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यूपी: मेडिकल कॉलेजों के आरक्षण संबंधी शासनादेश रद्द करने के खिलाफ सरकार की अपील, सुनवाई आज
Tue, 02 Sep 2025 06:32 AM IST
रोहित मिश्र
अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ
अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ
Published by: रोहित मिश्र
Updated Tue, 02 Sep 2025 06:32 AM IST
सार
Medical colleges in UP: राज्य सरकार ने अम्बेडकर नगर, कन्नौज, जालौन व सहारनपुर के सरकारी मेडिकल कॉलेजों में आरक्षण के संबंध में सरकार ने अपील की है।
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विस्तार
राज्य सरकार ने अम्बेडकर नगर, कन्नौज, जालौन व सहारनपुर के सरकारी मेडिकल कॉलेजों में आरक्षण के सम्बंध में पारित शासनादेशों को रद् करने के एकल पीठ के फैसले के खिलाफ विशेष अपील दाखिल की है। सोमवार को अपील पर सुनवायी करते हुए, हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने राज्य सरकार के अधिवक्ताओं से पूछा है कि उक्त निर्णय में क्या कमी है? मामले की सुनवायी मंगलवार को होगी।
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न्यायमूर्ति राजन रॉय व न्यायमूर्ति मंजीव शुक्ल की खंडपीठ के समक्ष राज्य सरकार की अपील पर सुनवायी हुयी खंडपीठ ने अपीलकर्ता - राज्य सरकार के वरिष्ठ अधिवक्ता जेएन माथुर को स्पष्ट करने को कहा है कि सर्वोच्च न्यायालय के निर्णयों व आरक्षण सम्बंधी प्रावधानों पर विचार के उपरांत पारित एकल पीठ के उक्त 25 अगस्त के निर्णय में क्या कमी है?
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दरअसल, एकल पीठ ने यह पाते हुए कि शासनादेशों दिनांक 20 जनवरी 2010, 21 फरवरी 2011, 13 जुलाई 2011, 19 जुलाई 2012, 17 जुलाई 2013 व 13 जून 2015 के जरिए आरक्षित वर्ग के लिए 79 प्रतिशत से अधिक सीटें सुरक्षित की गई हैं, इन शासनादेशों को निरस्त कर दिया था। साथ ही चारों सरकारी मेडिकल कॉलेजों में आरक्षण अधिनियम, 2006 का सख्ती से अनुपालन करते हुए, नये सिरे से सीटें भरने का आदेश दिया था।
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याची के अधिवक्ता मोतीलाल यादव ने दलील दी थी कि उक्त मेडिकल कॉलेजों में राज्य सरकार के कोटे की कुल 85-85 सीटें हैं जबकि सिर्फ 7-7 सीटें अनारक्षित श्रेणी के लिए रखी गई हैं। वहीं, महानिदेशक, चिकित्सा शिक्षा व प्रशिक्षण की ओर से दलील दी गई थी कि इंदिरा साहनी मामले में शीर्ष अदालत यह स्पष्ट कर चुकी है कि 50 प्रतिशत की सीमा अंतिम नहीं है, इससे अधिक आरक्षण दिया जा सकता है। हालांकि, एकल पीठ इस दलील से सहमत नहीं हुयी व कहा कि यह सीमा सिर्फ नियमों का पालन करते हुए ही, बढ़ाई जा सकती है।