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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Lucknow News ›   UP: Evidence of a Grave and Mosque Found in Kasamandi Kalan, Malihabad; Directorate of Archaeology States Stru

UP: मलिहाबाद के कसमंडी कलां में कब्र व मस्जिद का प्रमाण, पुरातत्व निदेशालय बोला- संरचना 18वीं सदी की

Sat, 30 May 2026 09:18 AM IST
Akash Dwivedi सतीश संगम, अमर उजाला, लखनऊ
सतीश संगम, अमर उजाला, लखनऊ Published by: Akash Dwivedi Updated Sat, 30 May 2026 09:18 AM IST
सार

लखनऊ के कसमंडी कलां स्थित विवादित ढांचे के सर्वे में राज्य पुरातत्व निदेशालय ने इसे 18वीं सदी की संरचना बताया है। रिपोर्ट में मस्जिदनुमा वास्तुकला और चार कब्रों के प्रमाण मिलने का उल्लेख है। स्थल की ऐतिहासिक पहचान को लेकर दोनों पक्षों के दावे अलग-अलग हैं, जिससे विवाद बना हुआ है।

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UP: Evidence of a Grave and Mosque Found in Kasamandi Kalan, Malihabad; Directorate of Archaeology States Stru
मकबरा-मंदिर विवाद। - फोटो : अमर उजाला नेटवर्क

विस्तार

मलिहाबाद के कसमंडी कलां स्थित विवादित ढांचे का राज्य पुरातत्व निदेशालय ने सर्वेक्षण किया है और इसकी रिपोर्ट पर्यटन एवं संस्कृति विभाग को सौंप दी है। इसमें दावा किया गया है कि विवादित ढांचे की संरचना 18वीं सदी की है और इसमें मस्जिद व कब्र के प्रमाण मिले हैं।

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बीते दिनों लाखन आर्मी और सुहेलदेव आर्मी ने इस स्थल की प्राचीन पहचान को बदलने का दावा किया था। इस दावे के बाद बढ़े विवाद को देखते हुए पर्यटन एवं संस्कृति विभाग के अपर मुख्य सचिव अमृत अभिजात के निर्देश पर पुरातत्व टीम ने बुधवार को परिसर का विस्तृत निरीक्षण किया। 
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पुरातत्व विभाग की टीम ने करीब दो से तीन घंटे के सर्वे के बाद तैयार अपनी रिपोर्ट में बताया है कि कसमंडी कलां स्थित इस ढांचे के निर्माण में पारंपरिक लखौरी ईंटों और तत्कालीन कारीगरी का प्रयोग किया गया है, जो 17वीं और 18वीं शताब्दी की स्थापत्य शैली को दर्शाता है। 
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संरचना में इस्लामी वास्तुकला के तत्व जैसे किबला दीवार, मेहराब, गुंबद, मीनारें और मस्जिदनुमा ढांचे के बीच चार कब्रें पाई गई हैं। हालांकि, रिपोर्ट में परिसर की मरम्मत की बात भी लिखी गई है। फिलहाल इस सर्वे रिपोर्ट को सुरक्षित रख लिया गया है, जो जरूरत पड़ने पर मुख्यमंत्री को दी जाएगी।

 

यह है मामला

लाखन आर्मी के राष्ट्रीय अध्यक्ष सूरज पासी और सुहेलदेव आर्मी के योगेश पासी ने मुद्दा उठाया था कि कसमंडी कलां में बना मकबरा और मस्जिद वर्ष 980 से 1031 के दौरान राजपासी राजा कंस शिव मंदिर और किला था। 

इसकी दीवारों पर आज भी हिंदुओं की परंपरागत आकृतियां बनी हुई हैं, जिसे दूसरे समुदाय के लोगों ने मस्जिद और मकबरे में तब्दील कर दिया। वहीं, दूसरे पक्ष का कहना है कि सरकारी दस्तावेजों में भूमि कब्रिस्तान दर्ज है। 

इसमें किसी प्रकार का कोई नया निर्माण नहीं कराया गया है। सैकड़ों वर्ष पुराने मकबरे में कब्रें बनी हुई हैं और मस्जिद में प्रत्येक जुमे की नमाज होती आई है। इस मुद्दे को इतने साल के बाद उठाकर राजनीतिक मुद्दा बनाया जा रहा है।

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