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अब घर बैठे हो सकेगा ट्रांसफर, देखें योगी सरकार की तबादला नीति

Mon, 10 Jul 2017 12:55 PM IST
amarujala.com, written by अखिलेश वाजपेयी
amarujala.com, written by अखिलेश वाजपेयी Updated Mon, 10 Jul 2017 12:55 PM IST
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up government approves new transfer policy for degree college lecturers
डेमो - फोटो : demo pic
यूपी सरकार ने राजकीय महाविद्यालयों के प्राचार्यों और प्रवक्ताओं के लिए नई तबादला नीति लागू कर दी है। रविवार आधी रात से इस नीति के लागू होने के बाद प्राचार्यों और प्रवक्ताओं को तबादलों के लिए उच्च शिक्षा निदेशालय या क्षेत्रीय उच्च शिक्षा अधिकारियों के यहां चक्कर लगाने की जरूरत नहीं रहेगी।
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पूरी व्यवस्था को ऑनलाइन कर दिया गया है। तबादला चाहने वाले की जरूरत और उसकी श्रेणी का वर्गीकरण करते हुए उनके अंक निर्धारित कर दिए गए हैं। इच्छुक प्राचार्य और प्रवक्ता विभागीय वेबसाइट पर जाकर अपने तबादले का वैकल्पिक स्थान भर सकते हैं।
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प्रत्येक अभ्यर्थी को तीन स्थानों का विकल्प उपलब्ध होगा। एक स्थान के लिए ज्यादा अभ्यर्थी होने पर निर्धारित अंकों के आधार पर तैनाती दी जाएगी। गंभीर बीमारियों, सेवानिवृत्ति में दो वर्ष शेष रहने, पति-पत्नी में किसी के सैनिक या अर्धसैनिक बल में कार्यरत होने तथा राष्ट्रीय या राज्य पुरस्कार प्राप्त होने पर मनचाही तैनाती में प्राथमिकता देने का भी प्रावधान है। उप मुख्यमंत्री डॉ. दिनेश शर्मा ने नई तबादला नीति की पुष्टि की है।
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नीति को कैबिनेट की मंजूरी मिल चुकी है। इसे महाविद्यालयों में छात्र-शिक्षक अनुपात (1:60) को दुरुस्त करने के लिए लाया गया है। अभी किसी-किसी महाविद्यालय में 60 छात्रों पर दो-दो शिक्षक हैं तो कहीं एक शिक्षक पर 60 से ज्यादा छात्रों की जिम्मेदारी है।

कुछ महाविद्यालयों में तो गिनती के ही शिक्षक हैं। तबादला नीति लाने की एक वजह यह भी है कि सरप्लस शिक्षक स्वत: अपनी पसंद का महाविद्यालय चुन लें, जिससे सरकार को उन्हें न हटाना पड़े।  

पूरी व्यवस्था होगी ऑनलाइन

up government approves new transfer policy for degree college lecturers
डेमो - फोटो : demo pic
नीति में ऑफलाइन अथवा निदेशक उच्च शिक्षा या शासन को स्थानांतरण के लिए आवेदन करने की मनाही कर दी गई है। पूरी व्यवस्था ऑनलाइन होगी। एक बार भरा गया विकल्प अंतिम होगा।

इसे स्थानांतरण नीति के प्रावधानों के तहत ही बदला जा सकेगा। प्रत्येक वर्ष 15 जुलाई तक ही तबादले कर दिए जाएंगे। इस वर्ष नीति का पहला साल होने के कारण स्थानांतरण प्रक्रिया 31 जुलाई तक पूरी कर ली जाएगी।

इन्हें मनचाहे स्थान पर तैनाती (पद रिक्त होने पर )
कैंसर, एड्स, किडनी फेल्योर, लीवर फेल्योर प्राचार्य व प्रवक्ता। किसी प्राचार्य या प्रवक्ता के पति या पत्नी में कोई सैनिक या अर्धसैनिक बल में कार्यरत है तथा उसकी तैनाती सीमा या नक्सल प्रभावित इलाकों में है।पति-पत्नी दोनों उसी जिले के किसी राजकीय महाविद्यालय में सेवारत हैं।राष्ट्रीय या राज्य पुरस्कार प्राप्त प्राचार्य या प्रवक्ता। जिनकी सेवानिवृत्ति में दो वर्ष से कम बचे हैं।

