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यूपी: आप सांसद संजय सिंह बोले- बदायूं में पुलिस कस्टडी में दलित युवक की मौत प्रशासनिक हत्या
Sun, 30 Aug 2026 05:13 PM IST
Ishwar Ashish Bhartiya
अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ
अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ
Published by: Ishwar Ashish Bhartiya
Updated Sun, 30 Aug 2026 05:13 PM IST
सार
सांसद संजय सिंह ने कहा कि बदायूं के दातागंज थाने में दलित युवक राजेश कोरी की मौत ने यूपी पुलिस के खौफनाक चेहरे को उजागर कर दिया है। पुलिस द्वारा अपनी गलती छिपाने के लिए परिजनों का इस्तेमाल करना न्याय प्रक्रिया के साथ सबसे बड़ा मजाक है।
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आम आदमी पार्टी के सांसद संजय सिंह।
- फोटो : वीडियो ग्रैब
विस्तार
आम आदमी पार्टी के उत्तर प्रदेश प्रभारी और राज्यसभा सांसद संजय सिंह ने बदायूं के दातागंज थाने में दलित युवक राजेश कोरी की पुलिस कस्टडी में हुई मौत पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने इसे सामान्य मौत नहीं बल्कि 'प्रशासनिक हत्या' करार देते हुए कहा कि भाजपा सरकार में पुलिस अपराधियों जैसा व्यवहार कर रही है। संजय सिंह ने वायरल वीडियो का हवाला देते हुए आरोप लगाया कि पुलिस ने न केवल युवक को बेरहमी से पीटा, बल्कि अपनी खाल बचाने के लिए परिजनों पर दबाव बनाकर मामले को भटकाने का घिनौना प्रयास भी किया है।
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सांसद संजय सिंह ने कहा कि बदायूं के दातागंज थाने में दलित युवक राजेश कोरी की मौत ने यूपी पुलिस के खौफनाक चेहरे को उजागर कर दिया है। परिजनों का आरोप है कि पुलिस की बर्बर पिटाई के कारण ही राजेश की जान गई है। संजय सिंह ने कहा कि थाने के भीतर एक दलित युवक को पीट-पीटकर मार डालना यह दर्शाता है कि प्रदेश में कानून का शासन पूरी तरह ध्वस्त हो चुका है और रक्षक ही अब भक्षक की भूमिका में आ गए हैं।
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घटना के वायरल वीडियो का जिक्र करते हुए संजय सिंह ने कहा कि वीडियो में मृतक राजेश बेबस होकर जमीन पर गिरता दिख रहा है, जो पुलिसिया दावों को पूरी तरह खारिज करता है। पुलिस पीड़ित को इलाज मुहैया कराने के बजाय साक्ष्य मिटाने और मामले को रफा-दफा करने में लगी रही। उन्होंने कहा कि यह वीडियो भाजपा सरकार के 'रामराज्य' के विज्ञापनों और दावों की असल हकीकत बयां कर रहा है।
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दोषियों को बचाने के लिए पीड़ित परिवार पर बनाया गया दबाव, तहरीर बदलकर मामला भटकाने की साजिश
संजय सिंह ने आरोप लगाया कि पुलिस ने अपनी गर्दन बचाने के लिए अमानवीयता की सारी हदें पार कर दीं। पुलिस प्रशासन ने पीड़ित परिवार को डरा-धमकाकर उनसे ही मनचाही तहरीर लिखवाई, ताकि असली दोषियों को कानूनी कार्रवाई से बचाया जा सके। उन्होंने कहा कि पुलिस द्वारा अपनी गलती छिपाने के लिए परिजनों का इस्तेमाल करना न्याय प्रक्रिया के साथ सबसे बड़ा मजाक है।