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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Lucknow News ›   UP: Businessman's wife digitally arrested for 12 days, duped of Rs 90 lakh; police bust gang

UP: कारोबारी की पत्नी को 12 दिन तक किया डिजिटल अरेस्ट, 90 लाख रुपये ठगे; पुलिस ने गिरोह का पता लगाया

Tue, 17 Feb 2026 07:15 PM IST
आकाश द्विवेदी अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ
अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ Published by: आकाश द्विवेदी Updated Tue, 17 Feb 2026 07:15 PM IST
सार

लखनऊ में ट्रांसपोर्ट कारोबारी की पत्नी से 90 लाख की ठगी करने वाला डिजिटल अरेस्ट गिरोह कई राज्यों में सक्रिय निकला। आरोपियों ने बैंक खाते खुलवाकर तीन प्रतिशत कमीशन पर रकम मंगवाई। तमिलनाडु समेत अन्य राज्यों में शिकायतें दर्ज हैं। पुलिस ने आरोपियों को गिरफ्तार कर जांच तेज कर दी है।

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UP: Businessman's wife digitally arrested for 12 days, duped of Rs 90 lakh; police bust gang
डिजिटल अरेस्ट। - फोटो : अमर उजाला।

विस्तार

ट्रांसपोर्ट कारोबारी की पत्नी को 12 दिन तक डिजिटल अरेस्ट रख 90 लाख रुपये ठगने वाला गिरोह कई राज्यों में सक्रिय था। इसने अलग-अलग लोगों को अपना निशाना बनाया था। तमिलनाडु सहित कई राज्यों में इस गिरोह के खिलाफ शिकायतें दर्ज हैं। इसकी जानकारी राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल से लखनऊ पुलिस को मिली है।

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डीसीपी क्राइम कमलेश दीक्षित के अनुसार, आरोपी मयंक श्रीवास्तव ने बताया कि आर्थिक तंगी के कारण उसने इरशाद से संपर्क किया था। इरशाद ने उसे चालू बैंक खाता उपलब्ध कराने पर कमीशन का लालच दिया। इसके बाद 7 फरवरी को उसे दिल्ली बुलाकर होटलों में ठहराया गया। 
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वहां उसकी मुलाकात इरशाद, आकाश उर्फ मनीष और जीतू उर्फ जीतेंद्र से हुई। आरोपियों ने उसके मोबाइल का पासवर्ड लेकर करोड़ों का साइबर फ्रॉड किया। इसके बदले उसे 10 हजार रुपये दिए और दो लाख रुपये देने का वादा किया। आरोपियों ने मयंक के नाम से आईसीआईसीआई और एचडीएफसी बैंक में खाता खुलवाया था। बैंक की चेकबुक और डेबिट कार्ड अपने कब्जे में ले लिए।
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आरोपी इरशाद ने बताया कि वह तीन प्रतिशत कमीशन पर आकाश उर्फ मनीष और जीतू उर्फ जीतेंद्र के लिए काम करता है। वह खाताधारकों को धन का लालच देकर उनके बैंक खाते, चेकबुक और डेबिट कार्ड ले लेता था। वह व्हाट्सएप कॉल के माध्यम से गिरोह के अन्य जालसाजों से जुड़ा रहता था। आकाश उर्फ मनीष भी जीतू उर्फ जीतेंद्र के लिए काम करता था और उसे भी साइबर फ्रॉड से मिली रकम का तीन फीसदी कमीशन मिलता था।

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