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Lucknow News: 'उदय' से बिजली कंपनियों की हालत सुधरी
Tue, 09 Dec 2025 02:38 AM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, लखनऊ
संवाद न्यूज एजेंसी, लखनऊ
Updated Tue, 09 Dec 2025 02:38 AM IST
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लखनऊ। आईआईएम लखनऊ के एक ताजा अध्ययन में सामने आया है कि केंद्र सरकार की उज्ज्वल डिस्काॅम एश्योरेंस योजना (उदय) ने देश की बिजली वितरण कंपनियों (डिस्काॅम) की आर्थिक स्थिति को काफी हद तक बेहतर बनाया है। यह योजना उन कंपनियों के कर्ज का बड़ा हिस्सा राज्य सरकारों को सौंपकर और राज्य समर्थित बॉन्ड जारी करके उनके वित्तीय बोझ को कम करने पर आधारित थी।
यह अध्ययन एनर्जी पॉलिसी जर्नल में प्रकाशित हुआ है और इसे आईआईएम लखनऊ के प्रो. डी. त्रिपाठी राव, प्रो. हिमाद्री शेखर चक्रवर्ती और रिसर्च स्कॉलर प्रतीक बिस्वास ने मिलकर तैयार किया है। टीम ने एक विशेष मॉडल की मदद से योजना लागू होने से पहले और बाद के नतीजों की तुलना की।
पुरानी और बड़ी कंपनियों को हुआ ज्यादा फायदा
अध्ययन में यह भी सामने आया है कि पुरानी और बड़ी बिजली कंपनियों को इस योजना से ज्यादा फायदा हुआ। ''उदय'' के बाद ''डिस्काॅम'' का कुल कर्ज कम हुआ, मुनाफा बढ़ा और कैश फ्लो स्थिर हुआ। इससे कंपनियों को रोजमर्रा के खर्च संभालने और महंगे कर्ज पर निर्भरता घटाने में मदद मिली। प्रो. राव ने कहा कि उदय योजना ने कंपनियों को कर्ज के चक्र से बाहर निकलने में मदद की है लेकिन दीर्घकालिक सुधार के लिए बिजली ढांचे का आधुनिकीकरण, डिजिटल ग्रिड, नवीकरणीय ऊर्जा और मजबूत निगरानी बेहद जरूरी है। यह अध्ययन पावर सेक्टर में सुधारों पर चल रही राष्ट्रीय चर्चा में महत्वपूर्ण योगदान देगा।
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यह अध्ययन एनर्जी पॉलिसी जर्नल में प्रकाशित हुआ है और इसे आईआईएम लखनऊ के प्रो. डी. त्रिपाठी राव, प्रो. हिमाद्री शेखर चक्रवर्ती और रिसर्च स्कॉलर प्रतीक बिस्वास ने मिलकर तैयार किया है। टीम ने एक विशेष मॉडल की मदद से योजना लागू होने से पहले और बाद के नतीजों की तुलना की।
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पुरानी और बड़ी कंपनियों को हुआ ज्यादा फायदा
अध्ययन में यह भी सामने आया है कि पुरानी और बड़ी बिजली कंपनियों को इस योजना से ज्यादा फायदा हुआ। ''उदय'' के बाद ''डिस्काॅम'' का कुल कर्ज कम हुआ, मुनाफा बढ़ा और कैश फ्लो स्थिर हुआ। इससे कंपनियों को रोजमर्रा के खर्च संभालने और महंगे कर्ज पर निर्भरता घटाने में मदद मिली। प्रो. राव ने कहा कि उदय योजना ने कंपनियों को कर्ज के चक्र से बाहर निकलने में मदद की है लेकिन दीर्घकालिक सुधार के लिए बिजली ढांचे का आधुनिकीकरण, डिजिटल ग्रिड, नवीकरणीय ऊर्जा और मजबूत निगरानी बेहद जरूरी है। यह अध्ययन पावर सेक्टर में सुधारों पर चल रही राष्ट्रीय चर्चा में महत्वपूर्ण योगदान देगा।
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