ़ाने को लेकर लखनऊ से मुंबई तक विचारों का दौर चला है। गत दिनों मुंबई में देश भर के विधायकों के सम्मेलन में भी देश के विभिन्न राज्यों के विधानसभा अध्यक्षों ने सदन की कार्यवाही बढ़ाने का समर्थन किया था। विधानसभा में भी सदन के अंदर और बाहर इसको लेकर चर्चा होती है। लेकिन सदन संचालन का समय आने पर चर्चा केवल बातों तक सीमित साबित होती है। इस वर्ष विधानसभा का पहला सत्र 22 फरवरी से एक मार्च तक 8 दिन संचालित हुआ। दूसरा सत्र 7 से 11 अगस्त तक पांच दिन संचालित हुआ था। तीसरा सत्र 28 नवंबर से एक दिसंबर तक संचालित होगा। यदि विधानसभा के आगामी सत्र के बाद और कोई विशेष सत्र आहूत नहीं हुआ तो इस वर्ष सदन की कार्यवाही महज 17 दिन चलेगी। जबकि निमयावली में यथासंभव 90 दिन तक सदन की कार्यवाही संचालित करने का प्रावधान है।
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सदन में सार्थक बहस नहीं करना चाहती सरकार
सपा विधायक दल के मुख्य सचेतक मनोज पांडेय का कहना है कि शीतकालीन सत्र में सरकार अनुपूरक बजट के साथ कुछ विधेयक भी पेश करेगी। उनका कहना है कि जब अनुपूरक बजट पर विभागवार चर्चा नहीं होगी तो सदन की कार्यवाही का औचित्य नहीं है। सरकार सदन में सार्थक चर्चा नहीं करना चाहती है। उन्होंने कहा कि सदन की कार्यवाही को कम से कम दस दिन चलनी चाहिए।
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जितना काम होगा उतना सदन चलेगा
भाजपा विधायक दल के मुख्य सचेतक राम नरेश अग्निहोत्री ने कहा कि जितना काम होता है उतने दिन सदन संचालित किया जाता है। शीतकालीन सत्र को लेकर ज्यादा काम नहीं है इसलिए सदन कम दिन संचालित होगा।
पहली बार नई नियमावली से संचालित होगी विधानसभा
विधानसभा की नई संचालन नियमावली मानसून सत्र में मंजूर की गई थी। शीतकालीन सत्र नई नियमावली के अनुसार संचालित होगा। इसमें विधायक घर बैठकर भी ऑनलाइन सदन की कार्यवाही में शामिल हो सकेंगे। वहीं विपक्षी दलों के विधायक सदन में झंडे, बैनर लेकर नहीं आ सकेंगे। सदन के अंदर मोबाइल के साथ प्रवेश भी वर्जित होगा। अध्यक्ष के आसन के पास भी नहीं आ सकेंगे। सदन में किसी मामले में अधिकारी का नाम लेकर भी आरोप प्रत्यारोप नहीं कर सकेंगे।