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यूपी उपचुनाव: भाजपा को हताशा से उबारा... 27 का सहारा, योगी की आक्रामक छवि का लाभ; चला हिंदुत्व मॉडल
Sun, 24 Nov 2024 08:54 AM IST
भूपेन्द्र सिंह
सुधीर कुमार सिंह, अमर उजाला, लखनऊ
सुधीर कुमार सिंह, अमर उजाला, लखनऊ
Published by: भूपेन्द्र सिंह
Updated Sun, 24 Nov 2024 08:54 AM IST
सार
यूपी उपचुनाव में मिली जीत ने भाजपा को हताशा से उबारा।यह 27 का सहारा बनेगी। योगी की आक्रामक छवि का भाजपा को लाभ मिला। हिंदुत्व और विकाश का मॉडल चला। कुंदरकी और कटहरी की जीत खास असर डालेगी।
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यूपी उपचुनाव: भाजपा को हताशा से उबारा... 27 का सहारा,
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक
विस्तार
उत्तर प्रदेश की नौ विधानसभा सीटों पर हुए उपचुनाव की परीक्षा में भाजपा को सात सीटों पर मिली जीत न सिर्फ पार्टी कार्यकर्ताओं को हताशा से उबारेगी, बल्कि 2027 में होने वाले विधानसभा चुनाव के लिए भाजपा का सहारा भी बनेगी। खासतौर से मुरादाबाद की कुंदरकी और अयोध्या से सटी अंबेडकरनगर की कटेहरी जैसी सीटों पर तीन दशक बाद कमल का खिलना न सिर्फ भाजपा नेता व कार्यकर्ताओं का हौसला बढ़ाने वाला है, बल्कि जनता के बीच भाजपा के पक्ष में माहौल बनाने में मददगार साबित होगा।
नतीजों ने चुनावी परीक्षा में मुख्यमंत्री योगी के डिस्टिंक्शन मार्क्स से पास होने की घोषणा की है। सिर्फ यूपी ही नहीं, हरियाणा और जम्मू-कश्मीर के बाद महाराष्ट्र तक के नतीजों ने बता दिया है कि योगी का बटेंगे तो कटेंगे नारा कामयाब रहा है। इसने हिंदुओं में चेतना पैदा की है। जिससे हिंदुत्व जीत रहा है और जाति हार रही है। यूपी के उपचुनाव और ताजा चुनाव परिणामों को यह भी माना जा रहा है कि लोकसभा चुनाव में भाजपा को हुए का नुकसान की भरपाई करते हुए जनता ने यह संदेश देने की भी कोशिश की है कि राष्ट्रहित में अब वे न बटेंगे न कटेंगे।
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नतीजों ने चुनावी परीक्षा में मुख्यमंत्री योगी के डिस्टिंक्शन मार्क्स से पास होने की घोषणा की है। सिर्फ यूपी ही नहीं, हरियाणा और जम्मू-कश्मीर के बाद महाराष्ट्र तक के नतीजों ने बता दिया है कि योगी का बटेंगे तो कटेंगे नारा कामयाब रहा है। इसने हिंदुओं में चेतना पैदा की है। जिससे हिंदुत्व जीत रहा है और जाति हार रही है। यूपी के उपचुनाव और ताजा चुनाव परिणामों को यह भी माना जा रहा है कि लोकसभा चुनाव में भाजपा को हुए का नुकसान की भरपाई करते हुए जनता ने यह संदेश देने की भी कोशिश की है कि राष्ट्रहित में अब वे न बटेंगे न कटेंगे।
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उपचुनाव वाली सीटों के नतीजों पर गौर करें तो सभी सीटों पर बसपा और उसकी चुनौती बनकर उभर रही नगीना से सांसद चंद्रशेखर आजाद की आजाद समाज पार्टी मुख्य मुकाबले में नहीं रही है। अपवाद स्वरूप बसपा की कटेहरी सीट छोड़ दें तो दलित समाज के वोटों के आधार पर राजनीति करने वाले दोनों दलों के वोटों का आंकड़ा बताता है कि दलित मतदाताओं ने जाति के कार्ड की अनदेखी कर हिंदुत्व के एजेंडे पर मतदान किया है। अगर ऐसा न होता तो कुर्मी और मुस्लिम मतदाताओं से प्रभावित इस सीट पर भाजपा के जीतने की राह ही न निकलती।
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उपचुनाव वाली नौ सीटों में 2022 में भाजपा ने गाजियाबाद, खैर, फूलपुर सीट ही जीती थी जबकि मझवां सीट पार्टी की सहयोगी निषाद पार्टी के खाते में गई थी और मीरापुर सीट राष्ट्रीय लोकदल ने जीता था। कटेहरी, सीसामऊ, कुंदरकी और करहल सपा ने जीती थी। नतीजों के मुताबिक, इनमें भाजपा ने सहयोगियों सहित 2022 वाली अपनी सभी सीटों पर कब्जा बनाए रखते हुए अंबेडकरनगर की कटेहरी और मुरादाबाद की कुंदरकी सीट जीत सपा से छीन ली है देखा जाए तो ज्यादातर सीटों पर भाजपा की जीत का अंतर भी बढ़ा है। कटेहरी और कुंदरकी पर भाजपा की जीत बहुत कुछ कह रही है। जिसके आने वाले दिनों में दूरगामी प्रभाव दिखेंगे। इन सीटों पर भाजपा की जीत ने कई मिथक तोड़े हैं तथा तमाम आकलनों व अनुमानों को झुठलाते हुए नए समीकरणों की संभावनाओं का संकेत भी दिया है।