फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Lucknow News ›   UP: Crores lost in toll tax revenue due to fake FASTags; two arrested, including an IndusInd Bank agent—here’s

UP: फर्जी फास्टैग बनाकर टोल टैक्स में करोड़ों की चपत, इंडसइड बैंक एजेंट समेत दो गिरफ्तार; इस तरह करते थे खेल

Wed, 22 Jul 2026 08:33 PM IST
Akash Dwivedi अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ
अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ Published by: Akash Dwivedi Updated Wed, 22 Jul 2026 08:33 PM IST
सार

यूपी एसटीएफ ने फर्जी फास्टैग बनाकर टोल टैक्स चोरी करने वाले गिरोह का भंडाफोड़ करते हुए दो आरोपियों को गिरफ्तार किया। गिरोह फर्जी दस्तावेजों और वाहन नंबरों से फास्टैग जारी कर कई वाहनों पर इस्तेमाल करता था। इस धोखाधड़ी से सरकार को करोड़ों रुपये के राजस्व का नुकसान पहुंचा।

विज्ञापन
UP: Crores lost in toll tax revenue due to fake FASTags; two arrested, including an IndusInd Bank agent—here’s
एसटीएफ ने आरोपियों को पकड़ लिया। - फोटो : अमर उजाला नेटवर्क

विस्तार

राष्ट्रीय राजमार्गों के टोल प्लाजा पर फर्जी फास्टैग के जरिए टोल टैक्स चोरी कर सरकार को करोड़ों रुपये के राजस्व का नुकसान पहुंचाने वाले गिरोह का राजफाश करते हुए एसटीएफ ने बुधवार को दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार आरोपियों की पहचान सीतापुर के खैराबाद निवासी अनंत राम राठौर और इंडसइंड बैंक के एजेंट नकीब खान के रूप में हुई है। दोनों की गिरफ्तारी पॉलीटेक्निक चौराहे के पास से हुई है। उनके पास से दो मोबाइल , दो पैन कार्ड और 4,230 रुपये नकद बरामद किए हैं।

विज्ञापन


एसटीएफ के एएसपी सत्य सेन यादव ने बताया कि गिरोह फर्जी दस्तावेजों और फर्जी वाहन नंबरों के आधार पर फास्टैग जारी कराता था। इसके बाद उस फास्टैग का इस्तेमाल सरे वाहनों पर किया जाता था, जिससे टोल प्लाजा पर ऑनलाइन भुगतान से बचा जा सके। 
विज्ञापन


जांच में सामने आया कि वाहन संख्या यूपी-32 जेडएन-8925 के लिए फर्जी नंबर एमएच-34 एस-9455 का इस्तेमाल कर फास्टैग जारी कराया गया। बाद में उसी फास्टैग का उपयोग दूसरे वाहनों पर भी किया जाता रहा। इस पूरे खेल से सरकार को करोड़ों रुपये के राजस्व का नुकसान पहुंचा।

विज्ञापन
विज्ञापन

 

 

एसटीएफ पूरे नेटवर्क की कड़ियां खंगाल रही

एसटीएफ पूरे नेटवर्क की कड़ियां खंगाल रही हैं। जांच एजेंसी यह भी पता लगा रही है कि फर्जीवाड़े में और कौन-कौन शामिल था और अब तक कितने फर्जी फास्टैग जारी किए गए। साथ ही बैंक से जुड़े अन्य लोगों की भूमिका और सरकार को हुए वास्तविक राजस्व नुकसान का भी आकलन किया जा रहा है।

 

 

पांच हजार में एक फर्जी फास्टैग

पूछताछ में नकीब खान ने एसटीएफ को बताया कि वर्ष 2022 में अनंत राम राठौर ने उसे इंडसइंड बैंक का एजेंट बनवाया था। शुरुआत में उसे बैंक के पोर्टल पर सामान्य तरीके से फास्टैग बनाने का काम सिखाया गया। बाद में अधिक कमाई का लालच देकर फर्जी दस्तावेजों और वाहन नंबरों के आधार पर फास्टैग जारी कराने का खेल शुरू कराया गया।

आरोपी ने स्वीकार किया कि एक फर्जी फास्टैग बनाने के बदले उसे पांच हजार रुपये मिले थे। इसके बाद दोनों ने मिलकर कई अन्य वाहनों के लिए भी इसी तरह फर्जी फास्टैग जारी किए और कमीशन की रकम आपस में बांटते रहे।

 

पूरा खेल समझिए

एसटीएफ के मुताबिक गिरोह पहले बैंक के अधिकृत एजेंट के रूप में काम करता था। इसके बाद वाहन मालिकों के ड्राइविंग लाइसेंस, मोबाइल नंबर और अन्य दस्तावेज लेकर बैंक के पोर्टल पर फास्टैग बनाता था। बाद में फर्जी आरसी और फर्जी वाहन नंबर अपलोड कर दूसरे वाहनों के लिए भी फास्टैग जारी किए जाने लगे। एक वाहन के लिए जारी फास्टैग का इस्तेमाल दूसरे वाहन पर कराया जाता था, जिससे टोल प्लाजा पर वास्तविक वाहन की पहचान नहीं हो पाती थी और टोल टैक्स की चोरी होती थी।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed