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यूपी कैबिनेट के फैसले: पीपीपी मॉडल में चलेंगी 15 सीएचसी, प्रदेश के कस्बों में दौड़ेंगी ई-बसें; जानिए डिटेल

Tue, 02 Sep 2025 09:06 PM IST
रोहित मिश्र अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ
अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ Published by: रोहित मिश्र Updated Tue, 02 Sep 2025 09:06 PM IST
सार

UP Cabinet Decisions: यूपी कैबिनेट की बैठक में कई महत्वपूर्ण फैसले हुए। इसमें प्रदेश के सीएचसी को पीपीपी मॉडल से चलाने की बात शामिल हैं। अब कस्बों में भी ई-बसें चलती हुई दिखेंगी। 

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UP Cabinet decisions: 15 CHCs will run on PPP model, e-buses will run in the towns of the state; Allowances wi
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक - फोटो : Amar Ujala Graphics

विस्तार

 प्रदेश की 15 सीएचसी को पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप (पीपीपी) मॉडल पर संचालित किया जाएगा। इन सीएचसी को 30 बेड का प्रथम संदर्भन इकाई (एफआरयू) के रूप में विकसित किया जाएगा। यहां उपकरणों से लेकर आधारभूत सुविधाओं का भी विकास होगा। ऐसे में मरीजों को पहले से बेहतर चिकित्सा सुविधाएं मिल सकेंगी। इस आशय के प्रस्ताव को मंगलवार को हुई कैबिनेट की बैठक में मंजूरी दे दी गई है।

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प्रदेश में फर्स्ट रेफरल यूनिट (प्रथम संदर्भन इकाई) के रूप में सीएचसी के विकसित होने पर वहां 24 घंटे आपातकालीन प्रसूति सुविधाएं, नवजात शिशु देखभाल और अन्य आपातकालीन सेवाएं उपलब्ध कराई जाती है। परिवार नियोजन और टीकाकरण जैसी सुविधाएं भी चलती हैं। इन सीएचसी को 30 वर्ष के लिए निविदा के जरिए जैसा है, जहां है की स्थिति में सौंपा जाएगा। यहां निजी निवेशक अपने स्तर पर चिकित्सक, नर्सिंग एवं पैरामेडिकल स्टाफ की तैनाती करेगा। ऑपरेशन थियेटर से लेकर सर्जरी के उपकरण आदि की व्यवस्था करेगा।
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यहां आने वाले सभी रोगियों को निःशुल्क स्वास्थ्य सेवाओं (ओपीडी सेवाएं, डायग्नोस्टिक्स सेवाएं, अंतः रोगी सेवाएं एवं औषधियां) मिलेंगी। आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन( एबीडीएम) के निर्धारित मानदंडों के अनुसार सभी व्यवस्थाएं की जाएंगी। रियायतग्राही द्वारा एक फार्मेसी स्थापित की जाएगी, जिसमें राज्य औषधि सूची की सभी आवश्यक और ओटीसी जेनेरिक दवाएं निशुल्क उपलब्ध कराई जाएंगी। विद्युत, जल एवं गैस जैसी यूटीलिटीज सहित सभी आवश्यक बुनियादी ढांचे का संचालन और रखरखाव निवेशक द्वारा स्वंय अपने खर्च पर किया जाएगा।

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पीपीपी पर चलने वाली सीएचसी

महराजगंज - अड्डा बाज़ार
सोनभद्र- बभनी
गोरखपुर - बेलघाट
चंदौली- भोगवारा
लखीमपुर खीरी - चन्दन चौकी
वाराणसी- गजोखर
श्रावस्ती - मल्हीपुर
लखनऊ - नगराम
बलरामपुर- नन्द नगर खजुरिया
चित्रकूट - राजपुर
सिद्धार्थनगर-सिरसिया
बलिया -सुखपुरा
कुशीनगर-तुरकहा खड्डा
बहराइच - विशेश्वरगंज
फतेहपुर- हाजीपुरगंज

राजकीय इंटर कॉलेजों में विशेष बच्चों को मिलेंगे विशेष शिक्षक

 प्रदेश के राजकीय माध्यमिक विद्यालयों में विशेष (दिव्यांग) बच्चों के लिए विशेष शिक्षकों की नियुक्ति की जाएगी। सुप्रीम कोर्ट में दाखिल याचिका में सात मार्च 2025 को दिए गए आदेश के अनुपालन में कैबिनेट ने वर्तमान पदों में से ही 47 पद विशेष शिक्षक के रूप में बदलने को अनुमति दे दी है। इससे विभाग पर कोई अतिरिक्त भार नहीं आएगा।

