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मुख्तार अंसारी को तीन मामलों में बरी करने के फैसले को यूपी सरकार ने हाईकोर्ट में दी चुनौती
Wed, 28 Apr 2021 12:12 AM IST
पंकज श्रीवास्तव
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
Published by: पंकज श्रीवास्तव
Updated Wed, 28 Apr 2021 12:12 AM IST
सार
हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने दिसम्बर 2020 में मुख्तार अंसारी को तीन मामलों में बरी करने के एमपी-एमएलए की विशेष अदालत के फैसलों के खिलाफ राज्य सरकार की ओर से दाखिल तीन अलग अलग अपीलों को सुनवाई के लिए मंजूर कर लिया है।
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लखनऊ हाईकोर्ट
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विस्तार
हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने दिसम्बर 2020 में मुख्तार अंसारी को तीन मामलों में बरी करने के एमपी-एमएलए की विशेष अदालत के फैसलों के खिलाफ राज्य सरकार की ओर से दाखिल तीन अलग अलग अपीलों को सुनवाई के लिए मंजूर कर लिया है। कोर्ट ने मुख्तार अंसारी को नोटिस भी जारी किया है। कोर्ट ने विशेष अदालत से सम्बंधित तीनों मामलों की पत्रावलियां भी तलब करते हुए मामलों की अगली सुनवाई तीन हफ्ते बाद नियत की है।
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न्यायमूर्ति नरेंद्र कुमार जौहरी ने मंगलवार को यह आदेश वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से सरकार की अपीलों पर सुनवाई करने के बाद दिया। राज्य सरकार की ओर से अपीलें दायर कर कहा गया था कि मुख्तार अंसारी के खिलाफ एक गवाह ने अपनी मुख्य परीक्षा में उसके खिलाफ सजा के लिए पर्याप्त गवाही दी थी किन्तु विचारण अदालत ने उक्त गवाही को न मानकर मुख्तार अंसारी को बरी कर दियाए जो कानून की मंशा के खिलाफ था।
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वहीं गैंगस्टर एक्ट के मामले में कहा कि पत्रावलियों पर उपलब्ध साक्ष्यों को विचारण अदालत ने ठीक से परीक्षित नहीं किया और उसे बरी करके गलती की। न्यायालय ने प्रथम दृष्टया सुनवाई करके अपीलों को विचारार्थ मंजूर कर मुख्तार अंसारी को नोटिस जारी कर दिया।
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मालूम हो कि एमपी एमएलए की विशेष अदालत ने जेलर से गाली गलौज व जानमाल की धमकी देने और तत्कालीन अपर महानिरीक्षक कारागार को धमकी देने के दूसरे मामले में साक्ष्य के अभाव में मुख्तार अंसारी को गत दिसम्बर में बरी कर दिया था। विशेष अदालत ने थाना हजरतगंज से संबंधित गैंगेस्टर के भी एक मामले में भी साक्ष्य के अभाव में अभियुक्त मुख्तार अंसारी को बरी करने का आदेश दिया था।
अभियोजन के मुताबिक 28 अप्रैलए 2003 को लखनऊ के जेलर एसके अवस्थी ने थाना आलमबाग में मुख्तार के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई थी। जिसके अनुसार जेल में मुख्तार अंसारी से मिलने आए लोगों की तलाशी लेने का आदेश देने पर उन्हें जान से मारने की धमकी दी गई थी।
साथ ही उनके साथ गाली गलौज करते हुए मुख्तार ने उन पर पिस्तौल भी तान दी थी। जबकि एक मार्चए 1999 को तत्कालीन अपर महानिरीक्षक कारागार एसपी सिंह पुंढीर ने थाना कृष्णानगर में दर्ज कराई थी। विशेष अदालत में मुख्तार अंसारी के इन दोनों मामलों के अलावा थाना हजरगंज से संबधित गैंगेस्टर एक्ट के मुकदमे की भी सुनवाई हो रही थी। जिनमें उसे बरी कर दिया गया गया था।