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यूपी : ग्राम पंचायतों में प्रशासकों की नियुक्ति को चुनौती मामले की सुनवाई 17 फरवरी को
Mon, 25 Jan 2021 07:08 PM IST
ishwar ashish
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
Published by: ishwar ashish
Updated Mon, 25 Jan 2021 07:08 PM IST
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- फोटो : अमर उजाला
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हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने प्रदेश में ग्राम पंचायतों में प्रशासकों की तैनाती की वैधता को चुनौती देने वाली जनहित याचिका पर राज्य सरकार की तरफ से महाधिवक्ता राघवेंद्र सिंह ने सोमवार को सरकार का पक्ष पेश किया। उधर, याची संगठन के वकील सीबी पांडेय पेश हुए। कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई 17 फरवरी को नियत की है।
न्यायमूर्ति ऋतुराज अवस्थी और न्यायमूर्ति मनीष माथुर की खंडपीठ ने यह आदेश पंचायत राज ग्राम प्रधान संगठन की पीआईएल पर दिया। इसमें प्रदेश की ग्राम पंचायतों में प्रधानो का कार्यकाल खत्म होने के बाद इनमें प्रशासकों की तैनाती किए जाने की करवाई को कानूनी मंशा के खिलाफ बताते हुए इसे संवैधानिक प्रावधान का उल्लंघन कहा गया है।
याचिका में कहा गया कि वर्ष 2000 में एक अध्यादेश के बाद राज्य सरकार ने यूपी पंचायत राज अधिनियम बनाया जिसकी धारा 12(3) (ए) के तहत कार्यकाल खत्म होने पर सरकार पंचायतों में प्रशासन समिति या प्रशासक नियुक्त कर सकती है। जबकि इस अध्यादेश को हाईकोर्ट की खंडपीठ ने असंवैधानिक करार देकर रद्द कर दिया था। ऐसे में मूल अध्यादेश के निरस्त होने पर उसके बाद बने कानून के तहत राज्य सरकार प्रशासकों की नियुक्ति नहीं कर सकती है। याचिका में यह कहते हुए अधिनियम की धारा 12(3) (ए) को चुनौती दी गई है, क्योंकि संविधान के अनुच्छेद 243 (ई) के तहत पंचायतों का कार्यकाल 5 साल से आगे नहीं बढ़ाया जा सकता है।
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न्यायमूर्ति ऋतुराज अवस्थी और न्यायमूर्ति मनीष माथुर की खंडपीठ ने यह आदेश पंचायत राज ग्राम प्रधान संगठन की पीआईएल पर दिया। इसमें प्रदेश की ग्राम पंचायतों में प्रधानो का कार्यकाल खत्म होने के बाद इनमें प्रशासकों की तैनाती किए जाने की करवाई को कानूनी मंशा के खिलाफ बताते हुए इसे संवैधानिक प्रावधान का उल्लंघन कहा गया है।
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याचिका में कहा गया कि वर्ष 2000 में एक अध्यादेश के बाद राज्य सरकार ने यूपी पंचायत राज अधिनियम बनाया जिसकी धारा 12(3) (ए) के तहत कार्यकाल खत्म होने पर सरकार पंचायतों में प्रशासन समिति या प्रशासक नियुक्त कर सकती है। जबकि इस अध्यादेश को हाईकोर्ट की खंडपीठ ने असंवैधानिक करार देकर रद्द कर दिया था। ऐसे में मूल अध्यादेश के निरस्त होने पर उसके बाद बने कानून के तहत राज्य सरकार प्रशासकों की नियुक्ति नहीं कर सकती है। याचिका में यह कहते हुए अधिनियम की धारा 12(3) (ए) को चुनौती दी गई है, क्योंकि संविधान के अनुच्छेद 243 (ई) के तहत पंचायतों का कार्यकाल 5 साल से आगे नहीं बढ़ाया जा सकता है।
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