माध्यमिक शिक्षा निदेशक डॉ. महेंद्र देव ने बताया कि प्रदेश के राजकीय माध्यमिक विद्यालयों में वर्तमान में 692 दिव्यांग विद्यार्थी पढ़ रहे हैं। जबकि इसके सापेक्ष 311 विशेष शिक्षक सेवाप्रदाता से रखे गए हैं। नियमानुसार 15 विद्यार्थी पर एक शिक्षक की आवश्यकता है। इसे देखते हुए 47 पद विशेष शिक्षक के रूप में बदलने को सहमति दे दी गई है। इसके लिए भर्ती लोक सेवा आयोग के माध्यम से लिखित परीक्षा के आधार पर की जाएगी।

उन्होंने बताया कि इसके लिए स्नातक स्तर पर 50 फीसदी अंकों के साथ बीएड, विशेष शिक्षा (अक्षमता, दृष्टिहीन, मूकबधिर व अधिगम अक्षमता) में डिग्री वाले अभ्यर्थियों का चयन किया जाएगा। यह शिक्षक वहां तैनात किए जाएंगे, जहां वर्तमान में दिव्यांग बच्चे बढ़ रहे हैं। निदेशक ने बताया कि विशेष शिक्षक की नियुक्ति से राजकीय माध्यमिक विद्यालयों में पढ़ रहे दिव्यांग विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण समावेशी शिक्षा मिलेगी।

केंद्रीय विधि आयोग की तरह दिए जाएंगे भत्ते

 कैबिनेट ने उप्र विधि आयोग के कार्यकाल तथा सप्तम उप्र राज्य विधि आयोग के वर्तमान अध्यक्ष की सेवा शर्तों को केंद्रीय विधि आयोग के कार्यकाल तथा केंद्रीय विधि आयोग के अध्यक्ष की सेवा शर्तों के समतुल्य किए जाने के विधायी विभाग के प्रस्ताव को मंजूरी प्रदान कर दी। अधिकारियों के मुताबिक राज्य विधि आयोग के अध्यक्ष को केंद्रीय विधि आयोग के अध्यक्ष की भांति मकान किराया भत्ता आदि नहीं मिल रहा था, जिसे अब कैबिनेट ने मंजूर कर दिया है। उन्होंने बताया कि वर्तमान में राज्य विधि आयोग में भी केंद्रीय विधि आयोगी की भांति सेवा शर्तें लागू हैं।

लखनऊ और कानपुर में एनसीसी मॉडल पर 200 ई-बसों के संचालन की मंजूरी

कैबिनेट ने लखनऊ व कानपुर नगर के साथ उनके आसपास के कस्बों में नेट कॉस्ट कॉन्ट्रैक्ट (एनसीसी) मॉडल के तहत 200 इलेक्ट्रिक बसों (ई-बस) के संचालन को मंजूरी प्रदान की है। इस पायलट प्रोजेक्ट का उद्देश्य नगरीय परिवहन को पर्यावरण-अनुकूल, व्यवस्थित, और उपभोक्ता-केंद्रित बनाना है। साथ ही, सरकारी वित्तीय बोझ को कम करते हुए निजी निवेश को प्रोत्साहित करना है।

नगर विकास विभाग के प्रमुख सचिव अमृत अभिजात ने बताया कि एनसीसी मॉडल नागरिकों के आवागमन की सुविधा सुनिश्चित करते हुए निजी ऑपरेटरों को अधिक व्यावसायिक स्वतंत्रता और प्रोत्साहन प्रदान करेगा, जिससे परिवहन सेवाओं की गुणवत्ता में उल्लेखनीय सुधार होगा। नगरीय परिवहन निदेशालय परियोजना इसको लागू करेगा। वर्तमान में निदेशालय द्वारा प्रदेश के 15 नगर निगमों में 743 इलेक्ट्रिक बसों का संचालन किया जा रहा है, जिनमें से 700 बसें ग्रॉस कॉस्ट कॉन्ट्रैक्ट (जीसीसी) मॉडल के तहत संचालित हो रही हैं। प्रोजेक्ट के तहत लखनऊ और कानपुर नगर में 10-10 मार्गों (कुल 20 मार्ग) पर 9 मीटर की वातानुकूलित (एसी) इलेक्ट्रिक बसों का संचालन होगा। अनुबंध की अवधि संचालन तिथि से 12 वर्ष तक की होगी। सरकार द्वारा चयनित मार्गों पर किसी अन्य निजी ऑपरेटर को संचालन की अनुमति नहीं दी जाएगी, जिससे ऑपरेटरों को व्यावसायिक स्थिरता और एकाधिकार प्राप्त होगा।

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