फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Lucknow News ›   UP: Banke Bihari Temple Trust Bill introduced in the House, the trust will have rights over movable and immova

यूपी: बांके बिहारी मंदिर न्यास विधेयक सदन में पेश, चल-अचल संपत्तियों पर होगा ट्रस्ट का अधिकार; होंगे ये बदलाव

Wed, 13 Aug 2025 10:48 PM IST
रोहित मिश्र अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ
अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ Published by: रोहित मिश्र Updated Wed, 13 Aug 2025 10:48 PM IST
सार

Shri Banke Bihari Temple Bill: विधानमंडल के दोनों सदनों में बुधवार को उत्तर प्रदेश श्री बांके बिहारी जी मंदिर न्यास विधेयक को पेश किया गया। उम्मीद है कि यह विधेयक गुरुवार को पास हो जाए। 

विज्ञापन
UP: Banke Bihari Temple Trust Bill introduced in the House, the trust will have rights over movable and immova
श्री बांके बिहारी मंदिर विधेयक। - फोटो : अमर उजाला।

विस्तार

विधानमंडल के दोनों सदनों में बुधवार को उत्तर प्रदेश श्री बांके बिहारी जी मंदिर न्यास विधेयक को पेश किया गया। न्यास गठन के बाद वृंदावन स्थित मंदिर में आने वाले श्रद्धालुओं को विश्वस्तरीय सुख-सुविधाएं उपलब्ध कराने का लक्ष्य रखा गया है। इसमें कहा गया है कि मंदिर के चढ़ावे, दान और सभी चल-अचल संपत्तियों पर न्यास (ट्रस्ट) का अधिकार होगा। संपत्तियों में मंदिर में स्थापित मूर्तियां, मंदिर परिसर और उसकी सीमा के भीतर देवताओं के लिए दी गई भेंट या उपहार, किसी भी पूजा, सेवा, कर्मकांड, समारोह व धार्मिक अनुष्ठान के लिए दी गई संपत्ति, नकद या वस्तु के रूप में अर्पण, मंदिर परिसर के उपयोग के लिए डाक-तार से भेजे गए बैंक ड्राफ्ट और चेक भी शामिल होंगे।
विज्ञापन


मंदिर की संपत्तियों में आभूषण, अनुदान, योगदान, हुंडी संग्रह समेत श्री बांके बिहारी जी मंदिर की सभी चल एवं अचल संपत्तियां शामिल मानी जाएंगी। विधेयक में कहा गया है कि न्यास का गठन स्वामी हरिदास की परंपरा को आगे बढ़ाने के लिए किया गया है। स्वामी हरिदास के समय से चले आ रहे रीति-रिवाज, त्योहार, समारोह और अनुष्ठान बिना किसी हस्तक्षेप या परिवर्तन के जारी रहेंगे। न्यास ही दर्शन का समय तय करेगा, पुजारियों की नियुक्ति करेगा। उनके वेतन, भत्ते या प्रतिकर निर्धारित करेगा। साथ ही भक्तों और आगंतुकों की सुरक्षा तथा मंदिर के प्रभावी प्रशासन और प्रबंधन की जिम्मेदारी भी न्यास पर होगी।
विज्ञापन


ये सुविधाएं होंगी विकसित
प्रसाद वितरण, वरिष्ठ नागरिकों और दिव्यांगों के लिए अलग दर्शन मार्ग, पेयजल, विश्राम के लिए बेंच, पहुंच एवं कतार प्रबंधन कियोस्क, गोशालाएं, अन्नक्षेत्र, रसोईघर, होटल, सराय, प्रदर्शनी कक्ष, भोजनालय और प्रतीक्षालय जैसी व्यवस्थाएं विकसित की जाएंगी।
विज्ञापन
विज्ञापन

 

