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UP: बेलआउट पैकेज के बहाने यूपी में निजीकरण की साजिश का आरोप, हर हाल में रोकने की मांग की
Tue, 11 Nov 2025 03:25 PM IST
ishwar ashish
अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ
अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ
Published by: ishwar ashish
Updated Tue, 11 Nov 2025 03:25 PM IST
सार
केंद्र सरकार की ओर से आंध्र प्रदेश, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, राजस्थान, तमिलनाडु और उत्तर प्रदेश को विद्युत क्षेत्र के निजीकरण के लिए चिह्नित किया गया है। यहां 26 फीसदी निजीकरण होने पर केंद्र सरकार बेल आउट पैकेज देगी। ऐसे में बेलआउट पैकेज को लेकर सवाल उठ रहे हैं।
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- फोटो : amar ujala
विस्तार
राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा ने आरोप लगाया है कि निजीकरण प्रक्रिया में कदम बढ़ाने की वजह से उत्तर प्रदेश को बेलआउट पैकेज में छठवें राज्य के रूप में शामिल कराया गया है। जबकि उत्तर प्रदेश की वित्तीय स्थिति बेहतर है। उन्होंने प्रदेश सरकार से मांग की है कि निजीकरण की शर्त पर बेल आउट पैकेज न लिया जाए। बेहतर होगा कि निजीकरण प्रस्ताव रद्द किया जाए।
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केंद्र सरकार की ओर से आंध्र प्रदेश, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, राजस्थान, तमिलनाडु और उत्तर प्रदेश को विद्युत क्षेत्र के निजीकरण के लिए चिह्नित किया गया है। यहां 26 फीसदी निजीकरण होने पर केंद्र सरकार बेल आउट पैकेज देगी। ऐसे में राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा ने तय किए गए छह राज्यों का विवरण जारी किया। उन्होंने कहा कि जिन छह राज्यों को बेल आउट पैकेज में शामिल करने की बात हो रही है, उनमें उत्तर प्रदेश विभिन्न वित्तीय संस्थानों से लिए गए कुल ऋणों में सबसे नीचे है। इतना ही नहीं यहां वह ऋण भी सबसे कम है, जो राजस्व से चुकाया नहीं जा सकता है।
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ऐसे में प्रदेश की बिजली कंपनियों को निजी हाथों में सौंपने की आवश्यकता नहीं है। परिषद अध्यक्ष ने आरोप लगाया कि ऊर्जा प्रबंधन से जुड़े कुछ अधिकारी यहां पहले से ही निजीकरण की प्रक्रिया शुरू कर चुके थे। ऐसे में वे बेल आउट पैकेज में पांच के बजाय छठवां राज्य के रूप में उत्तर प्रदेश के शामिल करके अपनी वाहवाही लूटना चाहते हैं। जबकि इससे उपभोक्ताओं का नुकसान होगा और राज्य सरकार की छवि प्रभावित होगी। यदि न लौटाने वाले ऋण की तुलना कुल लिए गए ऋण के सापेक्ष की जाए तो उत्तर प्रदेश मात्र 11% पर है, जबकि राजस्थान 51%, तमिलनाडु 76%, आंध्र प्रदेश 49%, और महाराष्ट्र 13% पर हैं।
राज्यवार लिया गया कुल ऋण
- आंध्र प्रदेश 65,710 करोड़
- मध्य प्रदेश 50,844 करोड़
- महाराष्ट्र 84,170 करोड़
- राजस्थान 92,225 करोड़
- तमिलनाडु 1,73,520 करोड़
- उत्तर प्रदेश 67,936 करोड़
वह ऋण जो राजस्व से चुकाया नहीं जा सकता
- आंध्र प्रदेश 50,851 करोड़
- मध्य प्रदेश 35,211 करोड़
- महाराष्ट्र 39,605 करोड़
- राजस्थान 58,514 करोड़
- तमिलनाडु 1,37,979 करोड़
- उत्तर प्रदेश 29,212 करोड़