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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Lucknow News ›   UP: Applications for IndiGo refunds have begun, with bonus coupons included; apply here.

यूपी: इंडिगो से रिफंड पाने के लिए शुरू हुए आवेदन, साथ में ही मिलेगा बोनस कूपन भी; ऐसे करें अप्लाई

Sat, 13 Dec 2025 09:55 AM IST
रोहित मिश्र अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ
अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ Published by: रोहित मिश्र Updated Sat, 13 Dec 2025 09:55 AM IST
सार

 Refund from Indigo: बीते दिनों इंडिगो में आए संकट की वजह से कई हजार यात्रियों के विमान रद्द हुए। अब विमान कंपनी उनको रिफंड देने की प्रक्रिया में है। 

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UP: Applications for IndiGo refunds have begun, with bonus coupons included; apply here.
इंडिगो विमान में रिफंड। - फोटो : अमर उजाला।

विस्तार

 बीते दिनों इंडिगो के निरस्त हुए विमानों के लिए टिकट रिफंड की प्रक्रिया शुक्रवार से शुरू हो गई है। रिफंड के साथ यात्रियों को बोनस कूपन भी दिया जाएगा। यात्री www.goindigo.in पर आवेदन कर सकते हैं। इसमें पीएनआर व लास्ट नेम डालना होगा। इसके बाद रिफंड की स्थित यात्री इसी वेबसाइट पर जांच सकते हैं। इसके अतिरिक्त 0124-6173838 व 0124-4973838 हेल्पलाइन नंबर व सोशल मीडिया एक्स पर इंडिगो के एकाउंट पर @Indigo6E पर भी संपर्क कर सकते हैं। यात्री ट्रेवेल एजेंटों की मदद से भी रिफंड के लिए आवेदन कर सकते हैं।

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इंडिगो ने 900 करोड़ रुपये सीमा शुल्क की वापसी के लिए दिल्ली हाईकोर्ट का रुख किया

 इंडिगो एयरलाइन का संचालन करने वाली कंपनी इंटरग्लोब एविएशन ने शुक्रवार को दिल्ली हाईकोर्ट में याचिका दायर कर विदेशों में मरम्मत के बाद भारत में पुनः आयात किए गए विमान इंजनों और पुर्जों पर चुकाए गए 900 करोड़ रुपये से अधिक के सीमा शुल्क की वापसी की मांग की। यह याचिका जस्टिस प्रतिभा एम सिंह और जस्टिस शैल जैन की पीठ के समक्ष सुनवाई के लिए आई। हालांकि, जस्टिस जैन ने मामले की सुनवाई से खुद को अलग कर लिया क्योंकि उनका बेटा इंडिगो में पायलट है।

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दूसरी पीठ करेगी सुनवाई

इंडिगो ने अपनी याचिका में तर्क दिया कि इस तरह के पुनः आयात पर सीमा शुल्क लगाना असांविधानिक है और एक ही लेन-देन पर दोहरे कराधान के बराबर है। कंपनी के वकील ने बताया कि मरम्मत के बाद विमान इंजनों और पुर्जों के पुनः आयात के समय, उसने बिना किसी विवाद के मूल सीमा शुल्क का भुगतान किया था। कंपनी ने कहा, इसके अलावा, चूंकि मरम्मत एक सेवा के अंतर्गत आती है, इसलिए इस पर रिवर्स चार्ज के आधार पर वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) का भुगतान भी हो गया था। 

वकील ने बताया कि सीमा शुल्क अधिकारियों ने उसी लेन-देन को माल के आयात के रूप में मानकर दोबारा सीमा शुल्क लगाने पर जोर दिया। एयरलाइन ने दावा किया कि यह मामला पहले ही सीमा शुल्क न्यायाधिकरण की ओर से सुलझाया जा चुका है, जिसने यह फैसला सुनाया था कि मरम्मत के बाद पुनः आयात पर दोबारा सीमा शुल्क नहीं लगाया जा सकता। एयरलाइन ने कहा कि छूट अधिसूचना में बाद में संशोधन किया गया था, लेकिन न्यायाधिकरण ने फैसला सुनाया कि यह संशोधन केवल भविष्य में लागू होगा।एयरलाइन ने कहा कि उसने 4,000 से अधिक बिल ऑफ एंट्री के लिए 900 करोड़ रुपये से अधिक का शुल्क विरोध जताते हुए अदा किया।

 
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