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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Lucknow News ›   UP: 6 lakh RCs worth Rs 12,353 crore on electricity dues in cold storage, district administration is not cooperating, there is a possibility of eclipse on supply

यूपी : बिजली बकाये पर 12,353 करोड़ की छह लाख आरसी ठंडे बस्ते में, जिला प्रशासन नहीं कर रहा सहयोग, आपूर्ति पर ग्रहण की आशंका

Thu, 12 May 2022 11:36 AM IST
पंकज श्रीवास्‍तव अनिल श्रीवास्तव, अमर उजाला, लखनऊ
अनिल श्रीवास्तव, अमर उजाला, लखनऊ Published by: पंकज श्रीवास्‍तव Updated Thu, 12 May 2022 11:36 AM IST
सार

बकायेदारी से राज्य विद्युत उत्पादन निगम से खरीदी जाने वाली बिजली का नियमित भुगतान नहीं हो पा रहा है जिससे कोल कंपनियों को समय से पैसा देना, ऋण आदि के ब्याज का भुगतान व अन्य खर्चे पूरा करना असंभव हो रहा है। ऐसे में आरसी की वसूली में जिला प्रशासन के ढुलमुल रवैये ने कार्पोरेशन की मुश्किलें और बढ़ा दी हैं।

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UP: 6 lakh RCs worth Rs 12,353 crore on electricity dues in cold storage, district administration is not cooperating, there is a possibility of eclipse on supply
झारखंड में बिजली संकट - फोटो : ANI

विस्तार

गंभीर आर्थिक संकट से जूझ रहे पावर कॉर्पोरेशन को बकायेदारों से वसूली करने में नाकों चने चबाने पड़ रहे हैं। हालत यह है कि पूरे प्रदेश में बिजली विभाग की ओर से बीते तीन साल में करीब छह लाख बकायेदारों से वसूली के लिए 13,743 करोड़ रुपये से ज्यादा का वसूली प्रमाणपत्र (आरसी) जारी किया गया है जबकि वसूली सिर्फ 530 करोड़ रुपये ही हो पाई। वर्तमान में 12,353 करोड़ रुपये से ज्यादा की आरसी ठंडे बस्ते में पड़ी है।

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दरअसल, जिला प्रशासन के सहयोग न करने से आरसी पर अमल नहीं हो पा रहा है। आरसी के जरिए बकाया वसूली करने पर जिला प्रशासन के अधिकारियों व कर्मचारियों के लिए पावर कॉर्पोरेशन द्वारा लागू की गई प्रोत्साहन योजना भी बेअसर साबित हुई है। पावर कॉर्पोरेशन प्रबंधन ने अपनी खराब माली हालत का हवाला देते हुए बिजली आपूर्ति पर ग्रहण की आशंका जताई है। प्रदेश में बिजली कंपनियों का कुल घाटा एक लाख करोड़ रुपये से ज्यादा है।
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अब स्थिति यह हो गई है बिजली खरीदने तक के लाले पड़ रहे हैं। जैसे-तैसे सरकारी विभागों पर बकाये के भुगतान की व्यवस्था बजट से करा दी गई है, लेकिन अन्य बकायेदारों से वसूली अब भी बड़ी चुनौती बनी हुई है। पावर कॉर्पोरेशन पर केंद्रीय एजेंसियों का बकाया 22,000 करोड़ से ऊपर है। इसमें उपभोक्ताओं की 20,596 करोड़ की देनदारी निकल रही है। बकायेदारी से राज्य विद्युत उत्पादन निगम से खरीदी जाने वाली बिजली का नियमित भुगतान नहीं हो पा रहा है जिससे कोल कंपनियों को समय से पैसा देना, ऋण आदि के ब्याज का भुगतान व अन्य खर्चे पूरा करना असंभव हो रहा है। ऐसे में आरसी की वसूली में जिला प्रशासन के ढुलमुल रवैये ने कार्पोरेशन की मुश्किलें और बढ़ा दी हैं।
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प्रोत्साहन योजना भी बेअसर
आरसी के जरिए बकाया वसूल करने के लिए पावर कॉर्पोरेशन ने जिला प्रशासन के अधिकारियों-कर्मचारियों के लिए 11 जून 2019 को प्रोत्साहन योजना लागू की थी। इसके तहत प्रत्येक वित्तीय वर्ष की पहली व दूसरी छमाही में कुल जारी आरसी के मुकाबले वसूली और अधिकतम प्रतिशत वसूली के दो वर्गों में चयनित प्रथम तीन जिलों को गोल्ड, सिल्वर और कांस्य प्रशस्ति पत्र के साथ प्रोत्साहन राशि देने की व्यवस्था है। यह प्रोत्साहन योजना भी आरसी की वसूली में बेअसर साबित हुई है। बिजली विभाग की ओर से जारी आरसी की वसूली को लेकर जिला प्रशासन की गंभीरता अंदाजा का इसी से लगाया जा सकता है कि 2019-20 में 11.03 प्रतिशत, 2020-21 में 5.44 प्रतिशत तथा 2021-22 में महज 0.82 प्रतिशत ही वसूली हो पाई।


प्रबंध निदेशक ने जिलाधिकारियों को लिखा पत्र
पावर कार्पोरेशन के प्रबंध निदेशक पंकज कुमार ने राजस्व परिषद के पोर्टल bor.up.nic.in पर बीते तीन वर्ष में प्रदेश के विद्युत वितरण खंडों से जारी आरसी और उसके मुकाबले की गई वसूली के ब्यौरे के साथ सभी डीएम को पत्र भेजकर वसूली में तेजी लाने का अनुरोध किया है। पत्र में कहा गया है कि 4 मई 2022 तक उपलब्ध विवरण के  अनुसार पूरे प्रदेश में आरसी के 5,89,146 प्रकरण लंबित हैं जिसमें 12,353.49 करोड़ रुपये वसूलने हैं। एमडी ने पत्र में पावर कार्पोरेशन की खराब वित्तीय स्थिति का हवाला देते हुए जिलाधिकारियों से ज्यादा से ज्यादा वसूली करवाने का अनुरोध किया है। पत्र में वसूली न हो पाने की स्थिति में रोस्टर के अनुसार बिजली आपूर्ति में बाधा आने की आशंका भी जताई गई है।

तीन वर्ष में जारी आरसी व वसूली की स्थिति

वित्तीय वर्ष    आरसी की राशि (करोड़ रुपये में)    वसूली राशि (करोड़ रुपये में)    प्रतिशत
2019-20    2483.95    274.00    11.03
2020-21    3561.80    193.81    05.44
2021-22    7697.70    62.90    00.82

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