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यूपी:अफसरों की लापरवाही से खजाने में ही पड़ा रह गया बजट, नहीं शुरू हुआ शबरी संकल्प अभियान

Tue, 18 Feb 2020 10:51 AM IST
शाहरुख खान सुधीर कुमार सिंह, अमर उजाला, लखनऊ
सुधीर कुमार सिंह, अमर उजाला, लखनऊ Published by: शाहरुख खान Updated Tue, 18 Feb 2020 10:51 AM IST
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up budget 2020 left in the treasury due to the negligence of officers
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ - फोटो : amar ujala
प्रदेश में कुपोषण को खत्म करने को लेकर सरकार के स्तर से करोड़ों रुपये का बजट स्वीकृत होने के बाद भी अधिकारी कुंडली मारे रहे। नतीजा यह हुआ कि स्मार्ट फोन, आधार किट, जीएमडी, प्री स्कूल किट की खरीद नहीं हो सकी और बजट खजाने में ही पड़ा रह गया। 
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केंद्र और राज्य सरकार की सहभागिता से कुपोषण दूर करने के लिए बाल विकास सेवा एवं पुष्टाहार (आईसीडीएस) और राष्ट्रीय पोषण मिशन निदेशालय के माध्यम से कई कार्यक्रमों का संचालन किया जा रहा है। इसके लिए हर वित्तीय वर्ष में सरकार के स्तर से बजट का भी प्रावधान होता रहा है। 
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लेकिन बीते दो वित्तीय वर्ष से इन कार्यक्रमों के लिए स्वीकृत बजट को शासन में बैठे अधिकारियों ने खर्च करने की अनुमति ही नहीं दी। नतीजा यह हुआ कि कार्यक्रमों के क्रियान्वयन के लिए उपकरण और संसाधनों की खरीद नहीं हो सकी और बजट खाते में पड़ा रहा।
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शबरी संकल्प अभियान शुरू ही नहीं हुआ
मार्च 2017 में प्रदेश की सत्ता संभालते ही मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अति कुपोषित बच्चों की सेहत सुधारने के लिए इस अभियान की घोषणा की थी। अभियान को सरकार ने अतिमहत्वाकांक्षी श्रेणी में रखते हुए पहली कैबिनेट में ही 200 करोड़ रुपये का बजट मंजूर किया था। लेकिन शासन में बैठे अधिकारियों ने अभियान शुरू करने की अनुमति ही नहीं दी। लिहाजा बीते तीन साल से सरकार की यह घोषणा फाइलों में दबी है और स्वीकृत बजट भी बाल विकास सेवा एवं पुष्टाहार विभाग के खाते में पड़ा है। 

नहीं हो सकी प्री स्कूल किट की खरीद
समेकित बाल विकास परियोजना के तहत आंगनबाड़ी केंद्रों पर आने वाले 3 से 6 साल की उम्र तक के बच्चों को वहीं पर प्रारंभिक शिक्षा देने के लिए प्री स्कूल किट खरीदे जाने थे। इसके लिए भी सरकार ने वित्तीय वर्ष 2019-10 में 93 करोड़ रुपये मंजूर किए गए थे। लेकिन अब तक एक भी जिले में प्री स्कूल किट नहीं खरीदा जा सका है। पैसा भी खाते में पड़ा है। इसी तरह राष्ट्रीय पोषण मिशन के तहत विभिन्न उपकरण खरीदने के लिए सरकार ने 335 करोड़ 21 लाख रुपये स्वीकृत किए हैं, लेकिन इसमें से एक भी पैसा अब तक खर्च नहीं हुआ। 

खरीद से संबंधित प्रस्ताव कई बार तैयार किए गए, लेकिन शासन से अनुमति नहीं मिल पाने से उपकरणों की खरीददारी नहीं हो सकी है। आधार किट खरीदने के लिए तीन बार प्रस्ताव भेजे गए थे। अब फिर से टेंडर किए गए हैं। प्रस्ताव शासन को भेजा गया है। मंजूरी मिलने के बाद जल्द ही आधार किट खरीदी जाएगी।
- शत्रुघ्न सिंह, निदेशक बाल विकास सेवा एवं पुष्टाहार
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