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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Lucknow News ›   UP: Hookah service cannot be provided under the guise of a restaurant, minors can use it.

UP: "रेस्तरां की आड़ में नहीं दे सकते हुक्का सर्विस, अनुमति दी तो नाबालिग भी कर सकते हैं दुरुपयोग"

Tue, 29 Sep 2026 10:09 PM IST
रोहित मिश्र अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ
अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ Published by: रोहित मिश्र Updated Tue, 29 Sep 2026 10:09 PM IST
सार

Hookah bars in UP: इस मामले में अदालत ने कहा कि निर्धारित धूम्रपान क्षेत्र सार्वजनिक जगहों पर धूम्रपान के निषेध का केवल एक सीमित अपवाद है। इसे हुक्का बार के लिए लागू नहीं कर सकते। 

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UP: Hookah service cannot be provided under the guise of a restaurant, minors can use it.
यूपी में बैन हुए हुक्का बार। - फोटो : अमर उजाला।

विस्तार

इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने मंगलवार को अहम फैसले में उत्तर प्रदेश में हुक्का बार चलाने पर रोक लगा दी है। लखनऊ पुलिस की बिना लाइसेंस वाले हुक्का बार पर कार्रवाई को फैशन टीवी कैफे समेत 80 संचालकों ने याचिकाएं दायर कर चुनौती दी थी। जस्टिस शेखर बी सराफ और जस्टिस अबधेश कुमार चौधरी की खंडपीठ ने यह फैसला इन याचिकाओं को खारिज करके दिया। कोर्ट ने रेस्तरां की आड़ में बने स्मोकिंग एरिया में हुक्का परोसने पर भी पाबंदी लगाई है।

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कोर्ट ने सभी 80 याचिकाओं पर सुनवाई के बाद उनकी दलीलें खारिज कर दीं और पुलिस की कार्रवाई की शक्तियां बरकरार रखीं हैं।फैसले में कोर्ट ने कहा कि उत्तर प्रदेश में होटल, रेस्तरां, कैफे और अन्य सार्वजनिक जगहों पर निर्धारित धूम्रपान क्षेत्र में भी ग्राहकों को हुक्का की पेशकश नहीं की जा सकती है। पीठ ने कहा कि यह गतिविधि सिगरेट और अन्य तंबाकू उत्पाद अधिनियम, 2003 (कोटपा) और सार्वजनिक स्थानों पर धूम्रपान निषेध नियम, 2008 के तहत प्रतिबंधित है। पीठ ने हुक्का बार के लाइसेंस जारी किए जाने पर भी रोक का निर्देश दिया है।
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मामला लखनऊ पुलिस की उस कार्रवाई से जुड़ा है, जो बिना लाइसेंस चल रहे हुक्का बार के खिलाफ की गई थी। इस कार्रवाई के खिलाफ लखनऊ के विभूति खंड स्थित फैशन टीवी कैफे समेत कुल 80 हुक्का बार संचालकों ने इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच में याचिका दाखिल की थी। याचिकाकर्ताओं ने वैध खाद्य प्रतिष्ठान लाइसेंस वाले रेस्तरां को निर्धारित धूम्रपान क्षेत्र में हुक्का की पेशकश करने की अनुमति देने और अपने कारोबार में पुलिस का हस्तक्षेप रोकने का अनुरोध किया था।
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सुनवाई के दौरान संचालकों ने कई दलीलें रखीं। एक दलील थी कि रेस्तरां में हुक्का उपलब्ध कराया जा रहा है। कोर्ट ने यह दलील नहीं मानी और साफ किया कि रेस्तरां की आड़ में निर्धारित स्मोकिंग एरिया में भी हुक्का सर्विस नहीं दी जा सकती। संचालकों ने सेल्फ सर्विस के नाम पर भी हुक्का देने की बात रखी। कोर्ट ने इसकी अनुमति भी नहीं दी। तीसरी दलील यह थी कि हुक्का ग्राहकों को किराये पर दिया जाता है। इसे भी कोर्ट ने नहीं माना। 

कोर्ट ने उदाहरण देते हुए कहा कि अगर कार किसी नाबालिग के हाथ में दे दी जाए, तो देने वाले का इस पर कोई नियंत्रण नहीं रहता कि वह कार कैसे चलाएगा, ठीक वैसे ही किराये पर हुक्का पीने वाले पर नियंत्रण कैसे संभव है। कोर्ट ने यह भी कहा कि जो व्यक्ति धूम्रपान नहीं करता, उसे स्वच्छ हवा के अधिकार से वंचित नहीं किया जा सकता। इस फैसले के बाद प्रदेश में हुक्का बार नहीं चल सकेंगे।आदेश में एक और अहम बात है कि तंबाकू संबंधी कानून कोटपा के तहत पुलिस की कार्रवाई की शक्तियां पहले की तरह बरकरार हैं। कोर्ट ने सभी याचिकाएं खारिज करते हुए अपने फैसले की कॉपी अनुपालन के लिए उत्तर प्रदेश के मुख्य सचिव और पुलिस महानिदेशक को भेजने का निर्देश दिया।

सेवा की अनुमति नहीं

अदालत ने कहा कि निर्धारित धूम्रपान क्षेत्र सार्वजनिक जगहों पर धूम्रपान के निषेध का केवल एक सीमित अपवाद है। वहां किसी भी सेवा की अनुमति नहीं है। उसने कहा कि नियमों में 2017 के संशोधन के बाद 'कोई अन्य सेवा' की जगह 'कोई सेवा' प्रावधान कर दिया गया है, जिससे स्पष्ट है कि हुक्का तैयार करना, उसमें तंबाकू भरना, अंगारा रखना, ग्राहक तक पहुंचाना या अंगारा बदलना सब सेवा प्रदान करने के दायरे में आएगा।

याचिकाकर्ताओं ने दलील दी थी अगर ग्राहक को तैयार हुक्का उपलब्ध कराया जाए और वह खुद उसका इस्तेमाल करे, तो इसे सेवा नहीं, बल्कि उपकरण किराए पर देना माना जाए। पीठ ने यह दलील खारिज करते हुए कहा कि हुक्का तैयार करने और उपलब्ध कराने में सेवा का तत्व अंतर्निहित है। केवल इस तथ्य से कि ग्राहक खुद हुक्का चला रहा है, गतिविधि का कानूनी स्वरूप नहीं बदलता।

नहीं जारी हो सकता हुक्का बार का लाइसेंस

अदालत ने स्पष्ट किया कि खाद्य सुरक्षा विभाग और नगर निकाय अधिकारियों को हुक्का बार संचालन के लिए अलग से लाइसेंस जारी करने का अधिकार नहीं है। कोर्ट ने कहा कि पुलिस अधिकारियों को कोटपा के तहत तलाशी, जब्ती और दंडात्मक कार्रवाई का अधिकार है, ताकि वैधानिक प्रतिबंधों का पालन सुनिश्चित हो सके। पीठ ने कहा कि सार्वजनिक जगहों पर धूम्रपान न करने वालों का स्वच्छ हवा में सांस लेने का मौलिक अधिकार निषिद्ध धूम्रपान गतिविधियों वाले कारोबार के अधिकार पर भारी पड़ता है। हाई कोर्ट ने कहा कि हुक्का बार संचालित करना और रेस्तरां में हुक्का की पेशकश करना लागू वैधानिक प्रावधानों का स्पष्ट उल्लंघन है।

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