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असाध्य रोगों के इलाज का बढ़ेगा बजट
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लखनऊ। चिकित्सा शिक्षा एवं वित्त मंत्री सुरेश खन्ना ने असाध्य रोगों के इलाज का बजट बढ़ाने का संकेत दिया है। इससे बीपीएल, कैंसर, किडनी व लिवर के मरीजों को राहत मिलेगी। आर्थिक तंगी से जूझने वालों का इलाज प्रभावित न हो, इसके लिए भी बजट में कई प्रावधान होने की उम्मीद है।
सरकार चिकित्सा संस्थानों एवं मेडिकल कॉलेजों को कैंसर, किडनी, लिवर, हार्ट आदि के इलाज के लिए असाध्य रोग मद में बजट देती है। इससे संबंधित चिकित्सालय गरीबी रेखा के नीचे जीवन यापन करने वाले मरीजों को निशुल्क इलाज उपलब्ध कराते हैं। सभी संस्थानों में इसके लिए कमेटी बनती है। इलाज करने वाले चिकित्सक व कमेटी की संस्तुति पर मरीज को मुफ्त में इलाज मिलता है। पिछले साल सरकार ने इस मद में 40 करोड़ रुपये जारी किए थे। इसमें केजीएमयू को चार करोड़ और एसजीपीजीआई को दो करोड़ मिले थे। एसजीपीजीआई के हेपेटोलॉजी विभाग के उद्घाटन समारोह में पहुंचे चिकित्सा शिक्षा मंत्री ने कहा कि सरकार असाध्य रोग से पीड़ित मरीजों के इलाज को लेकर बेहद गंभीर है। इस बार बजट में इस मद में बढ़ोतरी की जाएगी। साथ ही गरीब मरीजों के इलाज से जुड़े दूसरे मद भी बढ़ सकते हैं। आयुष्मान योजना के तहत गरीब मरीजों को पांच लाख तक की सुविधा दी जा रही है। यह भी प्रयास किया जा रहा है कि जो लोग आयुष्मान में शामिल नहीं हो पाए हैं, उनके लिए वैकल्पिक रास्ते उपलब्ध कराए जाएं। इलाज में आर्थिक तंगी आड़े नहीं आए, इसके लिए सरकार कई महत्वपूर्ण कदम उठाने जा रही है।
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सरकार चिकित्सा संस्थानों एवं मेडिकल कॉलेजों को कैंसर, किडनी, लिवर, हार्ट आदि के इलाज के लिए असाध्य रोग मद में बजट देती है। इससे संबंधित चिकित्सालय गरीबी रेखा के नीचे जीवन यापन करने वाले मरीजों को निशुल्क इलाज उपलब्ध कराते हैं। सभी संस्थानों में इसके लिए कमेटी बनती है। इलाज करने वाले चिकित्सक व कमेटी की संस्तुति पर मरीज को मुफ्त में इलाज मिलता है। पिछले साल सरकार ने इस मद में 40 करोड़ रुपये जारी किए थे। इसमें केजीएमयू को चार करोड़ और एसजीपीजीआई को दो करोड़ मिले थे। एसजीपीजीआई के हेपेटोलॉजी विभाग के उद्घाटन समारोह में पहुंचे चिकित्सा शिक्षा मंत्री ने कहा कि सरकार असाध्य रोग से पीड़ित मरीजों के इलाज को लेकर बेहद गंभीर है। इस बार बजट में इस मद में बढ़ोतरी की जाएगी। साथ ही गरीब मरीजों के इलाज से जुड़े दूसरे मद भी बढ़ सकते हैं। आयुष्मान योजना के तहत गरीब मरीजों को पांच लाख तक की सुविधा दी जा रही है। यह भी प्रयास किया जा रहा है कि जो लोग आयुष्मान में शामिल नहीं हो पाए हैं, उनके लिए वैकल्पिक रास्ते उपलब्ध कराए जाएं। इलाज में आर्थिक तंगी आड़े नहीं आए, इसके लिए सरकार कई महत्वपूर्ण कदम उठाने जा रही है।
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