यूपी कैबिनेट के फैसले : दूसरे विभागों में भी मिल सकेगी मृतक आश्रितों को अनुकंपा नियुक्ति, रामायण सर्किट और शक्तिपीठ सर्किट का विस्तार
हाइवे पर स्थित मोटल और रेस्तरां को भी पर्यटन इकाई मानने के साथ कारवां टूरिज्म, फार्म स्टे और रिवर क्रूज को भी पर्यटन इकाई मानते हुए नीति के तहत मिलने वाले लाभ दिए जाएंगे।
विस्तार
प्रदेश में रामायण सर्किट का विस्तार सिद्धार्थनगर के डूमरियागंज तक किया जाएगा और हमीरपुर स्थित गायत्री शक्तिपीठ सुमेरपुर और सिद्धार्थनगर स्थित गालापुर माता मंदिर को शक्तिपीठ सर्किट में शामिल किया गया है। योगी कैबिनेट ने बृहस्पतिवार को उत्तर प्रदेश पर्यटन नीति-2018 में पर्यटन इकाइयों को वित्तीय प्रोत्साहन देने के लिए पर्यठन नीति में संशोधन का प्रस्ताव बाई सर्कुलेशन मंजूर किया है।
जानकारी के मुताबिक पर्यटन नीति-2018 के क्रियान्वयन में व्यवहारिक कठिनाइयां सामने आने के बाद विभाग ने नीति में संशोधन का प्रस्ताव प्रस्तुत किया था। नीति में संशोधन के बाद अब एक फरवरी 2016 के बाद जिस भी होटल का नक्शा पास हुआ है उसे नई पर्यटन इकाई मानते हुए नीति के तहत मिलने वाले लाभ दिए जाएंगे। हाइवे पर स्थित मोटल और रेस्तरां को भी पर्यटन इकाई मानने के साथ कारवां टूरिज्म (छोटी बसों, ट्रकों और कंटेनर को होटल के कमरे का रूप देना), फार्म स्टे (खेतों में टेंट लगाकर ठहराने की व्यवस्था) और रिवर क्रूज को भी पर्यटन इकाई मानते हुए नीति के तहत मिलने वाले लाभ दिए जाएंगे। इसके अतिरिक्त वाइल्ड लाइफ और इको टूरिज्म केंद्रों के पास रिसोर्ट बनाने वालों को भी नीति में शामिल कर सुविधाएं दी जाएगी।
जानकारी के मुताबिक नीति में संशोधन कर नीति के तहत पर्यटन इकाइयों को मिलने वाले लाभों की प्रक्रिया में भी सरलीकरण किया गया है। आर्थिक रियायत और ब्याज सब्सिडी औद्योगिक विकास आयुक्त की अध्यक्षता में बनी कमेटी के जरिये ही मिलेगी जबकि शेष सभी स्वीकृतियां पर्यटन विभाग के प्रमुख सचिव की अध्यक्षता में बनी कमेटी देगी।
देशी शराब के लिए 18 प्रतिशत शीरा आरक्षित
प्रदेश में देशी शराब के निर्माण के लिए 18 प्रतिशत शीरा आरक्षित किया जाएगा। सरकार ने नई शीरा नीति 2021-22 को बृहस्पतिवार को कैबिनेट बाई सर्कुलेशन मंजूरी दे दी। प्रदेश में प्रतिवर्ष 570 लाख कुंतल शीरे का अनुमानित उत्पादन होता है। इसमें देशी शराब के लिए आरक्षित शीरे की मात्र लगभग 117.32 कुंतल होगी। एसीएस आबकारी संजय आर भूसरेड्डी ने बताया कि आबकारी राजस्व का 50 फीसदी देशी शराब से मिलता है। अल्प आय वर्ग को गुणवत्ता वाली देशी शराब सस्ते दामों पर उपलब्ध कराने के लिए यह शीरे का आवंटन किया जाता है। जिससे अवैध शराब पीने से जनहानि न हो।
पूर्वांचल के पांच जिलों में महिलाएं संचालित करेंगी मिल्क प्रोड्यूसर कंपनियां
राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत झांसी की बलिनी मिल्क प्रोड्यूसर कंपनी का प्रयोग सफल होने के बाद अब पूर्वांचल के बलिया, चंदौली, गाजीपुर, मिर्जापुर और सोनभद्र में भी महिला स्वयं सहायता समूहों के जरिये मिल्क प्रोड्यूसर कंपनियों का संचालन कराया जाएगा। सरकार ने बृहस्पतिवार को उत्तर प्रदेश महिला सामर्थ्य योजना के तहत वैल्यू श्रृंखला के विस्तार के प्रस्ताव को कैबिनेट बाई सर्कुलेशन मंजूरी दे दी। इस योजना के तहत प्रदेश में महिला किसानों, कामगारों और उत्पादकों की ओर से तैयार किए जा रहे उत्पादों के लिए सामर्थ्य वैल्यू श्रृंखला तैयार करने के साथ उनके प्रशिक्षण की भी व्यवस्था की जा रही है। विभागीय अधिकारी ने बताया कि प्रदेश में एनडीएस (नेशनल डेयरी स्कीम) के सहयोग से केवल महिला सदस्यों के स्वामित्व वाली मिल्क प्रोड्यूसर कंपनियां संचालित की जाएंगी। बलिया, चंदौली, गाजीपुर, मिर्जापुर और सोनभद्र के सात सौ गांवों को योजना से लाभान्वित कर महिलाओं के मालिकाना हक वाली मिल्क प्रोड्यूसर कंपनियों गठित की जाएंगी। इन कंपनियों में 35 हजार महिला दुग्ध उत्पादकों को सदस्य के रूप में पंजीकृत किया जाएगा। 2023-24 के अंत तक यह कंपनियां प्रतिदिन एक लाख लीटर दूध का संकलन करेंगी।
दूसरे विभागों में भी मिल सकेगी मृतक आश्रितों को अनुकंपा नियुक्ति
कोरोना संक्रमण से जान गंवाने वाले मृतक कार्मिकों के आश्रितों को मूल विभाग में पद रिक्त नहीं होने पर दूसरे विभागों में भी नियुक्ति मिल सकेगी। सरकार ने बृहस्पतिवार को मृतक आश्रितों को राहत देने के लिए नियमावली में संशोधन के प्रस्ताव को कैबिनेट बाई सर्कुलेशन मंजूरी दे दी।
जानकारी के मुताबिक कोरोना से जान गंवाने वाले करीब तीन सौ कार्मिकों के आश्रितों को अनुकंपा नौकरी दी जानी है। कुछ विभागों में समूह ग और घ में पद रिक्त नहीं होने के कारण मृतक आश्रितों को नियुक्ति देने में परेशानी सामने आ रही है। वहीं दूसरे विभागों में समूह ग और घ के पद पहले से रिक्त है।
इस समस्या को दूर करने के लिए कार्मिक विभाग ने आश्रितों को दूसरे विभागों में समूह ग और घ के रिक्त पदों पर नियुक्ति देने के लिए उत्तर प्रदेश सेवाकाल में मृत सरकारी सेवकों के आश्रितों की भर्ती नियमावली 1974 में संशोधन का प्रस्ताव कैबिनेट की मंजूरी के लिए भेजा था जिसे मंजूरी दे दी गई। अब जिस विभाग के कर्मचारी की मृत्यु हुई है यदि उस विभाग में समूह ग या घ में आश्रित की योग्यता के अनुसार रिक्त पद उपलब्ध नहीं है तो दूसरे विभाग में जहां पद रिक्त है वहां उन्हें अनुकंपा नियुक्ति दी जा सकेगी।
सूत्रों के मुताबिक प्रदेश सरकार की ओर से अधीनस्थ सेवा चयन आयोग को समूह ग के रिक्त पदों को भरने के लिए अधिचायन भेजा जा चुका है। लेकिन जितनी संख्या में रिक्त पदों पर अनुकंपा नियुक्ति की जाएगी भर्ती प्रस्ताव से उतने कम पद कम करा दिए जाएंगे। सरकार के इस निर्णय से महीनों से अनुकंपा नियुक्ति का इंतजार कर रहे आश्रितों की नियुक्ति का रास्ता साफ हो गया है।
