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UP: प्रशासक बनते ही ग्राम प्रधानों का मानदेय रुका, संगठन ने पंचायती राज विभाग को लिखा पत्र; आंदोलन की चेतावनी

Mon, 27 Jul 2026 07:43 PM IST
Akash Dwivedi अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ
अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ Published by: Akash Dwivedi Updated Mon, 27 Jul 2026 07:43 PM IST
सार

प्रदेश में पंचायत चुनाव टलने के बाद प्रशासक बने निवर्तमान ग्राम प्रधानों का मासिक मानदेय बंद हो गया है। कल्याण कोष से मिलने वाली 10 लाख रुपये की सहायता पर भी अनिश्चितता है। संगठन ने सुविधाएं बहाल करने की मांग की है और जल्द निर्णय न होने पर आंदोलन की चेतावनी दी है।

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UP: Honorarium of Gram Pradhans halted upon appointment of administrators; association writes to Panchayati Ra
ग्राम प्रधान (AI) - फोटो : Grok AI

विस्तार

त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव समय पर न होने के कारण प्रशासक बनाए गए प्रदेश के 57,694 निवर्तमान ग्राम प्रधानों का पांच हजार रुपये मासिक मानदेय बंद हो गया है। इतना ही नहीं, असामयिक निधन होने पर कल्याण कोष से मिलने वाली 10 लाख रुपये की आर्थिक सहायता पर भी फिलहाल संकट खड़ा हो गया है। इसे लेकर ग्राम प्रधानों में नाराजगी है। राष्ट्रीय पंचायती राज ग्राम प्रधान संगठन ने पंचायती राज विभाग को पत्र भेजकर दोनों सुविधाएं तत्काल बहाल करने की मांग की है।

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संगठन के प्रदेश अध्यक्ष ललित शर्मा ने बताया कि 26 मई से निवर्तमान ग्राम प्रधान प्रशासक के रूप में कार्य कर रहे हैं। इसके बावजूद पंचायती राज विभाग की ओर से अभी तक मानदेय और कल्याण कोष से मिलने वाली सहायता के संबंध में कोई स्पष्ट आदेश जारी नहीं किए गए हैं। 
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उनका कहना है कि पंचायत चुनाव समय पर न होना ग्राम प्रधानों की गलती नहीं है। ऐसे में जब उनसे प्रशासक के रूप में काम लिया जा रहा है तो उन्हें पहले की तरह मानदेय और अन्य सुविधाएं भी मिलनी चाहिए।

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आंदोलन की चेतावनी

ललित ने बताया कि पंचायती राज विभाग के निदेशक अमित सिंह को इस संबंध में पत्र भेजकर मांग की गई है कि त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव होने तक प्रशासक के रूप में कार्यरत सभी ग्राम प्रधानों को पांच हजार रुपये मासिक मानदेय दिया जाए।कल्याण कोष से 10 लाख रुपये की आर्थिक सहायता भी मिलती रहे।



ललित शर्मा ने चेतावनी दी कि यदि मांगों पर जल्द निर्णय नहीं लिया गया तो अगस्त के पहले सप्ताह में ग्राम प्रधान आंदोलन का रास्ता अपनाएंगे। विभाग के निदेशक अमित सिंह का कहना है कि इस संबंध में शासन से अभी तक कोई अलग दिशा-निर्देश प्राप्त नहीं हुए हैं।

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