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राज्यपाल ने मथुरा व कैराना मुद्दे पर राष्ट्रपति को भेजी रिपोर्ट, यूपी सरकार पर उठाए सवाल

Mon, 11 Jul 2016 11:08 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ Updated Mon, 11 Jul 2016 11:08 AM IST
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UP governor send report to President on kaira and mathura violence.
राज्यपाल राम नाईक व अखिलेश यादव - फोटो : amar ujala

प्रदेश की राजनीति में हलचल मचाने वाले मथुरा, कैराना और दादरी मुद्दे पर राज्यपाल राम नाईक ने राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी को ‘विशेष रिपोर्ट’ भेज दी है। माना जा रहा है कि राज्यपाल ने इन मामलों में प्रदेश सरकार को कानून-व्यवस्था, खुफिया तंत्र की नाकामी और एकतरफा कार्रवाई को लेकर कटघरे में खड़ा किया है। 

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राज्यपाल ने ‘विशेष रिपोर्ट’ की प्रति प्रधानमंत्री, उपराष्ट्रपति और केंद्रीय गृहमंत्री को भी भेजी है। राज्यपाल ने रिपोर्ट को अति गोपनीय बताते हुए कहा कि इसके कंटेट के बारे में कोई जानकारी नहीं दी जा सकती। अब इन मामलों पर एक बार फिर यूपी की राजनीति गरमा सकती है।
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राज्यपाल ने मथुरा, कैराना और दादरी पर प्रदेश सरकार से रिपोर्ट मांगी थी, जो उन्हें 29 जून को ही मिल गई थी। राज्यपाल को कई राजनीतिक दलों, सामाजिक संगठनों ने ज्ञापन और कई प्रतिनिधिमंडलों ने भी इन मामलों पर रिपोर्ट दी थी। 
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सभी तथ्यों का विश्लेषण करने के बाद राज्यपाल ने नौ जुलाई को राष्ट्रपति को रिपोर्ट भेज दी। वैसे तो राज्यपाल हर माह राष्ट्रपति को रूटीन में रिपोर्ट भेजते हैं, लेकिन इन तीनों मामलों को लेकर ‘विशेष रिपोर्ट’ भेजे जाने को काफी अहम माना जा रहा है।

जवाहर बाग में पहले कब्जा हट जाता तो न जाती इतनी जानें

UP governor send report to President on kaira and mathura violence.

जवाहर बाग की सरकारी जमीन पर अवैध कब्जा हटाने के दौरान दो पुलिस अफसरों समेत 29 लोगों की मौत हो गई थी। भाजपा ने प्रदेश के कैबिनेट मंत्री शिवपाल सिंह यादव पर कब्जाधारियों को संरक्षण देने के आरोप लगाए थे। 

ऐसा माना जा रहा है कि राज्यपाल ने रिपोर्ट में कहा है कि कब्जा हटाने की कार्रवाई पहले की जाती तो हालात ऐसे नहीं बनते। खुफिया एजेंसियां और प्रशासनिक व पुलिस अफसर स्थिति भांपने में नाकाम रहे। उन्होंने कब्जाधारियों को संरक्षण देने की तरफ भी इशारा किया है।

भाजपा सांसद हुकम सिंह ने अपने संसदीय क्षेत्र के कैराना कस्बे में दहशत और खौफ में हिंदुओं के पलायन का मुद्दा उठाया। शुरू में पलायन के पीछे सांप्रदायिक आधार बताया गया। राज्य सरकार ने पलायन करने वालों की सूची का सत्यापन कराया तो भाजपा ने उच्चस्तरीय कमेटी भेजी। 

समझा जा रहा है कि राज्यपाल ने पलायन के तथ्य को स्वीकार किया है और इसके लिए वहां की बदहाल कानून-व्यवस्था को जिम्मेदार माना है। उन्होंने अपराधियों को राजनीतिक संरक्षण का भी जिक्र किया गया है।

एकपक्षीय कार्रवाई के आरोप से पनप रहा आक्रोश

UP governor send report to President on kaira and mathura violence.

गौतमबुद्धनगर जिले के दादरी क्षेत्र के बिसाहड़ा गांव में 28 सितंबर, 2015 को वायु सेना के कर्मचारी मो. अखलाक की इस शक में हत्या कर दी गई थी कि उसके घर में गाय का मांस (बीफ) रखा हुआ है। 

इस घटना के बाद देशभर में सहिष्णुता को लेकर लंबी बहस चली थी। पिछले दिनों फोरेंसिक जांच में यह बात सामने आई कि घर के बाहर फेंका गया मीट बीफ था। समझा जाता है कि राज्यपाल ने अपनी रिपोर्ट में इस प्रकरण में एकपक्षीय कार्रवाई से पनप रहे आक्रोश और ध्रुवीकरण की तरफ इशारा किया है।

राज्यपाल के सुझाव पर मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने सरकारी भूमि पर अवैध कब्जों व अतिक्रमण को लेकर कार्यवाही किए जाने की जानकारी दी है। 

राजभवन के प्रवक्ता के मुताबिक मुख्यमंत्री ने बताया कि मुख्य सचिव के माध्यम से सभी कमिश्नरों को पत्र भेजकर जानकारी मांगी गई है कि सरकारी जमीनों पर कब से और कितने अवैध कब्जे हुए हैं ? कब्जे वाली जमीन की मौजूदा मालियत क्या है ? 

सरकारी भूमि को अवैध कब्जों से मुक्त कराने के संबंध में किस प्रकार कार्यवाही की जाएगी, इस बारे में भी कमिश्नरों से जानकारी मांगी गई है।

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