यूपी: खराब बिजली व्यवस्था और कटौती को संभाल नहीं पाए आशीष गोयल, ऊर्जा मंत्री से भी लगातार रहा है टकराव
IAS transferred in UP:ऊर्जा मंत्री ए.के. शर्मा कई बार डॉ. आशीष गोयल के खिलाफ मुखर रहे और उन पर भ्रष्टाचार को बढ़ावा देने तक के आरोप लगाए, लेकिन डॉ. गोयल अपने पद पर बने रहे।
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प्रदेश सरकार ने रविवार को उच्चस्तर पर बड़ा प्रशासनिक फेरबदल किया है। ग्रामीण क्षेत्रों में खराब बिजली आपूर्ति पर डॉ. आशीष गोयल और मेडिकल कॉलेजों को लेकर उपजे विवाद की गाज अमित कुमार घोष पर गिरी है। डॉ. आशीष कुमार गोयल को अपेक्षाकृत कम महत्व का माने जाने वाले श्रम एवं सेवायोजन विभाग में भेजा गया है। वह अपर मुख्य सचिव ऊर्जा एवं अतिरिक्त ऊर्जा, अध्यक्ष यूपी पॉवर कॉर्पोरेशन ट्रांसमिशन कॉर्पोरेशन लिमिटेड, अध्यक्ष राज्य विद्युत उत्पादन निगम लिमिटेड, अध्यक्ष यूपीएसएलडीसी लिमिटेड और अपर स्थानिक आयुक्त नई दिल्ली थे।
शासन स्तर के 10 वरिष्ठ आईएएस अफसरों की जिम्मेदारियों में बदलाव करते हुए इसी साल दिसंबर में सेवानिवृत्त हो रहे घोष को अपर मुख्य सचिव चिकित्सा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण व चिकित्सा शिक्षा से हटाकर उच्च शिक्षा विभाग भेजा गया है।अमृत अभिजात को अपर मुख्य सचिव पर्यटन, संस्कृति एवं धमार्थ कार्य के साथ अपर मुख्य सचिव परिवहन का अतिरिक्त प्रभार दिया गया है। अभी यह दायित्व अर्चना अग्रवाल के पास था। वह इसी माह सेवानिवृत्त हो रही हैं। वी हेकाली झिमोमी प्रमुख सचिव वन एवं पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन से प्रमुख सचिव स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण व प्रमुख सचिव चिकित्सा शिक्षा बनाई गई हैं। महेंद्र प्रसाद अग्रवाल प्रमुख सचिव उच्च शिक्षा से प्रमुख सचिव वन एवं पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन, अनिल कुमार प्रमुख सचिव पंचायती राज से प्रमुख सचिव खाद्य एवं रसद, उपभोक्ता मामले और आयुक्त खाद्य एवं रसद बनाए गए हैं। अनिल कुमार की अपने मंत्री ओम प्रकाश राजभर से नहीं पट रही थी। और उन्होंने खुद भी इस विभाग से हटने की इच्छा जताई थी।
बिजली आपूर्ति की खस्ताहाल व्यवस्था और अभियंताओं की लामबंदी ने पावर कॉरपोरेशन के अध्यक्ष डॉ. आशीष गोयल की मुश्किलें बढ़ा दीं। लगातार मिल रही शिकायतों के कारण उन्हें ऊर्जा विभाग के अपर मुख्य सचिव और पावर कॉरपोरेशन के अध्यक्ष पद से हटा दिया गया है।
इससे पहले भी ऊर्जा मंत्री ए.के. शर्मा कई बार डॉ. आशीष गोयल के खिलाफ मुखर रहे और उन पर भ्रष्टाचार को बढ़ावा देने तक के आरोप लगाए, लेकिन डॉ. गोयल अपने पद पर बने रहे। मंत्री की बार-बार शिकायतों और चेतावनियों के बावजूद वे न केवल पावर कॉरपोरेशन के अध्यक्ष पद पर डटे रहे, बल्कि उन्हें ऊर्जा विभाग के अपर मुख्य सचिव की अतिरिक्त जिम्मेदारी भी दे दी गई।
हाल ही में कई कर्मचारियों का स्थानांतरण (तबादला) करने के बाद उन्हें गुपचुप तरीके से मनचाही जगहों पर समायोजित कर दिया गया, जिसकी शिकायत मुख्यमंत्री कार्यालय तक पहुंची। इसी बीच विभाग में दलित एवं पिछड़े वर्ग के अभियंताओं के उत्पीड़न का मुद्दा गरमा गया। अभियंताओं ने उत्पीड़न से जुड़े 20 मामलों की एक विस्तृत रिपोर्ट तैयार कर मुख्यमंत्री को भेजी और उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य को भी ज्ञापन सौंपा। इसके साथ ही, लगभग 8 लाख कर्मचारियों का प्रतिनिधित्व करने वाली 'आरक्षण बचाओ संघर्ष समिति' ने भी इस मुद्दे पर मोर्चा खोल दिया और मुख्यमंत्री, ऊर्जा मंत्री तथा पार्टी पदाधिकारियों को ज्ञापन सौंपे।
इसी दौरान प्रदेश की बिजली आपूर्ति व्यवस्था भी चरमरा गई और एक साथ 13 उत्पादन इकाइयां ठप हो गईं। चरमराती बिजली आपूर्ति और चौतरफा विरोध के बीच रविवार को जारी स्थानांतरण सूची में डॉ. आशीष गोयल को ऊर्जा विभाग से हटाकर श्रम विभाग में भेज दिया गया। अब ऊर्जा विभाग की कमान रणवीर प्रसाद को सौंपी गई है, जो इससे पहले भी पावर जनरेशन कॉरपोरेशन (विद्युत उत्पादन निगम) में प्रबंध निदेशक के रूप में सेवाएं दे चुके हैं।