यह होगी ट्रस्ट की संरचना, कुल होंगे 18 सदस्य

न्यास में 11 मनोनीत और 7 पदेन सदस्य होंगे। मनोनीत सदस्यों में वैष्णव परंपराओं, संप्रदायों व पीठों से 3 प्रतिष्ठित सदस्य होंगे। इनमें साधु-संत, मुनि, गुरु, विद्वान, मठाधीश, महंत, आचार्य और स्वामी शामिल हो सकते हैं। सनातन धर्म की परंपराओं, संप्रदायों व पीठों से 3 सदस्य, सनातन धर्म की किसी भी शाखा या संप्रदाय से 3 सदस्य होंगे। ये प्रतिष्ठित व्यक्ति, शिक्षाविद, विद्वान, उद्यमी, वृत्तिक व समाजसेवी होंगे। गोस्वामी परंपरा से 2 सदस्य होंगे। इनमें स्वामी हरिदासजी के वंशज के राज-भोग सेवादारों और शयन-भोग सेवादारों का एक-एक प्रतिनिधि होगा। इनका कार्यकाल 3 वर्ष का होगा।

पदेन सदस्य में मथुरा के जिला मजिस्ट्रेट, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक, नगर निगम आयुक्त, उत्तर प्रदेश ब्रज तीर्थ क्षेत्र विकास परिषद के सीईओ, बांके बिहारी मंदिर ट्रस्ट के सीईओ और राज्य सरकार का नामित प्रतिनिधि शामिल होंगे। यदि कोई पदेन सदस्य सनातन धर्म को नहीं मानने वाला या गैर-हिंदू हुआ, तो उसकी जगह उससे कनिष्ठ अधिकारी को नामित किया जाएगा।

हर तीन महीने में होगी ट्रस्ट की बैठक, 20 लाख तक की संपत्ति खरीदने का अधिकार

न्यास की बैठक हर तीन महीने में अनिवार्य होगी। बैठक के आयोजन से 15 दिन पहले नोटिस देना होगा। बोर्ड या सदस्य सद्भावनापूर्वक किए गए कार्यों के लिए उत्तरदायी नहीं ठहराए जाएंगे। न्यास को 20 लाख रुपये तक की चल व अचल संपत्ति स्वयं खरीदने का अधिकार होगा। इससे अधिक के लिए सरकार की स्वीकृति आवश्यक होगी। मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) एडीएम स्तर के अधिकारी होंगे। यह विधेयक मंदिर की धार्मिक परंपरा की रक्षा करते हुए प्रशासन को संस्थागत बनाता है और श्रद्धालुओं को अच्छे अनुभव देने का रोडमैप प्रस्तुत करता है।

क्या है न्यास का उद्देश्य

न्यास गठन का उद्देश्य मंदिर की संपत्तियों को अपने अधीन करना नहीं है, बल्कि यह सुनिश्चित करना है कि व्यय जवाबदेह तरीके से किया जाए। न्यास की स्थापना का उद्देश्य राज्य सरकार द्वारा मंदिर की धार्मिक एवं सांस्कृतिक परंपराओं में हस्तक्षेप करना नहीं है। सरकार किसी भी धार्मिक पहलू में हस्तक्षेप नहीं करेगी।

हाईकोर्ट के फैसले के बाद हो सकेगा न्यास का गठन

शासन के उच्चपदस्थ सूत्रों के मुताबिक, दोनों सदनों में उत्तर प्रदेश श्री बांके बिहारी जी मंदिर न्यास विधेयक पास होने के बाद भी इसके तहत ट्रस्ट का गठन नहीं हो सकेगा। ट्रस्ट के गठन के बाबत कोई भी निर्णय इलाहाबाद हाईकोर्ट का फैसला आने के बाद ही हो सकेगा।

यहां बता दें कि सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में वृंदावन स्थित बांके बिहारी मंदिर के रोजमर्रा के कामकाज और पर्यवेक्षण के लिए इलाहाबाद हाईकोर्ट के पूर्व जज जस्टिस अशोक कुमार की अध्यक्षता एक उच्चाधिकार प्राप्त समिति का गठन किया। यह समिति तब तक मंदिर प्रबंधन का कामकाज देखेगी, जब तक यूपी सरकार के अध्यादेश मुद्दे पर इलाहाबाद हाईकोर्ट अपना फैसला नहीं सुना देता।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed