गोंडा: टिकट घोषणा से लेकर नामांकन तक बनते-बिगड़ते रहे समीकरण, सपा-भाजपा में उपजी नाराजगी
गोंडा जिले में राजनीतिक समीकरण बदल रहे हैं। सपा व भाजपा के लोगों के टिकट बदलने से नेताओं में नाराजगी उपजी है जिसका लाभ कांग्रेस व बसपा ने उठाने का प्रयास किया है।
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राजनीति के रंग और अंदाज कुछ अलग ही होते हैं। चुनावी दौर में तो यह रंग और चटख हो जाता है। चुनावी घोषणा के बाद पहले तो बड़ी बेसब्री से टिकट का इंतजार रहा। घोषणा हुई तो कुछ दिग्गजों का नाम कटा, कुछ ने नए रास्ते की तलाश कर राह चुनी। नामांकन के दौरान भी कुछ ऐसे चौकाने वाले फैसले आए कि क्षेत्र के पूरे चुनावी परिदृश्य का समीकरण ही बदल गया। टिकट घोषणा से लेकर नामांकन तक बनते बिगड़ते समीकरणों से दलीय निष्ठा भी तार-तार हुई। इसके बावजूद चुनावी वैतरणी पार करने को इसमें भी अवसर तलाश करने में कुछ लोग कामयाब भी हुए।
गोंडा जिले में सात विधानसभा सीटों की नामांकन प्रक्रिया मंगलवार को संपन्न हो गयी। इस दौरान राजनीतिक सरगर्मी पूरे शबाब पर रही। पूरे समय दलीय नेताओं के साथ उनके समर्थक नामांकन स्थल कलेक्ट्रेट के आसपास जमे रहे। मिशन 2022 की तैयारी तो सभी दलों ने पहले ही शुरू कर दी थी लेकिन विधानसभावार प्रभारी-प्रत्याशी तय करने का सिलसिला सबसे पहले बसपा ने शुरू किया। जबकि अंतिम समय तक प्रत्याशी बदलने का दांव कांग्रेस की तरफ से खेला गया। इसी कारण टिकट बंटवारे को लेकर सपा भाजपा में उपजी नाराजगी का सीधा फायदा कांग्रेस व बसपा ने उठाया।
भाजपा: विधायक लल्ला भैया का टिकट काट फैलाई सनसनी
सत्ताधारी भाजपा ने सभी सात सीटों पर अपने उम्मीदवारों की घोषणा 30 जनवरी को एक साथ कर दी थी। इस दौरान करनैलगंज से मौजूदा विधायक अजय प्रताप सिंह लल्ला भैया का टिकट काटकर सनसनी पैदा कर दी। यहां से अजय कुमार सिंह को और शेष सीटों पर मौजूदा विधायक प्रतीक भूषण सिंह सदर, गौरा प्रभात वर्मा, मनकापुर रमापति शास्त्री, मेहनौन विनय कुमार द्विवेदी,तरबगंज प्रेम नारायन पांडेय व कटराबाजार से बावन सिंह को टिकट दिया है। इस फैसले से बगावत के सुर भी निकले और कटरा बाजार से टिकट मांग रहे विनोद शुक्ल बसपा में चले गए। जबकि लल्ला भैया अपने धुर विरोधी माने जाने वाले योगेश प्रताप सिंह के साथ हो गए।
सपा: नए चेहरों पर भरोसा, राम प्रताप बने बागी
सपा ने अपनी पहली सूची 26 जनवरी को जारी की। सदर से सूरज सिंह, करनैलगंज योगेश प्रताप सिंह, कटरा बाजार वैधनाथ दुबे को मैदान में उतारा। दूसरी सूची लंबी जद्दोजहद के बाद छह फरवरी को आई इसमें पूर्व विधायक नंदिता शुक्ला को मेहनौन और नए चेहरों में गौरा से संजय विद्यार्थी, तरबगंज रामभजन चौबे व मनकापुर से रमेश गौतम के नाम की घोषणा की गयी। इससे नाराज गौरा से दावेदार पूर्व विधायक राम प्रताप सिंह व मनकापुर से पूर्व विधायक स्व.बाबूलाल की पुत्री संतोष कुमारी ने बगावत कर कांग्रेस का दामन थाम लिया।
बसपा: बगावत कर आए विनोद शुक्ला को थमाया टिकट
बसपा ने दिसंबर माह में ही अपने तीन प्रभारी- प्रत्याशी गौरा से निगार उस्मानी, सदर मो. जकी और मनकापुर से श्याम नारायन को घोषित किया था। 31 जनवरी को अधिकृत सूची में भाजपा से बगावत कर आए विनोद शुक्ला को कटरा बाजार से प्रत्याशी बना दिया। साथ ही तरबगंज से लालजी यादव, मेहनौन से शिवकुमार विश्वकर्मा व करनैलगंज से रंजीत गोस्वामी के नाम पर मुहर लगाई।
कांग्रेस: नामांकन के बाद भी बदले दो प्रत्याशी
चुनाव में दमदार उम्मीदवार की तलाश में जुटी कांग्रेस अंतिम समय तक बदलाव करती रही। 13 जनवरी को सदर से रमा कश्यप के नाम की घोषणा करने के बाद 27 जनवरी को पूरी सूची जारी कर दी गयी। तरबगंज से सविता पांडे को टिकट दिया तो नामांकन के पहले ही वह साथ छोड़ भाजपा में चल गयी। उनके स्थान पर बाद में त्वरिता सिंह को उम्मीदवार बनाया। करनैलगंज से त्रिलोकी नाथ तिवारी, मनकापुर से कमला सिसोदिया, कटरा बाजार से ताहिरा बेगम व गौरा से सत्येंद्रधर दुबे का नाम तय किया।