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Lucknow: यूनिफार्म सिविल कोड देशहित में नहीं, मौलाना रहमानी बोले- AIMPLB इसे रोकने के करेगा प्रयास

Wed, 21 Jun 2023 03:29 AM IST
Digvijay Singh संवाद न्यूज एजेंसी, लखनऊ
संवाद न्यूज एजेंसी, लखनऊ Published by: Digvijay Singh Updated Wed, 21 Jun 2023 03:29 AM IST
सार

मौलाना रहमानी ने बयान जारी कर कहा कि एक मुसलमान जो नमाज, रोजा, हज और जकात के मामलों में शरीयत के नियमों का पालन करने के लिए पाबन्द है।

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Uniform civil code not in interest of country Maulana Rahmani
फाइल फोटो - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के अध्यक्ष मौलाना खालिद सैफुल्लाह रहमानी ने कहा कि यूनिफार्म सिविल कोड देशहित में नही है। ये सिर्फ मुसलमानों के लिये नहीं बल्कि देश के तमाम धर्म के मानने वालों के लिये नुकसानदेह है। उन्होंने कहा कि बोर्ड समान नागरिक संहिता के लागू होने से रोकने के लिये हर स्तर पर लोकतांत्रिक तरीके से प्रयास करेगा।

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मौलाना रहमानी ने बयान जारी कर कहा कि एक मुसलमान जो नमाज, रोजा, हज और जकात के मामलों में शरीयत के नियमों का पालन करने के लिए पाबन्द है। उसी प्रकार हर मुसलमान के लिए सामाजिक मामले निकाह व तलाक, खुला, इद्दत, मीरास, विलायत आदि में भी शरीयत के नियमों का पालन करते रहना अनिवार्य है। मौलाना ने कहा कि सरकार के समक्ष समान नागरिक संहिता की प्रस्तावित रूपरेखा से कई मामलों में शरियत के पारिवारिक मामलों से टकराती है, इसलिए धार्मिक नजरिये से मुसलमानों के लिए यह बिल्कुल अस्वीकार्य है। उन्होंने कहा कि समान नागरिक संहिता देशहित में भी नहीं है, क्योंकि भारत विभिन्न धर्मों और विभिन्न संस्कृतियों का एक गुलदस्ता है और यही विविधता इसकी सुंदरता है, अगर इस विविधता को समाप्त कर दिया गया और उन पर एक ही क़ानून लागू किया गया तो यह आशंका है कि राष्ट्रीय एकता प्रभावित होगी। 

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मौलाना ने कहा कि पर्सनल लॉ के संदर्भ में विभिन्न समूहों के दृष्टिकोण पर विचार करना ज़रूरी है और यही संविधान की भावना है। मौलाना ने बताया कि भारत के विधि आयोग ने कुछ साल पहले समान नागरिक संहिता के लिए एक प्रश्नावली जारी की थी। बोर्ड ने एक विस्तृत उत्तर भी दाखिल किया था। उन्होंने बताया कि बोर्ड के एक प्रतिनिधिमंडल ने आयोग के अध्यक्ष से मुलाकात कर अपने विचार व्यक्त किये थे, जिस पर अध्यक्ष ने बोर्ड की स्थिति की सराहना भी की थी। उन्होंने कहा कि अब फिर से भारत के विधि आयोग ने 14 जून को अपनी वेबसाइट पर इससे सम्बंधित प्रश्नावली जारी की है और संगठनों और व्यक्तियों से एक महीने के भीतर यानि 14 जुलाई तक अपने विचार दाखिल करने को कहा है। 

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मौलाना रहमानी ने कहा कि मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड विभिन्न व्यक्तियों और विशेषज्ञ अधिवक्ताओं और न्यायविदों के परामर्श से व्यापक प्रारूप तैयार कर रहा है। जिसे विधि आयोग के सुपुर्द किया जाएगा। मौलाना रहमानी ने मुस्लिम संगठनों, शिक्षक, डॉक्टर, वकील, सामाजिक कार्यकर्ताओं, धार्मिक नेताओं और विशेष रूप से महिलाओं और धार्मिक एवं राष्ट्रीय संगठनों से बोर्ड के निर्देश के बाद अधिक से अधिक संख्या में भारत के विधि आयोग की वेबसाइट पर समान नागरिक संहिता के विरोध में अपनी आपत्ति दर्ज करने की अपील की। 


बोर्ड ने कहा कि आयोग को समझाएं कि यह केवल मुसलमानों की समस्या नहीं है बल्कि सभी वर्ग इससे प्रभावित होंगे। बोर्ड ने अपील करते हुये कहा कि देश में मुसलमानों को अपने धर्म का पालन करने की जो स्वतन्त्रता संवैधानिक रूप से मिली है, वह बरक़रार रहे, इसके लिये दुआ करें। मौलाना ने कहा कि बोर्ड प्रत्येक स्तर पर समान नागरिक संहिता को रोकने के लिए शांतिपूर्ण प्रयास करेगा।

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