ऐसे दी मां को भाई के शहीद होने की खबर कि पढ़कर आ जाएंगे आंसू
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दक्षिण कश्मीर के पंपोर शहर में श्रीनगर-जम्मू हाईवे पर आतंकवादियों से मुठभेड़ के दौरान उन्नाव की बांगरमऊ तहसील के सुल्तानपुर गांव निवासी कैलाश कुमार शहीद हो गए। शनिवार देर शाम हेडक्वार्टर से फोन के जरिए उनके शहीद होने की खबर मिली। सूचना मिलते ही इलाके में मातम छा गया।
गंजमुरादाबाद ब्लाक के सुल्तानपुर गांव निवासी कैलाश कुमार (34) चार भाइयों में दूसरे नंबर के थे। वह वर्ष 2000 में सीआरपीएफ में कांस्टेबल पद पर भर्ती हुए। इन दिनों उनकी तैनाती श्रीनगर में सीआरपीएफ की 161वीं बटालियन में थी। कैलाश ने एक साल पहले शहर के मोहल्ला किशोरीखेड़ा में मकान बनवाया था।
जहां उसकी पत्नी किरन दोनों बेटों अभय (8) व वैभव (5) के साथ रह रही है। कैलाश के तीसरे नंबर के भाई गिरजेश को रविवार को किसी काम से कानपुर जाना था। वह शनिवार शाम भाभी किरन के घर आए। चाचा गिरजेश के आने से कैलाश के दोनों बच्चे खुश थे।
तभी फोन की घंटी बजी। किरन ने फोन उठाया। हेड क्वार्टर से पति कैलाश के शहीद होने की खबर सुनते ही वह वहीं गिर पड़ी। कुछ देर के लिए गिरजेश और बच्चों को समझ में ही नहीं आया कि क्या हुआ। अगले पल किरन ने संदेशा बताया तो पूरा परिवार चीख पड़ा।
ऐसे किया आतंकियों ने हमला
इसके बाद परिवार व अन्य रिश्तेदारों को सूचना दी गई। गिरजेश ने बताया कि संदेशे में बटालियों के अफसरों ने बताया कि आतंकवादियों ने सड़क पर गाड़ी पंचर कर दी। जैसे ही भाई कैलाश अन्य जवानों के साथ नीचे उतरे। दो आतंकवादियों ने ताबड़तोड़ फायरिंग कर दी, जिसमें आठ जवान शहीद हो गए हैं।
देश की सेवा करते शहीद हुए सीआरपीएफ जवान कैलाश कुमार यादव की मौत की खबर सबसे पहले उसकी पत्नी किरन, फिर उसके भाई गिरजेश को पता चली। भाई की मौत से गिरजेश भी बदहवाश हो गया।
उसे कुछ भी नहीं सूझ रहा था। खुद को संभालते हुए उसने किसी तरह गांव में अम्मा शिवदेवी को फोन मिलाया। जैसे ही मां ने फोन उठाया गिरजेश रोते हुए बोला अम्मा भैया शहीद हो गए। कैलाश की मौत की खबर सुनते ही मां छाती पीट-पीटकर रो पड़ी। पूरे परिवार का यही हाल है।