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UP: आउटसोर्स कर्मियों के मानदेय पर लिया जा रहा जीएसटी, 18 फीसदी ले रहीं फर्में, बड़े घपले की आशंका

Wed, 24 Sep 2025 12:11 PM IST
ishwar ashish अजित बिसारिया, अमर उजाला, लखनऊ
अजित बिसारिया, अमर उजाला, लखनऊ Published by: ishwar ashish Updated Wed, 24 Sep 2025 12:11 PM IST
सार

प्रदेश में करीब चार लाख से ज्यादा आउटसोर्स कर्मचारी हैं। बिना नियम विभागों और निगमों से 18 फीसदी जीएसटी की राशि फर्में ले रही हैं। प्रदेश में हर साल लाखों कर्मियों के मानदेय पर 400 करोड़ खर्च होते हैं।

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UP: GST being levied on honorarium of outsourced workers.
- फोटो : Istock

विस्तार

उत्तर प्रदेश में सेवा प्रदाता फर्मे आउटसोर्स कर्मियों के मानदेय पर 18% की दर से वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) चार्ज विभाग से ले रही हैं। नियमानुसार मानदेय जीएसटी से मुक्त है। प्रदेश में करीब चार लाख से ज्यादा आउटसोर्स कर्मचारी हैं। शासन के अधिकारी मानते हैं कि अगर मामले की जांच हो जाए तो बड़ा घपला सामने आने की आशंका से इन्कार नहीं किया जा सकता।

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शुरुआती जांच में यह मामला पीडब्ल्यूडी में पकड़ में आया है लेकिन जानकार बताते हैं कि अधिकतर विभागों और निगमों में यही स्थिति है। सेवा प्रदाता फर्म की ओर से जारी टैक्स इन्वायस (प्रपत्रों) से यह गड़बड़ी पकड़ में आई है। आउटसोर्स कर्मचारियों के मासिक पारिश्रमिक की राशि पर 18% की दर से जीएसटी विभागों से लिया जा रहा है। साथ ही आउटसोर्स कर्मचारियों के ईपीएफ और ईएसआईसी के अंशदान पर भी 18% की दर से जीएसटी सेवा प्रदाता फर्म ले रही हैं।
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यह है नियम : जीएसटी काउंसिलिंग के 18 जून 2017 के नोटिफिकेशन में स्पष्ट उल्लेख है कि ईपीएफ और ईएसआईसी पर कर देयता शून्य है।

रिफंड या समायोजन कराकर घपला कर सकती हैं फर्में
सूत्र बताते हैं कि हर वर्ष आउटसोर्सिंग सेवा प्रदाता फर्म को जीएसटी के मद में कितनी राशि का भुगतान किया गया। धनराशि सेवा प्रदाता फर्म ने सरकारी खजाने में जमा कराई या नहीं, इसकी जांच होनी चाहिए।

- यह भी जांच होनी चाहिए कि फर्म ने बाद में राज्य कर विभाग से इस राशि का रिफंड (वापसी) या कहीं और अपनी देयता के सापेक्ष समायोजन तो नहीं कराया। इस बारे में राज्य कर विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी का कहना है कि मामले की जांच कराई जाएगी।

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