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Lucknow News: शोधार्थियों को पढ़ाया जाएगा शोध में एआई का जिम्मेदार इस्तेमाल

Mon, 21 Sep 2026 04:14 PM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Mon, 21 Sep 2026 04:14 PM IST
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first in house mooc ready for lucknow university

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लखनऊ। लखनऊ विश्वविद्यालय ने प्री-पीएचडी कोर्स वर्क कर रहे शोधार्थियों के लिए अपना पहला पूर्णतः इन-हाउस विकसित मैसिव ओपन ऑनलाइन कोर्स (एमओओसी) तैयार किया है। ‘एथिक्स फर्स्ट : एक्सीलेंस इन रिसर्च एंड रिस्पॉन्सिबल पब्लिशिंग’ नाम से तैयार यह पाठ्यक्रम आठ सप्ताह का होगा और शोधार्थियों को दो क्रेडिट दिए जाएंगे। इसमें शोध नैतिकता के साथ साहित्यिक चोरी (प्लेजरिज्म) से बचाव और एआई उपकरणों के जिम्मेदार इस्तेमाल की जानकारी दी जाएगी।
पाठ्यक्रम में कुल 16 मॉड्यूल होंगे। इसका उद्देश्य शोधार्थियों को शोध के शुरुआती चरण से ही अकादमिक ईमानदारी और शोध सत्यनिष्ठा के मानकों से परिचित कराना है। इसमें डेटा संग्रह, विश्लेषण और रिपोर्टिंग में नैतिक मानकों के पालन के साथ शोध पत्र और थीसिस लिखते समय अनजाने में होने वाली साहित्यिक चोरी से बचने के तकनीकी और व्यावहारिक उपाय बताए जाएंगे।
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जर्नल में प्रकाशन की प्रक्रिया भी समझेंगे
एमओओसी में उत्तरदायी प्रकाशन पर भी विशेष जोर दिया गया है। शोधार्थियों को यूजीसी-केयर, स्कोपस और वेब ऑफ साइंस जैसे प्रतिष्ठित शोध प्रकाशन मंचों से जुड़े मानकों और प्रकाशन की नैतिक प्रक्रिया की जानकारी दी जाएगी। साथ ही शोध में इस्तेमाल होने वाले आधुनिक एआई उपकरणों के वैध और जिम्मेदार उपयोग को भी पाठ्यक्रम का हिस्सा बनाया गया है।
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हिंदी-अंग्रेजी दोनों में होगी पढ़ाई
शोधार्थियों की सुविधा के लिए पाठ्यक्रम को हिंदी और अंग्रेजी दोनों माध्यमों में तैयार किया गया है। वीडियो व्याख्यान, अध्ययन सामग्री और क्विज भी दोनों भाषाओं में उपलब्ध होंगे। विश्वविद्यालय का कहना है कि इससे शोधार्थी अपनी सुविधा के अनुसार पाठ्यक्रम का अध्ययन कर सकेंगे।

आगे तैयार होंगे विषयवार एमओओसी
लखनऊ विश्वविद्यालय में विभिन्न विभागों के शिक्षक अपने-अपने विषयों पर भी एमओओसी विकसित कर रहे हैं। इन्हें आने वाले चरणों में लॉन्च किया जाएगा। इससे विश्वविद्यालय और संबद्ध महाविद्यालयों के विद्यार्थियों व शोधार्थियों के लिए विषय विशेषज्ञों द्वारा तैयार ऑनलाइन पाठ्यक्रमों की श्रृंखला विकसित होगी। विश्वविद्यालय प्रशासन इसे डिजिटल शिक्षा के विस्तार और शोध की गुणवत्ता बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मान रहा है।
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