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यूपी सरकार 1,63,907 करोड़ में पांच महीने का खर्चा चलाएगी

Thu, 22 Dec 2016 06:45 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ Updated Thu, 22 Dec 2016 06:45 PM IST
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UP govt expenses in last five months.
यूपी विधानमंडल में आज बजट पेश किया गया

मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने चुनाव से पहले बुधवार को विधानसभा में वित्त वर्ष 2017-18 का अंतरिम बजट और पांच महीने का लेखानुदान पेश किया। इससे सरकार को अगले वित्त वर्ष के पांच महीने के कामकाज के लिए जरूरी पैसे का बंदोबस्त हो सकेगा।

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मुख्यमंत्री ने 2017-18 का अंतरिम बजट 3,63,744.95 करोड़ रुपये का पेश किया है। इससे पांच महीने, अप्रैल से अगस्त 2017 तक के आवश्यक खर्च के लिए लेखानुदान के जरिए 1,63,907.52 करोड़ रुपये की व्यवस्था का प्रस्ताव किया है।
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विधानमंडल से अंतरिम बजट व लेखानुदान को मंजूरी मिलने के बाद सरकार कर्मचारियों के वेतन-भत्ते, पेंशन व चालू योजनाओं व परियोजनाओं का काम जारी रख सकेगी।

अंतरिम बजट में किसी नई योजना का एलान नहीं किया गया है। चुनाव के बाद नई सरकार जब तक आम बजट लाएगी, तब तक लेखानुदान से प्राप्त रकम से ही काम होगा।

राजकोषीय घाटा तीन फीसदी तक ही ठीक

UP govt expenses in last five months.

अंतरिम बजट में  2017-18 में 41,472.82 करोड़ रुपये के राजकोषीय घाटे का अनुमान लगाया गया है। यह सकल राज्य घरेलू उत्पाद का 2.97 फीसदी है।

हालांकि इसकी और वास्तविक तस्वीर आम बजट में नजर आएगी, जब वित्त वर्ष पूरा होने के बाद अनुमान सामने आएंगे।

इसका महत्व इसलिए भी बढ़ गया है क्योंकि जानकारों का कहना है कि राजकोषीय घाटा यदि सकल राज्य घरेलू उत्पाद (जीएसडीपी) के 3 फीसदी की सीमा में रहता है तो अर्थव्यवस्था की सेहत ठीक माना जाती है। इस सीमा से ऊपर घाटा जाना, अर्थव्यवस्था के  लिए ठीक नहीं माना जाता।

अंतरिम बजट में नोटबंदी के असर का अनुमान नहीं
प्रदेश के अंतरिम बजट पर लोगों की इसलिए भी नजर थी, क्योंकि यह केंद्र सरकार के नोटबंदी के एलान के बाद आ रहा था। पर, वित्त विभाग ने अंतरिम बजट तैयार करने में अक्तूबर तक के आंकड़ों को शामिल किया है। नोटबंदी का एलान आठ नवंबर को किया गया था।

बजट में प्लान-नॉन प्लान का वर्गीकरण खत्म

UP govt expenses in last five months.

सरकार ने 2017-18 से अपने बजट में प्लान व नॉन प्लान का वर्गीकरण खत्म कर दिया है।

केंद्र सरकार ने नॉन प्लान को अनावश्यक खर्च के रूप में देखते हुए इसके वर्गीकरण की व्यवस्था समाप्त करने की घोषणा की थी। प्रदेश सरकार ने इस निर्णय पर अमल करते हुए अंतरिम बजट से ही नई व्यवस्था लागू कर दी है।

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