सरकार मलिन बस्तियों में रहने वालों को देगी पक्के मकान
मलिन बस्तियों में रहने वाले लोगों को सरकार अब पक्का मकान बनाकर देगी। इसके लिए नगर विकास विभाग ने प्रधानमंत्री आवास योजना-शहरी के घटक ‘स्व स्थाने मलिन बस्ती पुर्नविकास नीति-2021’ तैयार किया है। इस नीति को कैबिनेट बाई सर्कुलेशन मंजूरी दे दी गई है। इसी नीति के लागू होने पर सरकारी नजूल की भूमि बसी मलिन बस्तियों में रहने वाले लोगों को उसी मुहल्ले में बहुमंजिले भवन बनाकर मकान उपलब्ध कराए जाएंगे। उनको इस मकान का आवंटन मात्र 1000 रुपये में किया जाएगा।
बता दें कि प्रदेश के सभी शहरों में तमाम ऐसी मलिन बस्तियां हैं, जहां पर लाखों गरीब झोपड़ी डालकर रहते हैं। इसके मद्देनजर सरकार ने ऐसे लोगों को भी पक्का देने का फैसला किया है। इसी कड़ी में नगर विकास विभाग ने इस नीति का प्रस्ताव तैयार किया है। प्रस्ताव में गुजरात के माडल पर यूपी में भी मलिन बस्तियों के विकास का खाका तैयार करने की व्यवस्था है। साथ ही यहां रहने वाले लोगों को पक्का मकान देने का भी प्रावधान किया गया है।
इस नीति के मुताबिक मुख्य सचिव की अध्यक्षता में राज्य स्तरीय सक्षम प्राधिकारी का गठन किया जाएगा। जबकि नगर निगमों में मंडलायुक्तों और पालिका परिषद और नगर पंचायतों में डीएम की अध्यक्षता में कमेटी बनाई जाएगी। कमेटी की देखरेख में मकानों का निर्माण कराने से लेकर आवंटन तक का काम किया जाएगा। इन मकानों को निजी पार्टनर से बनवाया जाएगा। इसके लिए उसे कुल क्षेत्रफल की आधी जमीन दी जाएगी और आधी पर मल्टी स्टोर भवन में मकान बनवाया जाएगा। इसके साथ इनके लिए सामुदायिक सुविधाएं भी विकसित की जाएंगी। इसके लिए 50000 रुपये का कार्पस फंड बनाया जाएगा।
पत्थर को पीसकर बनाई जा सकेगी बालू
प्रदेश में नदियों के तल में स्थित पत्थरों और खदानों के पत्थर को पीसकर बालू बनाई जाएगी। नदियों में बालू की लगातार हो रही कमी को दूर करने के लिए भूतत्व एवं खनिकर्म विभाग ने नई प्रणाली एमसेंड लांच की है। सरकार ने बृहस्पतिवार को कैबिनेट बाई सर्कुलेशन एमसेंड प्रणाली और भूतत्व एवं खनिकर्म विभाग की उत्तर प्रदेश उपखनिज (परिहार) नियमावली-2021 को लागू करने की मंजूरी दे दी।
जानकारी के मुताबिक एमसेंड प्रणाली लागू होने के बाद अब जिन नदियों या तालाबों में पानी नहीं बचा है और बालू कम हो गई है वहां स्थित पत्थरों को पीसकर बालू बनाई जा सकेगी। पत्थरों की खदानों में अनुपयोगी पत्थरों को पीसकर बालू बनाई जा सकेगी। भूतत्व एवं खनिकर्म विभाग में पहली बार उत्तर प्रदेश उपखनिज (परिहार) नियमावली 1963 लागू की गई थी। विभाग की ओर से समय-समय पर नियमावली में अब तक कुल 53 संशोधन किए गए हैं।
