यूपी: सपा एमएलसी के हाथों गिरी आंबेडकर की फोटो, दोनों सदनों में छाया रहा आंबेडकर का मुद्दा, नहीं हुआ प्रश्नकाल
Uproar in UP Assembly: संसद में गृहमंत्री अमित शाह के कथित बयान का असर यूपी विधानसभा में छाय रहा। दोनों ही सदनों में इस पर जमकर हंगामा हुआ।
विस्तार
संसद में गृहमंत्री अमित शाह के कथित बयान के विरोध में बृहस्पतिवार को विधान परिषद में विपक्षी सदस्य बाबा साहब भीम राव आंबेडकर का पोस्टर लेकर सदन में पहुंचे। इस पर सभापति कुंवर मानवेन्द्र सिंह ने सदन में पोस्टर लाने पर आपत्ति जताई। तभी मेज पर रखने के दौरान सपा सदस्य डॉ. मान सिंह यादव के हाथों से बाबा साहब का पोस्टर छूट कर गिर गया। इस पर भाजपा सदस्यों ने हंगामा कर दिया। विपक्ष ने भी नारेबाजी शुरु कर दी। भाजपा सदस्य सुरेन्द्र चौधरी ने कहा कि बाबा साहब हमारे लिए भी भगवान समान हैं, लेकिन पोस्टर लेकर उनका अपमान न करें। नेता प्रतिपक्ष लाल बिहारी यादव ने कहा कि आपके पास सदन में बाबा साहब की फोटो लगाने के लिए पैसा नहीं है। इस पर सभापति ने गंभीर नाराजगी जताते हुए कहा कि बोलने से पहले सोच लेना चाहिए।
आंबेडकर के अपमान के मुद्दे पर सपा का सदन में जोरदार हंगामा
विधानसभा में भी बाबा साहेब डॉ. भीमराव आंबेडकर के अपमान के मुद्दे पर सपा ने बृहस्पतिवार को सदन में जोरदार हंगामा किया।शीतकालीन सत्र के चौथे दिन सदन की कार्यवाही हंगामे की भेंट चढ़ गई। हालांकि, विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना ने भारी हंगामे और शोर-शराबे की बीच सभी विधायी कार्य निपटाने के बाद सदन की कार्यवाही को अनिश्चित काल के लिए स्थगित कर दिया।
सदन की कार्यवाही शुरू होते ही सपा सदस्य डॉ. आंबेडकर की फोटो हाथ में लेकर वेल में आकर नारेबाजी करने लगे। विधानसभा अध्यक्ष ने उनसे बार-बार अपनी सीट पर जाने की अपील की, लेकिन वे नहीं माने। सपा सदस्यों की नारेबाजी से प्रश्नकाल भी नहीं हो पाया। हालांकि, विधानसभा अध्यक्ष प्रश्न लगाने वाले सपा विधायकों से अपने सवाल पूछने का अनुरोध करते रहे। बृहस्पतिवार को करीब एक घंटे तक चली सदन की कार्यवाही के दौरान जय भीम, बाबा साहब का मिशन अधूरा-अखिलेश यादव करेंगे पूरा, बाबा साहब का अपमान-नहीं सहेगा हिंदुस्तान जैसे नारे गूंजते रहे।
संसदीय कार्य मंत्री सुरेश खन्ना ने कहा कि सपा के पास हल्ला मचाने के अलावा कोई काम नहीं है। डॉ. आंबेडकर का सबसे ज्यादा सम्मान भाजपा और एनडीए ने किया है। उनसे जुड़े सभी महत्वपूर्ण स्थलों को चिह्नित कर पीएम मोदी ने पंचतीर्थ की स्थापना की। डॉ. आंबेडकर के संविधान के मुताबिक ही पीएम मोदी और सीएम योगी की प्राथमिकताएं और कार्यशैली रहती है। इन लोगों ने तो संविधान की प्रस्तावना को ही बदल दिया था, जो नामुमकिन था। ये लोग सदन को चलने नहीं देना चाहते हैं।
राजनीतिक फायदे के लिए कर रहे बाबा साहब के नाम का इस्तेमाल : महाना
सदन में जारी प्रदर्शन के दौरान विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना लगातार सपा सदस्यों से अपनी सीट पर जाने की अपील करते रहे। इसे अनसुना करने पर उन्होंने कहा कि आप बाबा साहब के नाम का इस्तेमाल अपने राजनीतिक फायदे के लिए कर रहे हैं। उनकी फोटो लेकर इस तरह प्रदर्शन करना संविधान की भावना के विपरीत है। डॉ. आंबेडकर ने भी कहा था कि सदन में सिर्फ जनता से जुड़े मुद्दों पर चर्चा होनी चाहिए। आप लोग किसानों, नौजवानों, कानून-व्यवस्था आदि के बारे में सवाल करें। वहीं कुछ सपा सदस्यों के इस बीच सदन से बाहर जाने पर उन्होंने चुटकी लेते हुए बाकियों से कहा कि इस आचरण से व्यथित होकर आपके साथी बाहर चले गए हैं। कांग्रेस की आराधना मिश्रा मोना सवाल पूछना चाहती थीं, लेकिन शोरगुल से उनकी आवाज दब गई। इस पर महाना ने कहा कि नेता विपक्ष तो पूरे विपक्ष के नेता हैं। आप उनके पास जाकर यह हंगामा बंद कराने को बोलिए। आराधना ने इसका प्रयास भी किया, लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ।
नहीं हो सका प्रश्नकाल
विधानसभा अध्यक्ष प्रश्नकाल में सपा सदस्यों से सवाल पूछने का अनुरोध करते रहे। उन्होंने सवाल पूछने वाले सारे सदस्यों के नाम लिए, लेकिन कोई वेल से टस से मस नहीं हुआ। इसके बाद उन्होंने कहा कि यह मान लिया जाता है कि सपा सदस्य सरकार के जवाब से संतुष्ट हैं। इतना ही नहीं, सपा सदस्य नियम 56 के तहत कार्य स्थगन पर भी नहीं बोले, जबकि अध्यक्ष सभी को सुनने को तैयार थे। हंगामे से अनुपूरक बजट पर चर्चा भी नहीं हो सकी। इस बीच महाकुंभ की तैयारियों के बारे में पूर्व मंत्री सिद्धार्थनाथ सिंह ने सदन को अवगत कराया। इस पर चर्चा कराने की सपा के संग्राम सिंह यादव ने मांग की थी, लेकिन वे वेल में ही नारेबाजी करते रहे। सीएम योगी आदित्यनाथ को भी दोपहर तीन बजे सदन को संबोधित करना था, लेकिन इससे पहले ही सदन की कार्यवाही समाप्त हो गई।
तीन विधेयक हुए पारित
सदन में 17,865.72 करोड़ रुपये का द्वितीय अनुपूरक बजट सर्वसम्मति से पारित हो गया। उप्र राज्य क्रीड़ा विश्वविद्यालय (संशोधन) विधेयक 2024 और उप्र अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति आयोग (संशोधन) विधेयक भी पारित हुआ। संसदीय कार्य मंत्री ने सीएजी रिपोर्ट भी सदन के पटल पर रखने की औपचारिकता की और सदन को अनिश्चितकाल के लिए स्थगित करने का प्रस्ताव दिया।