जिलों में तीन वर्ष और मंडल में सात वर्ष वालों का तबादला। पर, इस वर्ष यह समयावधि लागू नहीं होगी। सिर्फ छात्र-शिक्षक अनुपात दुरुस्त करने के लिए सरप्लस शिक्षकों वाले महाविद्यालयों से शिक्षक  हटाए जाएंगे।

जिन प्राचार्यों और प्रवक्ताओं की सेवानिवृत्ति में दो साल से अधिक बचे हैं, उनकी तैनाती गृहजिले में नहीं होगी। राजकीय महाविद्यालयों को तीन श्रेणी में बांटा गया है। प्रथम श्रेणी में वे महाविद्यालय रखे गए हैं जो (बुंदेलखंड छोड़कर) नगर निगम क्षेत्र या जिला मुख्यालयों के 20 किमी. के अंदर हैं।

दूसरी श्रेणी में वे महाविद्यालय रखे गए हैं जो (बुंदेलखंड छोड़कर) नगर निगम या जिला मुख्यालय से 20 किमी. से ऊपर लेकिन 35 किमी. से कम में स्थित हैं। तीसरी श्रेणी में वे सभी महाविद्यालय रखे गए हैं जो पहले की दो श्रेणियों में नहीं हैं।

शिक्षा का स्तर सुधरे, पठन-पाठन का बने माहौल 

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डिप्टी सीएम डॉ. दिनेश शर्मा - फोटो : amar ujala
नवनियुक्त शिक्षकों को कम से कम तीन साल श्रेणी तीन के महाविद्यालयों में नौकरी करनी होगी। महिला शिक्षकों को यथासंभव तैनाती में उनके विकल्प को प्राथमिकता दी जाएगी।

इस तरह होगा आवेदन
इच्छुक प्राचार्य व प्रवक्ता विभागीय वेबसाइट पर जाकर रिक्तियों को देख सकते हैं। फिर वह अपने इच्छुक स्थान के लिए क्लिक करेंगे तो उनके सामने तीन विकल्प आएंगे।

इसमें प्रथम, द्वितीय और तृतीय करके इन विकल्पों का चयन करना होगा। साथ ही सॉफ्टवेयर द्वारा पूछे गए सवालों को भरना होगा, जिसके आधार पर अंक निर्धारित होंगे।

अगर किसी स्थान के लिए एक से अधिक लोग आवेदन करते हैं तो उस पर तैनाती का पात्र वह होगा, जिसे निर्धारित प्रक्रिया के तहत ज्यादा अंक हासिल होंगे। निर्धारित प्रक्रिया पूरी करते ही सॉफ्टवेयर खुद ही संबंधित प्राचार्य या प्रवक्ता का तबादला कर देगा। उसी आधार पर उसका आदेश भी निकल जाएगा। इसमें कोई फेरबदल नहीं होगा।
 
‘दुखी मन से कोई शिक्षक पढ़ा नहीं सकता। तनावपूर्ण माहौल में कोई विद्यार्थी पढ़ नहीं सकता। इसीलिए सरकार ने नई पारदर्शी तबादला नीति बनाई है, जिससे शिक्षकों को निर्धारित मानकों और कुछ शर्तों के साथ उनकी मनपसंद जगह पर तैनाती दी जा सके। सरकार न सिर्फ शिक्षा का स्तर सुधारने में लगी है बल्कि यह भी चाहती है कि प्रदेश में पठन-पाठन का माहौल बने।’  -डॉ. दिनेश शर्मा, उप मुख्यमंत्री (माध्यमिक व उच्च शिक्षा की जिम्मेदारी) 
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