करीब छह दशक पुरानी नियमावली में बड़ी संख्या में संशोधन होने के कारण पत्रावलियों में उनका उल्लेख करने में विभाग को व्यवहारिक कठिनाई हो रही थी। विभाग ने सभी संशोधनों को शामिल करते हुए भूतत्व एवं खनिकर्म विभाग की नई उत्तर प्रदेश उपखनिज (परिहार) नियमावली-2021 को लागू करने का प्रस्ताव प्रस्तुत किया था। इस प्रस्ताव को कैबिनेट बाई सर्कुलेशन मंजूरी दे दी गई है।
काशी विश्वनाथ मंदिर विस्तारीकरण और सौंदर्यीकरण के लिए 55 करोड़ के प्रस्ताव मंजूर
सरकार ने वाराणसी में काशी विश्वनाथ मंदिर विस्तारीकरण और सौंदर्यीकरण के तहत गंगा नदी के पास घाटों के निर्माण और रैंप बनाने सहित अन्य कार्यों के लिए 55 करोड़ रुपये के प्रस्ताव मंजूर किए है। बृहस्पतिवार को कैबिनेट बाई सर्कुलेशन इसकी मंजूरी दी गई। जानकारी के मुताबिक इस राशि से मंदिर के पीछे वाले हिस्से में भी आवश्यक सुधार और रखरखाव कार्य कराए जाएंगे।
70 वर्ष तक कार्य कर सकेंगे मेडिकल कॉलेजों के शिक्षक, तयशुदा मानदेय पर होगी पुनर्नियुक्ति
प्रदेश के मेडिकल कॉलेजों एवं संस्थानों में चिकित्सा शिक्षक 70 साल तक कार्य कर सकेंगे। 65 साल की उम्र पूरी होने के बाद उनकी पुनर्नियुक्ति की जाएगी। इस दौरान तयशुदा मानदेय दिया जाएगा। यह प्रस्ताव वृहस्पतिवार को कैबिनेट बाई सर्कुलेशन पारित कर दिया गया है।
प्रदेश में चिकित्सा शिक्षकों की कमी को देखते हुए उम्र सीमा 70 साल करने का प्रस्ताव दिया गया था। चिकित्सा शिक्षा विभाग के इस प्रस्ताव में वित्त विभाग ने कुछ संशोधन किए गए। कुछ नियमावली भी जोड़ी गई है। ऐसे में 65 साल की उम्र पूरी करने पर उन्हें दोबारा से नियुक्ति दी जाएगी। वे 70 साल तक शिक्षण कार्य कर सकेंगे।
यह व्यवस्था राजकीय, स्वशासी मेडिकल कॉलेजों, केजीएमयू, लोहिया संस्थान, उत्तर प्रदेश आयुर्विज्ञान विश्वविद्यालय सैफई, में कार्यरत चिकित्सा शिक्षकों पर लागू होगा। इसमें यह भी प्रावधान किया गया है कि जो लोग ग्रामीण इलाके के मेडिकल कॉलेजों में कार्य करेंगे उन्हें निश्चित मानदेय के साथ पेंशन भी दी जाएगी, लेकिन शहरी इलाके के संस्थानों में कार्य करने वालों को सिर्फ फिक्स मानदेय ही दिया जाएगा।
तैयार किए जा सकेंगे नए डॉक्टर
प्रदेश में मेडिकल कॉलेजों की संख्या लगातार बढ़ रही है। नए मेडिकल कॉलेजों में संकाय सदस्यों की नियुक्ति में काफी मशक्कत करनी पड़ रही है। नए खुलने वाले मेडिकल कॉलेजोें में पहले साल के लिए कम से कम 51 संकाय सदस्य का होना अनिवार्य किया गया है। ऐेस में सेवानिवृत्त की उम्र 70 साल किए जाने से डॉक्टरों की कमी दूर होगी। सेवानिवृत्त होने वाले और नए डॉक्टरों को मिलाकर मेडिकल कॉलेजों में संकाय सदस्यों के मानक को पूरा किया जा सकेगा। ऐसे में नेशनल मेडिकल कमीशन की ओर से लगाई जाने वाली आपत्ति से बच सकेंगे और बीच सत्र में किसी मेडिकल कॉलेज की मान्यता पर संकट नहीं आएगा।