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यूपी बोर्ड मेरिट : अनुदानित, राजकीय विद्यालय इस बार भी खाली हाथ
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लखनऊ। यूपी बोर्ड परीक्षा परिणाम में निजी स्कूलों के विद्यार्थी इस बार भी छाए रहे। हाईस्कूल और इंटरमीडिएट की जनपद स्तर की टॉप-10 सूची में 20-20 विद्यार्थियों ने स्थान बनाया। बीते कई वर्षों की तरह इस बार भी मेरिट में राजकीय और अनुदानित विद्यालय का एक भी बच्चा नहीं है। ऐसे में इन विद्यालयों के शिक्षकों पर भी सवाल उठते हैं।
राजधानी में 55 राजकीय, 98 अनुदानित और करीब 650 निजी विद्यालय हैं। राजकीय और अनुदानित कॉलेजों में काबिल और अनुभवी शिक्षक हैं। निजी स्कूलों के मुकाबले इन्हें काफी मोटा वेतन भी मिलता है। इसके बावजूद यूपी बोर्ड की परीक्षा में इन विद्यालयों का प्रदर्शन खराब रहा है।जनपद स्तरीय मेरिट में शामिल 40 मेधावी 18 निजी स्कूलों के हैं। कई स्कूल संसाधन विहीन हैं जबकि काफी स्कूल शहर से दूर ग्रामीण क्षेत्र के भी हैं।
डीआईओएस राकेश कुमार के मुताबिक मेरिट में स्थान बनाने वाले बच्चों और उनके परिजनों को बहुत-बहुत बधाई। जनपद स्तर की मेरिट में राजकीय, अनुदानित विद्यालयों के खराब प्रदर्शन का सिलसिला इस बार भी जारी रहा। यहां के शिक्षकों को आत्ममंथन करना चाहिए। सरकार की ओर से अच्छा वेतन और सुविधाएं दी जा रहीं हैं। ऐसे में परिणाम भी बेहतर होना चाहिए।
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राजधानी में 55 राजकीय, 98 अनुदानित और करीब 650 निजी विद्यालय हैं। राजकीय और अनुदानित कॉलेजों में काबिल और अनुभवी शिक्षक हैं। निजी स्कूलों के मुकाबले इन्हें काफी मोटा वेतन भी मिलता है। इसके बावजूद यूपी बोर्ड की परीक्षा में इन विद्यालयों का प्रदर्शन खराब रहा है।जनपद स्तरीय मेरिट में शामिल 40 मेधावी 18 निजी स्कूलों के हैं। कई स्कूल संसाधन विहीन हैं जबकि काफी स्कूल शहर से दूर ग्रामीण क्षेत्र के भी हैं।
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डीआईओएस राकेश कुमार के मुताबिक मेरिट में स्थान बनाने वाले बच्चों और उनके परिजनों को बहुत-बहुत बधाई। जनपद स्तर की मेरिट में राजकीय, अनुदानित विद्यालयों के खराब प्रदर्शन का सिलसिला इस बार भी जारी रहा। यहां के शिक्षकों को आत्ममंथन करना चाहिए। सरकार की ओर से अच्छा वेतन और सुविधाएं दी जा रहीं हैं। ऐसे में परिणाम भी बेहतर होना चाहिए।
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