{"_id":"622d34fc79338f25997af091","slug":"up-assembly-election-results-region-wise-review-begins-in-bjp-on-results","type":"story","status":"publish","title_hn":"UP Assembly Election Results : नतीजों पर भाजपा में क्षेत्रवार समीक्षा शुरू, प्रभारियों से रिपोर्ट तलब","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
UP Assembly Election Results : नतीजों पर भाजपा में क्षेत्रवार समीक्षा शुरू, प्रभारियों से रिपोर्ट तलब
Sun, 13 Mar 2022 05:34 AM IST
दुष्यंत शर्मा
सचिन मुद्गल, लखनऊ
सचिन मुद्गल, लखनऊ
Published by: दुष्यंत शर्मा
Updated Sun, 13 Mar 2022 05:34 AM IST
सार
लेकिन चुनाव में भाजपा की संगठनात्मक कमजोरी से पश्चिम, काशी और गोरखपुर क्षेत्र में पार्टी का प्रदर्शन 2017 के मुकाबले फीका रहा। पार्टी ने क्षेत्रवार हारी हुई सीटों पर हार के कारणों पर मंथन शुरू किया है। क्षेत्रीय अध्यक्ष और प्रभारियों से चुनाव को लेकर रिपोर्ट मांगी गई है। 2017 में भाजपा गठबंधन ने 325 सीटों पर जीत दर्ज की थी जबकि 2022 में 273 सीटें मिली हैं। 2017 में भाजपा को 312 सीटें मिलीं थीं, इस बार 255 सीटें मिली हैं।
विज्ञापन
जीत के बाद भाजपा मुख्यालय में जश्न मनाते मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ व अन्य।
- फोटो : amar ujala
विस्तार
विधानसभा चुनाव में भाजपा गठबंधन की 273 सीटों के साथ सरकार बनने जा रही है। लेकिन चुनाव में भाजपा की संगठनात्मक कमजोरी से पश्चिम, काशी और गोरखपुर क्षेत्र में पार्टी का प्रदर्शन 2017 के मुकाबले फीका रहा। पार्टी ने क्षेत्रवार हारी हुई सीटों पर हार के कारणों पर मंथन शुरू किया है। क्षेत्रीय अध्यक्ष और प्रभारियों से चुनाव को लेकर रिपोर्ट मांगी गई है। 2017 में भाजपा गठबंधन ने 325 सीटों पर जीत दर्ज की थी जबकि 2022 में 273 सीटें मिली हैं। 2017 में भाजपा को 312 सीटें मिलीं थीं, इस बार 255 सीटें मिली हैं।
विज्ञापन
भाजपा ने 2017 में पश्चिम क्षेत्र की 71 सीटों में से 52 सीटों पर जीत दर्ज की थी, जबकि इस बार 40 सीटें मिली हैं। पश्चिम में भाजपा ने महामंत्री जेपीएस राठौर को प्रभारी नियुक्त किया था। राठौर के पास चुनाव प्रबंधन की कमान भी थी। शामली में भाजपा को एक भी सीट नहीं मिली, जबकि मुरादाबाद में केवल एक सीट से संतोष करना पड़ा। प्रतिष्ठापूर्ण थानाभवन सीट से कैबिनेट मंत्री सुरेश राणा, सरधना से फायर ब्रैंड नेता संगीत सोम और सहारनपुर से नरेश सैनी जैसे दिग्गज चुनाव हार गए।
विज्ञापन
यहां यह बताना जरूरी है कि भाजपा ने विधानसभा चुनाव में 403 में से 376 सीटों पर चुनाव लड़ा था। पार्टी ने तमाम विरोध और दबाव के बावजूद तीन मंत्रियों सहित 80 विधायकों के टिकट काटे। जबकि तीन मंत्री सहित 14 विधायक चुनाव से पहले भाजपा छोड़कर सपा में शामिल हो गए। इसके चलते इन सीटों पर भी नए चेहरों को मौका दिया। भाजपा ने चुनाव में 104 नए चेहरों को मौका दिया था इनमें से 80 ने चुनाव जीतकर पहली बार विधानसभा जाएंगे।
विज्ञापन
भाजपा ने 45 मंत्रियों सहित 214 विधायकों को दोबारा टिकट दिया था। इनमें से 170 विधायक (80 प्रतिशत) विधायक चुनाव जीत गए। जबकि 8 मंत्रियों सहित 44 विधायकों को जनता ने पसंद नहीं किया। जानकारों का मानना है कि विधानसभा चुनाव से पहले ही जिस तरह विधायकों के खिलाफ कार्यकर्ताओं और जनता की नाराजगी थी उसके बाद भी यदि 104 नए चेहरों को मौका नहीं दिया जाता तो पार्टी को नुकसान हो सकता था।