यूपी में दहेज प्रथा रोकने की नायाब पहल!
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राज्य सरकार ने दहेज के खिलाफ एक अच्छी पहल की है। अब नवनियुक्त सरकारी एवं अर्द्ध्र सरकारी विभागों के अफसरों व कर्मचारियों को शपथपत्र देना होगा कि वे न तो दहेज लेंगे और न देंगे।
शपथपत्र देना अनिवार्य होगा। विभागों के मुखिया यह शपथपत्र महिला कल्याण निदेशालय को भेजेंगे। दहेज लेने-देने की शिकायत मिलने पर कार्रवाई भी की जाएगी। निदेशक महिला कल्याण डीएन वर्मा ने सभी विभागों को इस संबंध में आदेश भेजे हैं।
राज्य में उत्तर प्रदेश दहेज प्रतिषेध नियमावली लागू है। इसके तहत न तो कई व्यक्ति दहेज ले सकता है और न ही दे सकता है। इसके बाद भी इस पर रोक नहीं लग पा रही है।
महिला कल्याण निदेशक ने इसी अधिनियम के तहत सभी विभागाध्यक्षों, मंडलायुक्तों, जिलाधिकारियों तथा सभी वरिष्ठ पुलिस अधीक्षकों व पुलिस अधीक्षकों को आदेश की प्रति भेजकर नवनियुक्त अधिकारियों और कर्मचारियों से अनिवार्य रूप से शपथ पत्र लिए जाने को कहा है।
विभागीय मुखिया को लेनी होगी जिम्मेदारी
यही नहीं विभागीय मुखिया की जिम्मेदारी होगी कि वह हर हाल में शपथपत्र ले और उसे महिला कल्याण निदेशालय भेजे। महिला कल्याण निदेशालय इसे संभाल कर रखेगा, ताकि भविष्य में दहेज संबंधी किसी तरह की शिकायत पर दोषी अधिकारियों व कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई की जा सके। गौरतलब है कि आए दिन दहेज प्रताड़ना की शिकायतें सामने आती रहते हैं।
इस पर निदेशक महिला कल्याण डीएन वर्मा का कहना है कि दहेज प्रतिषेध अधिनियम के तहत यह आदेश प्रदेश भर के सभी विभागों को भेजा गया है। विभागवार मिलने वाले शपथ पत्र को संभल कर रखा जाएगा।
इसके बाद किसी भी तरह की शिकायत पर संबंधित अधिकारी और कर्मचारी के खिलाफ कार्रवाई के लिए विभागाध्यक्षों को लिखा जाएगा। शिकायत सही मिलने पर संबंधित को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया जाएगा। इसके बाद उसके खिलाफ विधिक कार्रवाई होगी।