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UP: लखनऊ में पकड़े गए आतंकियों के निशाने पर था हिंदू रक्षा दल कार्यालय और दिल्ली-6 मॉल, खुलासा
Fri, 17 Apr 2026 02:44 PM IST
Ishwar Ashish Bhartiya
सूरज शुक्ला, अमर उजाला, लखनऊ
सूरज शुक्ला, अमर उजाला, लखनऊ
Published by: Ishwar Ashish Bhartiya
Updated Fri, 17 Apr 2026 02:44 PM IST
सार
आरोपियों के पास से 24 पर्चे भी बरामद हुए, जिनमें एक तरफ हिंदी व दूसरी तरफ उर्दू में लिखा था कि हम एलान करते हैं कि हम अपने मकसद से पीछे हटने वाले नहीं हैं और अपने रास्ते पर चलते रहेंगे। यह केवल एक शुरुआत है, आगे और भी कदम उठाए जाएंगे।
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- फोटो : Adobe Stock
विस्तार
पाकिस्तान हैंडलर्स के इशारे पर देश में बड़ी आतंकी वारदात की साजिश रचने वाले चार संदिग्ध आतंकियों के मोबाइल से चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं। जांच में पता चला है कि आरोपियों ने गाजियाबाद के साहिबाबाद स्थित हिंदू रक्षा दल के कार्यालय और राजनगर एक्सटेंशन के दिल्ली-6 मॉल को विस्फोट व आगजनी के लिए टारगेट बनाया था। दोनों स्थानों की रेकी कर वीडियो और फोटो पाकिस्तानी हैंडलर्स को भेजे थे।
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एटीएस ने 2 अप्रैल को लखनऊ से मेरठ निवासी साकिब, अरबाब, लोकेश और विकास को गिरफ्तार किया था। जांच एजेंसी के अनुसार आरोपी पाकिस्तानी हैंडलर्स के संपर्क में रहकर देशविरोधी गतिविधियों की साजिश रच रहे थे। मोबाइल से व्हाट्सएप चैट, ऑडियो रिकॉर्डिंग और लोकेशन शेयरिंग के साक्ष्य मिले हैं। जिनसे पता चला कि जब आरोपियों ने इन दोनों स्थानों के वीडियो, फोटो आदि पाकिस्तानी हैंडलर्स को भेजे थे, तब उनकों इसके एवज में 13 हजार रुपये मिले थे। यह रकम विकास द्वारा दिए गए क्यूआर कोड पर ट्रांसफर की गई। सूत्रों के मुताबिक विकास ने अपने जीजा के खाते में यह रकम मंगवाई थी।
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अलीगढ़ का कार शोरूम था निशाने पर
जांच में यह भी खुलासा हुआ है कि आरोपियों ने अलीगढ़ के एक कार शोरूम की रेकी की थी, जहां आगजनी की योजना थी। इसके अलावा गाजियाबाद में सड़क किनारे खड़े ट्रकों के वीडियो भी पाकिस्तानी हैंडलर्स को भेजे गए थे। आरोपियों के पास से 24 पर्चे भी बरामद हुए, जिनमें एक तरफ हिंदी व दूसरी तरफ उर्दू में लिखा था कि... हम ऐलान करते हैं कि हम अपने मकसद से पीछे हटने वाले नहीं हैं और अपने रास्ते पर चलते रहेंगे। यह केवल एक शुरुआत है, आगे और भी कदम उठाए जाएंगे। वारदात के बाद ये पर्चे घटनास्थल पर छोड़ना था। एजेंसियों के अनुसार आरोपी व्हाट्सएप पर मुस्लिम आर्मी ग्रुप से जुड़े थे, जिसमें पाकिस्तानी हैंडलर्स भी थे। जांच एजेंसी के पास ये सभी साक्ष्य मौजूद हैं।